वरिष्ठ चिकित्सकों की माने तो अस्पताल में हर दिन करीब दो हजार मरीज भर्ती रहते हैं और करीब दो से तीन हजार मरीज दिखाने के लिए आते हैं। हड़ताल के चलते सभी मरीज परेशान हुए। स्त्री रोग से संबंधित कई आॅरेशन टालने पड़ गए। पूरे दिन मरीज उपचार के लिए भटकते रहे, लेकिन रेजीडेंट्स को उन पर रहम नहीं आया।
उपचार के लिए भटकते मरीजों के परिजनों ने कहा कि कोई भी मांग मनमाने का यह तरीका ठीक नहीं हो सकता है। किसी एक डाॅक्टर या पुलिसकर्मी के बीच हुए झगड़े में अगर हजारों मरीज की जान पर बन आती है तो उसके कसूरबार न सिर्फ हड़ताल करने वाले रेजीडेंट डाॅक्टर, बल्कि अस्पताल प्रशासन और सरकार की भी होगी। मरीजों के परिजनों ने कहा कि सरकार को चाहिए कि ऐसे नियम बनाए कि कोई निजी मांग या हित के लिए इस तरह हड़ताल पर नहीं जाए।
एसपी को हटाने की कर डाली मांग
रेजीडेंट्स ने हड़ताल के साथ पेश मांगपत्र की तीन मांगों में सबसे पहले खुद का बचाव करते हुए पहली मांग यही रखी है कि विवाद के दिन पुलिस ने जिस रेजीडेंट डाॅक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, उसे वापस ले। इन पर दर्ज एफआईआर वापस हो और संबंधित एएसआई पर कार्यवाही की जाए। रेजीडेंट्स की मांगों पर पुलिस विभाग ने ज्यादा प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की तो रेजीडेंट्स ने एसपी को तक उदयपुर से हटाने की मांग कर डाली है।
यूनियन के खिलाफ नहीं जा सकते, इसलिए हड़ताल पर
कुछ वरिष्ठ रेजीडेंट डाॅक्टर नाम नहीं बताने की शर्त पर यह तो स्वीकार रहे हैं कि 14 सितंबर को हुए विवाद में रेजीडेंट डाॅक्टर की गलती थी और वे इस हड़ताल के पूरी तरह पक्ष में नहीं हैं। लेकिन यूनियन के खिलाफ नहीं जाने के चलते वे भी हड़ताल में शामिल हैं।
हाॅस्पिटल गेट पर चल रही रूटीन चेकिंग में रोकने से शुरू हुआ था मामला
थानाधिकारी रवीन्द्र सिंह चारण ने बताया कि 14 सितंबर को हाॅस्पिटल गेट के बाहर सड़क पर ट्रैफिक पुलिस की रूटीन चेकिंग चल रही थी। तभी एक रेजीडेंट डाॅक्टर की कार कोर्ट चौराहे से तेज गति में आई। कांस्टेबल ने हाथ देकर कार रोकने का प्रयास किया। कार चालक रेजीडेंट डाॅक्टर ने बाइक रोकने के बजाए कांस्टेबल को गाली देते हुए और हाथ से थप्पड़ मारने का इशारा करते हुए तेज गति में अस्पताल परिसर में अंदर चला गया। कांस्टेबल ने एएसआई को बताया कि उसने उस कार को रोकने का प्रयास किया था, लेकिन वह रूका नहीं, इस पर एएसआई बाइक से उसके पीछे हाॅस्पिटल परिसर में आए और रेजीडेंट डाॅक्टर को रोका और गाली देने का कारण पूछा। इसी के साथ दोनों में विवाद शुरू हो गया। चारों तरफ दूसरे रेजीडेंट डाॅक्टर इकट्ठे हो गए, तो सांचोर निवासी इस रेजीडेंट डाॅक्टर दीपाराम ने दूसरे रेजीडेंट डाॅक्टर के साथ मिलकर एएसआई के थप्पड़ मार दिए और उसकी वर्दी पर लगे सितारे भी खींच दिए। इधर मौके पर होमगार्ड भी पहुंच गए तो रेजीडेंट ने उनके साथ भी अभद्रता की थी। इस तरह आधा घंटे तक यह विवाद चला। सीनियर डाॅक्टर और पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत किया।
ट्रेफिक एएसआई मिसरी लाल ने दो रेजीडेंट डाॅक्टर सांचोर निवासी दीपाराम और लक्ष्मणगढ़ निवासी सुरेन्द सिंह के खिलाफ राजकार्य में बाधा का मुकदमा दर्ज करवाया था। वायरल हुए वीडियो में भी रेजीडेंट डाॅक्टर्स की गलती ज्यादा नजर आई तो इनके पक्ष में कोई कार्यवाही हुई नहीं। ऐसे में अब अपनी बातें मनमाने के लिए रेजीडेंट डाॅक्टर्स ने हड़ताल शुरू कर दी है।
