Site iconSite icon AR Live News

लोकसभा चुनाव : भाजपा के ‘राम‘ को ‘ज्योति‘ की चुनौती

जयपुर में भाजपा के ‘राम‘ का कांग्रेस की ‘ज्योति‘ से सीधा मुकाबला होगा।

जयपुर,(ARLive news), मुकेश शर्मा। कांग्रेस ने जयपुर शहर लोकसभा सीट से पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को मैदान में उतारा है। जबकि भाजपा ने एक बार फिर सांसद रामचरण बोहरा पर विश्वास व्यक्त करते हुए उन्हें  प्रत्याशी बनाया है। ज्योति के मैदान में आने के बाद जयपुर शहर लोकसभा सीट का मुकाबला ब्राहमण बनाम वैश्य हो गया है। इस सीट पर ब्राहमण और वैश्य बहुसंख्यक वोटर है, इसलएि दोनों के बीच मुकाबला रोचक होगा।

पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने रामचरण बोहरा को पहली बार लोकसभा चुनाव का टिकट दिया था। मोदी लहर के बीच बोहरा ने जयपुर से रिकार्ड जीत दर्ज की और करीब  67 प्रतिशत वोट हासिल किए। इस बार बोहरा के लिए यह इतिहास दोहराना मुश्किल होगा। जयपुर शहर लोकसभा सीट ब्राहमण सीट मानी जाती है। अब तक कांग्रेस और भाजपा यहां ब्राहमण प्रत्याशी मैदान में उतारती रही है;  इस बार कांग्रेस ने वैश्य कार्ड खेला है। वैश्य भाजपा का परम्परागत वोट बैंक माना जाता है।

कांग्रेस अब भाजपा के इस परम्परागत वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी कर रही है। ज्योति के रूप में कांग्रेस ने करीब 48 साल बाद महिला प्रत्याशी का मैदान में उतारा है। ज्योति कांग्रेस की फायरब्रांड महिला नेता है, जो कांग्रेस की टिकट जयपुर की पहली डायरेक्ट इलेक्टेड मेयर बनी। नगरीय निकाय 2009 में पहली बार प्रदेश में नगरीय निकाय के प्रमुख के डायरेक्ट इलेक्शन का नियम लागू किया। मेयर चुनाव में कांग्रेस की ज्योति खंडेलवाल और भाजपा की सुमन शर्मा के बीच मुकाबला हुआ। ज्योति ने भाजपा के गढ जयपुर को ढहा कर जीत दर्ज की और जयपुर की पहली डायरेक्ट इलेक्टेड मेयर बनी। यही कारण है कि कांग्रेस ने इस बार ज्योति को बोहरा के सामने उतारा है।

बोहरा जयपुर जिला प्रमुख रह चुके है और बा्रहमण समाज का प्रतिनिधित्व करते है। जयपुर में सबसे ज्यादा ब्राहमण वोटर है, इसलिए भाजपा ने बोहरा को एक बार फिर टिकट दिया है। जयपुर शहर की चार विधानासभा सीट सांगानेर, विदयाधर नगर, किशनपोल और मालवीय नगर में वैश्य वोटर्स काफी संख्या में है, इसलएि कांग्रेस ने ज्योति के रूप में वैश्य कार्ड खेला है।

दोनों की प्रत्याशियों के लिए अपने ही सबसे बडी चुनौती है। कांग्रेस और भाजपा में भीतरघात होने की पूरी संभावना है। बोहरा और ज्योति खंडेलवाल को लेकर दोनों की पार्टियों में विरोध रहा है। ऐसे में भीतरघात को रोकना दोनों के  लिए सबसे बडी चुनौती होगा।

Exit mobile version