सरपंच चुनाव में फीकी दिखी सोशल मीडिया की चमक
लकी जैन, उदयपुर। लाखों फॉलोअर्स, हजारों लाइक्स और करोड़ों व्यूज… लेकिन जब बात अपने ही गांव की सरकार चुनने की आई तो सोशल मीडिया की चमक वोटों में बदलती नजर नहीं आई। राजस्थान के पंचायत चुनावों में सामने आए तीन नतीजे इस समय खास चर्चा में हैं। | Rajasthan Panchayat Election Social Media Influencers
कहीं करोड़ों की डिजिटल पहुंच रखने वाले इन्फ्लुएंसर की पत्नी तीसरे नंबर पर रहीं, तो कहीं 21 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स वाले यूट्यूबर को महज 33 वोट मिले। एक अन्य चर्चित सोशल मीडिया स्टार भी अपने गांव में तीसरे स्थान पर रहा। इन नतीजों ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है—क्या रील्स की लोकप्रियता को रियल लाइफ के जनसमर्थन में बदला जा सकता है?
केस-1: ‘हिम्मत बा’ के लाखों फॉलोअर्स, गांव में तीसरा स्थान
जोधपुर के बावड़ी क्षेत्र के लवेरा कलां से सोशल मीडिया पर ‘हिम्मत बा’ के नाम से मशहूर हिम्मताराम खदाव भी सरपंच पद के चुनाव मैदान में उतरे। खदाव की सोशल मीडिया पहचान पहले से काफी मजबूत है और 2024 में ही उनके Instagram पर 10 लाख फॉलोअर्स का आंकड़ा पार करने की रिपोर्ट सामने आई थी।
चुनाव में, हालांकि, उन्हें 458 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार गणपत राम ने 1,264 वोट लेकर जीत दर्ज की, जबकि सुरेंद्र पाल सिंह 1,155 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे।
केस-2: 2.77 करोड़ YouTube फॉलोअर्स, पत्नी को मिले 277 वोट
भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा पंचायत समिति की फूलिया खुर्द ग्राम पंचायत में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पवन साहू की पत्नी कोमल साहू सरपंच पद का चुनाव मैदान में थीं। पवन साहू की सोशल मीडिया पर बड़ी लोकप्रियता है। रिपोर्टों के मुताबिक उनके YouTube पर करीब 2.77 करोड़ और Instagram पर करीब 70 लाख फॉलोअर्स बताए जाते हैं।
इसके बावजूद चुनाव परिणाम चौंकाने वाला रहा। कोमल साहू को 277 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहीं। भगवती लाल सोनी 1,203 वोट लेकर सरपंच निर्वाचित हुए, जबकि कालूराम जाट 797 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे।
यानी जिस डिजिटल दुनिया में पवन साहू की पहुंच करोड़ों लोगों तक है, उसी परिवार की चुनावी पहुंच अपने गांव के मतदाताओं के बीच इतनी मजबूत नहीं दिखी।
केस-3: 21 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स, लेकिन सिर्फ 33 वोट
फलोदी जिले के पीलवा पंचायत समिति की इंदों की ढाणी-द्वितीय ग्राम पंचायत का मामला तो और भी ज्यादा चौंकाने वाला है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, यूट्यूबर और ज्योतिषी ओमप्रकाश बिश्नोई के Instagram, Facebook और YouTube को मिलाकर 21 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स बताए जाते हैं।
लेकिन करीब 1,600 मतदाताओं वाली ग्राम पंचायत में उन्हें सिर्फ 33 वोट मिले।
उनके Instagram पर करीब 14 लाख, Facebook पर 2.32 लाख और YouTube पर लगभग 5.5 लाख फॉलोअर्स/सब्सक्राइबर बताए गए हैं।
दिलचस्प बात यह है कि चुनाव हारने के बाद बिश्नोई ने खुद भी सोशल मीडिया की लोकप्रियता और जमीनी समर्थन के अंतर को स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि चुनाव ने उन्हें मतदाताओं से व्यक्तिगत रूप से जुड़ने की अहमियत समझाई।
रील्स की लोकप्रियता बनाम गांव की राजनीति
पंचायत चुनावों के इन नतीजों ने एक सीधा संदेश दिया है—रील पर ‘लाइक’ करना और बैलेट पर वोट देना दो बिल्कुल अलग फैसले हैं। सोशल मीडिया स्टार होना डिजिटल लोकप्रियता दे सकता है, लेकिन चुनाव जीतने के लिए गांव की चौपाल पर भरोसा और मतदाता का वोट जरूरी है। गांव की राजनीति में व्यक्तिगत संपर्क, परिवार और स्थानीय रिश्ते, गांव में मौजूदगी, पुराने काम, स्थानीय मुद्दों और भरोसे की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

