क्यों कोर्ट को भेजी गलत जानकारी, छुट्टी पर हैं तो क्यों वीआईपी बंदोबस्त ड्यूटी में होने का मैसेज करवाया।
135 में से 84 हुए होस्टाइल
जोशी इससे पहले चार बार पेशियों पर नहीं पहुंचे
: फरवरी में सुधीर जोशी के मुंबई कोर्ट में बयान होने थे। लेकिन किसी कारण वश कोर्ट की ओर से ही सभी तारीखें आगे बढ़ा दी गई थीं। तब अगली तारीख मार्च में दी गई।
: 13 मार्च को सुधीर जोशी के बयान होने थे, लेकिन वे इस बार भी नहीं पहुंचे और कोर्ट को सीबीआई के जरिए कारण बताया कि जिले में पद्मावत फिल्म को लेकर विरोध प्रदर्षन चल रहे हैं। जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने में उनकी ड्यूटी है तो वे नहीं आ सकेंगे। इसके बाद कोर्ट ने अगली तारीख अप्रेल में दी थी।
: 5 अप्रेल को सुधीर जोशी की बयानों की तारीख पेशी थी। इस बार भी वे नहीं अाए थे। उन्होंने सीबीआई के जरिए कोर्ट को सूचित किया था कि जिले में एससी-एसटी वर्ग के लोगों की ओर से रिजर्वेशन को लेकर आंदोलन चल रहे हैं, जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने में उनकी ड्यूटी है तो वे नहीं आ सकेंगे। अगली तारीख जून में दी थी।
: 5 जून को सुधीर जोशी को मुंबई सीबीआई कोर्ट में बयान देने पहुंचना था। लेकिन उन्होंने कोर्ट को मैसेज करवाया कि वे हॉस्पिटलाइज्ड हैं। मेडिकल लीव पर हैं, इसलिए नहीं आ सके। उन्होंने कोर्ट से निवेदन किया था कि अगले महीने तारीख दी जाए। इस पर कोर्ट ने 6 जुलाई तारीख दी थी।
गवाह ने कहा जोशी मेेरे बड़े भाई के दोस्त हैं, उन्हें एक व्यक्ति का पता करवाया था
मुंबई की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में शुक्रवार को भीलवाड़ा के दीपक अग्रवाल, अंबाजी गुजरात के गोविंद भाई बंजारा और मोहनलाल बंजारा के बयान हुए। बयानों के बाद एक-एक कर सीबीआई ने तीनों को ही होस्टाइल घोषित किया।
: दीपक अग्रवाल ने बताया कि पुलिस अधिकारी सुधीर जोशी मेरे बड़े पंकज के दोस्त हैं। नवंबर 2005 में जोशी ने मुझे एक व्यक्ति के बारे में पता करने का मैसेज किया था। मैंने पता कर उन्हें सूचना दी थी। 29 नवंबर 2005 को सुधीर जोशी टीम के साथ भीलवाड़ा आए थे, मैं उन्हें उस घर तक ले गया, जिसका उन्होंने मैसेज किया था। मैं मेरी बाइक पर था, उन्हें घर दिखाने के बाद मैं वहां से लौट आया। अगले दिन न्यूज पेपर से पता कि मैंने जो घर बताया था, वहां से पुलिस ने कुख्यात बदमाश तुलसी को गिरफ्तार किया है।
: मोहन लाल और गोविंद भाई तुलसी के शव की पहचान के समय बने पंचनामा के गवाह हैं। दोनों ने कोर्ट को बताया कि उन्हें कोई शव नहीं दिखाया गया था और न ही वे हॉस्पिटल गए थे। गोविंद भाई ने कोर्ट में कहा अंबाजी में मेरा खाने का होटल है। मुझे पुलिस ने थाने बुलाया था और वहां कुछ पंचनामा के दस्तावेजों पर साइन करवाए थे। उनमें क्या लिखा था, यह पता नहीं था। वहीं मोहनलाल ने कोर्ट को बताया कि उसे पुलिस ने बस स्टैंड के टैक्सी स्टैंड पर बुलाया था। वहां कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए थे। मैं पुलिस के साथ कहीं नहीं गया था।
