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उदयपुर के बहुचर्चित रूचिता हत्याकांड में आरोपी दिव्य कोठारी को आजीवन कारावास की सजा

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रूचिता का कातिल खुद को पागल बताकर लेना चाहता था बेनिफिट

हर अपराधी एक गलती करता ही है, दिव्य ने भी की, पढ़िए.. हत्याकांड की पूरी कहानी

उदयपुर/चित्तौड़गढ़,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर में 1 दिसंबर 2016 को हुए बहुचर्चित रूचिता हत्याकांड (udaipur ruchita murder case) में आज गुरूवार को न्यायालय ने आरोपी दिव्य कोठारी को आजीवन कारावास और 50 हजार रूपए आर्थिक दंड की सजा सुनाई है। मामले की सुनवाई 2017 में ही चित्तौड़गढ़ न्यायालय में ट्रांसफर कर दी गयी थी।

लोक अभियोजक सुरेशचन्द्र शर्मा ने बताया कि रूचिता जैन एक अधिवक्ता थीं, ऐसे में उदयपुर के वकीलों ने आरोपी दिव्य कोठारी का केस लड़ने से इनकार कर दिया था। जिससे इस केस को चित्तौड़गढ़ जिला एवं सत्र न्यायालय में ट्रांसफर कर दिया गया था। केस की पूरी सुनवाई चित्तौड़गढ़ जिला एवं सत्र न्यायालय में हुई है। आज न्यायालय ने रूचिता जैन की हत्या के आरोप में दिव्य कोठारी को आईपीसी की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 50 हजार रूपए अर्थदंड की सजा सुनाई है।

हर अपराधी एक गलती करता ही है, दिव्य ने भी की..पढ़िए.. हत्याकांड की पूरी कहानी

सात साल से न्याय की उम्मीद लिए लड़ रहे रूचिता जैन के पति केवी गुप्ता ने बताया कि आज रूचिता को न्याय मिला है। वे बोले कि इस केस में दिव्य कोठारी के पिता अरविंद कोठारी ने दिव्य को बचाने के लिए उसे पागल बताकर कोर्ट को गुमराह करने का प्रयास किया था, लेकिन केस में हर बार सच की जीत हुई।

केवी गुप्ता ने कहा कि इस केस में शुरूआत में तो पुलिस के कुछ अधिकारियों ने असली कातिल तक पहुंचने के बजाए मुझे ही आरोपी समझ लिया था, लेकिन कातिल तो कोई और ही था, तत्कालीन सुखेर थाना एसएचओ मांगीलाल ने मामले में हर साक्ष्य को मजबूती से फाइल में शामिल किया, जिससे रूचिता के हत्यारे को सजा दिलवाने में बहुत मदद मिली।

खून से सनीं फ्लैट की दीवारें और छत हत्यारे के बहशीपन की गवाही दे रहीं थी

गौरतलब है कि 1 दिसंबर 2016 को सुखेर थाना क्षेत्र के न्यू भूपालपुरा स्थित ऑर्बिट कॉम्पलैक्स अपार्टमेंट में रहने वाली रूचिता जैन पत्नी केवी गुप्ता की निर्मम हत्या की गयी थी। हत्या का आरोपी उसी अपार्टमेंट के अन्य फ्लैट में रहने वाला 21 साल का स्टूडेंट दिव्य कोठारी पुत्र अरविंद कोठारी निकला था।

रूचिता जैन एक रजिस्टर्ड वकील थीं और ऑर्बिट कॉम्पलैस के एक फ्लैट में पति केवी गुप्ता व दो बच्चों के साथ रहती थीं। इसी अपार्टमेंट के दूसरे फ्लैट में दिव्य कोठारी उसके माता-पिता के साथ रहता था। रूचिता के लिए दिव्य उसके छोटे भाई या बेटे जैसा था, लेकिन दिव्य के मन में रूचिता के लिए अच्छी भावनाएं नहीं थीं।

जिस सुसाइड नोट को दिव्य ने बचाव के लिए लिखा, उसी से पकड़ा गया

1 दिसंबर 2016 को जब रूचिता फ्लैट पर अकेली थी, बच्चे स्कूल और पति ऑफिस गए थे। दिव्य रूचिता के फ्लैट में गया और छेड़खानी करने लगा। रूचिता ने छेड़खानी की शिकायत परिजनों से करने की बात कहकर दिव्य का विरोध किया, तो दिव्य ने रूचिता की निमर्म हत्या कर दी। हत्या इतनी बेरहमी से की गयी थी कि पूरे फ्लैट में खून ही खून बिखरा हुआ था। रूचिता के खून के छींटें छत तक गयीं थी, दीवारों पर उसका सिर इस तरह से पटका गया था कि दीवारें भी खून से लाल हो गयीं थी। दिव्य इतना शातिर था कि रूचिता की हत्या के बाद सभी को चमका देते हुए वहां से निकल गया।

ज्यादातर केस की तरह ही इस केस में भी पुलिस का शक पति पर गया। पति को हिरासत में ले जाकर सख्ती से पूछताछ की जाने लगी। लेकिन कहते हैं अपराधी कहीं न कहीं गलती करता ही है। दिव्य उसी रात उसके घर में एक सुसाइड नोट छोड़कर कहीं चला गया। उस सुसाइड नोट से पुलिस की शक की सुई दिव्य कोठारी पर गयी। पुलिस ने सभी तरफ नाकाबंदी की और दिव्य को बड़ी तालाब के पास से पकड़ लिया। पुलिस ने पूछताछ में दिव्य ने रूचिता की हत्या करना कबूल लिया।

पुलिस ने शुरूआत में की थी चूक, बाद में सुधारी: कातिल खुद को पागल साबित करना चाहता था

लेकिन दिव्य इस केस में सजा से बचने के लिए खुद को मानसिक बीमार और पागल साबित करना चाहता था। एक बार तो उसने पुलिस के उच्च अधिकारियों को मासूम चेहरा बनाकर गुमराह कर ही दिया था, एसपी ने मेडिकल जांच कराए बगैर ही यह बयान तक दे दिया था कि दिव्य मानसिक बीमार और अवसाद का शिकार है और उसी बीमारी में उससे हत्या की। लेकिन तत्कालीन सुखेर एसएचओ मांगीलाल को पूछताछ में यह महसूस हो गया था कि दिव्य मानसिक बीमार नहीं है। ऐसे में उन्होंने जब तफ्तीश कर चालान पेश किया तो हर साक्ष्य को मजबूती के साथ रखा।

2017 में दिव्य के पिता अरविंद कोठारी ने कोर्ट में एफिडेविड पेश किया कि दिव्य मानसिक बीमार है। इस पर कोर्ट के आदेश पर एक मेडिकल बोर्ड गठित हुआ और दिव्य की जांच की गयी। मेडिकल बोर्ड ने रिपोर्ट में स्पष्ट कहा कि दिव्य न तो पागल है और न ही मंदबुद्धि है। मेडिकल बोर्ड की यह रिपोर्ट केस में काफी अहम साबित हुई।

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