बीजिंग,(ARLive news)। चीन में कोरोना वायरस से अब तक 636 लोगों की मौत हो चुकी है। इस महामारी के जद में चीन के अलावा दूसरे देश भी आने लगे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन इसे अंतरराष्ट्रीय जन स्वास्थ्य आपदा भी घोषित कर चुका है, लेकिन इससे निपटने के अब तक कोई कारगर उपाय नहीं पता चले हैं। चीन ने भी कोरोना वायरस को लेकर पहले गंभीरता दिखायी होती तो शायद आज यह महामारी नहीं होती।
हां एक साल पहले ही चीन के एक डॉक्टर ली वेनलियांग ने कोरोना वायरस के बारे में चीन को चेताया था। लेकिन तब उल्टा चीन की पुलिस ने डॉक्टर का उत्पीड़न किया था। चीन में अब इस डॉक्टर की भी मौत हो गई है।
विसल ब्लोअर को ही अफवाह फैलाने वाला बता दिया था
34 वर्षीय वेनलियांग वह पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने पिछले साल दिसंबर में वुहान में कोरोना वायरस के सामने आने की जानकारी दी थी। वेनलियांग ने अपने चिकित्सा महाविद्यालय के साथियों को चीनी मैसेजिंग ऐप वीचैट पर बताया था कि स्थानीय सी फूड बाजार से आए सात मरीजों का सार्स जैसे संक्रमण का इलाज किया जा रहा है और उन्हें अस्पताल के पृथक वार्ड में रखा गया है। उन्होंने बताया कि परीक्षण में साफ हुआ है कि यह विषाणु कोरोना वायरस समूह का है।
इसी समूह के सिवियर एक्यूट रेस्पीरेटरी सिंड्रोम (सार्स) विषाणु भी है जिसकी वजह से 2003 में चीन एवं पुरी दुनिया में 800 लोगों की मौत हुई थी। वेनलियांग ने अपने दोस्तों को कहा कि वे अपने परिजनों को निजी तौर पर इससे सतर्क रहने को कहें। हालांकि, यह संदेश कुछ घंटे में ही वायरल हो गया और पुलिस ने उन्हें अफवाह फैलाने वाला करार देकर प्रताड़ित किया था।

