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गजेन्द्र हत्याकांड : पार्षद, उसके बेटे पर हत्या का मामला दर्ज, मुर्दाघर में महिलाएं धरने पर बैठी


पिता के जेल से आने के बाद होगा अन्तिमसंस्कार
उदयपुर के रामपुरा चौराहे के पास गजेन्द्र छापरवाल की गोली मारकर हुई हत्या मामले में रविवार को परिजनों ने पोस्टमार्टम के बाद भी शव लेने से इनकार कर दिया। मोर्चरी में परिजन और समाज के महिला-पुरुष धरना देकर बैठ गए और कहा जब तक पुलिस नामजद कराए गए आरोपियों को गिरफ्तार नहीं करती और जेल में बंद गजेन्द्र के पिता प्रकाश को लेकर नहीं अाती तब तक शव नहीं लेंगे।
पुलिस की काफी समझाइश के बाद भी परिजन नहीं माने, रविवार होने के कारण अदालत संबंधी कोई कार्यवाही नहीं हो सकी, ऐसे में पोस्टमार्टम के बाद शव मोर्चरी में ही रखा रहने दिया गया और परिजनों ने संबंधित मांगों का ज्ञापन कलेक्टर को दिया और मोर्चरी से  लौट गए।
पुलिस ने मृतक गजेन्द्र के भाई महेन्द्र छापरवाल की रिपोर्ट पर सुनील पुत्र शंभुलाल लोट, पार्षद रमेश चंदेल, पार्षद पुत्र दीपक चंदेल सहित छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सुनील दीपक चंदेल का साला है। महेन्द्र ने पुलिस को दी रिपोर्ट में बताया है कि गजेन्द्र को गोली मारने के लिए सुनील लोट जिस बाइक पर आया था, वह दीपक चंदेल चला रहा था और रमेश चंदेल इसी बाइक पर पीछे बैठे थे। इसके अलावा दूसरी बाइक पर भी तीन आरोपी थे।
पुलिस ने बताया कि महेन्द्र की रिपोर्ट पर पुलिस ने घटना के कुछ घंटों बाद ही नामजद दीपक चंदेल को कोटा से पकड़ा था। मामले में बाइक सवार तीन आरोपियों को सदर पुलिस चित्तौड़गढ़ ने संदिग्ध मानकर पकड़ लिया था, चित्तौड़गढ़ पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने फायरिंग कर उदयपुर से फरार होना कबूला, तो चित्तौड़गढ़ पुलिस ने उदयपुर पुलिस को सूचना दी, जिस पर पुलिस तीनों को पकड़कर उदयपुर लेकर आई है। ये फायरिंग के बाद प्रतापनगर चौराहे से बस में बैठे थे। अब तक हुई पड़ताल में सामने आया है कि इन तीन बाइक सवार आरोपियों को सुनील ने गजेन्द्र को गोली मारने के लिए हायर किया था। गजेन्द्र पर सुनील के अलावा दूसरी बाइक सवार बदमाशों  ने भी गोली चलाई थी।
पार्षद पर लगे आरोपों में आ रहा विरोधाभास

पुलिस की जांच शुरू होने से पहले ही महेन्द्र यह दावा कर रहा है कि पार्षद और पार्षद पुत्र की मोबाइल लोकेशन घटनास्थल की नहीं आएगी, लेकिन वे मौके पर हमलावरों में शामिल थे। सवाल यह है कि जांच हुए बगैर महेन्द्र को यह बात कैसे पता है कि आरोपी पार्षद और उसके बेटे की कॉल लोकेशन घटनास्थल की नहीं आएगी। हालां कि महेन्द्र यह तर्क दे रहा है कि आरोपियों ने सोची-समझी साजिश के तहत वारदात को अंजाम दिया है और खुद को बचाने के लिए वे मोबाइल लोकेशन कहीं और की दिखाएंगे।

मेरा बेटा तो आज उदयपुर में ही नहीं था घटनास्थल पर कैसे होगा

पार्षद रमेश चंदेल ने बताया कि मैं कल शाम को महाकाल मंदिर गया था और वहां से लौटने के बाद घर पर ही था, कहीं गया ही नहीं हूं। वहीं मेरा बेटा दीपक अपने मामा के घर सगाई समारोह में बाहर गया हुआ है, वह उदयपुर में ही नहीं था, तो घटनास्थल पर कैसे हो सकता था। हम लोग सुनील लोट के रिश्तेदार हैं, इसलिए हमें फंसाने के लिए मृतक के परिजन हम पर झूठे आरोप लगा रहे हैं।

 9 एमएम पिस्टल से हुए थे फायर 
 पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार गजेन्द्र के चार गोलियां लगी थीं। एक गोली उसके दायीं तरह से घुसी और दोनों फैफड़े और ह्रदय को चीरते हुए आगे फंस गई। दूसरी गोली पीठ पर लगी और पसलियों में फंस गई, वहीं तीसरी और चौथी  गोली बाजू पर लगी थी। मौके से खून के नमूने लिए और खाली कार्टेज बरामद किए हैं, ऐसे में प्रथमदृष्ट्या फायर पिस्टल  से किए गए थे, प्रथमदृष्ट्या फायरिंग 9 एमएम पिस्टल से की गई है। नमूनों और गोलियों की पुलिस एफएसएल जांच कराएगी।
पिता दाहसंस्कार में शामिल हो सकें, सोमवार को कोर्ट में लगाएंगे एप्लीकेशन
 परिजनों ने बताया कि पिता प्रकाश के जेल से आने के बाद ही गजेन्द्र का दाहसंस्कार किया जाएगा। दाह संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल पर आ सकें, इसके लिए सोमवार को कोर्ट में याचिका लगाई जाएगी और निवेदन किया जाएगा कि प्रकाश छापरवाल को पैरोल पर छोड़ दिया जाएग, ताकि वह पुत्र के अंतिम संस्कार में शामिल हो सकें।
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