उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। बदलते मौसम के साथ ही सर्दी-खांसी, जुकाम-बुखार जैसी मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या में अचानक से बढ़ोतरी हुई है। घर-घर में मौसमी बीमारी के मरीज देखे जा रहे हैं। इस बीच इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने एक एडवायजरी जारी कर दवाई में एंटीबायोटिक्स से बचने की सलाह दी है (IMA Advisory Avoid Antibiotics)।
आईएमए ने जारी की एडवायजरी में लिखा है कि देश में खांसी, जुकाम, बुखार, मतली, उल्टी, गले में खराश, शरीर में दर्द और दस्त के मरीजों की संख्या में अचानक से बढ़ोतरी हुई है। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) से प्राप्त सूचना के अनुसार ज्यादातर मरीज इंफ्लूएंजा वायरस H3N2 के हैं। इस इंफेक्शन के ठीक होने में 5 से 7 दिन लगते हैं, बुखार तीसरे दिन ठीक हो जाता है, लेकिन खांसी ठीक होने में तीन सप्ताह का समय भी लग सकता है। इंफ्लूएंजा और अन्य वायरस के कारण अक्टूबर से फरवरी के बीच सर्दी-खांसी होना सामान्य है, ऐसे में लक्षणों के अनुसार ही उपचार की जरूरत है। इसमें एंटीबायोटिक दवाई लेने की जरूरत नहीं है।
डॉक्टर की सलाह के बगैर लोगों द्वारा ली जा रही एंटीबायोटिक्स को लेकर दी चेतावनी
आईएमए ने एडवायजरी में स्पष्ट लिखा है कि “इन दिनों देखा जा रहा है कि लोग एजीथ्रोमाईसीन और एमोक्सीक्लेव जैसी एंटीबायोटिक ले रहे हैं, यहां तक कि लोग एंटीबायोटिक दवा की डोज, फ्रिक्वेंसी (कितनी बार लेनी है) पर भी ध्यान नहीं दे रहे हैं और थोड़ा से ठीक होने पर खुद ही एंटीबायोटिक लेना बंद कर रहे हैं। यह प्रेक्टिस लोगों को तत्काल प्रभाव से बंद कर देनी चाहिए। “
लोगों के इस तरह से एंटीबायोटिक लेने से बुरा प्रभाव पड़ सकता है। जब वाकैय शरीर को एंटीबायोटिक की जरूरत होगी, तब यह शरीर फायदा नहीं पहुंचा सकेंगी। डॉक्टर भी मरीजों को एंटीबायोटिक देने से परहेज करें। इस संबंध में आईएमए ने उनके ट्विटर हैंडल पर भी एडवायजरी की डिटेल जानकारी साझा की है।
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