- यूडीए ने सुखेर थाने में दर्ज करायी एआईआर: भुवाणा में यूडीए की जमीन के फर्जी पट्टों का मामला
- वर्ष 2002 में भुवाणा पंचायत में कंप्यूटर नहीं था, लेकिन आरोपी 2002 की नोटशीट कंप्यूटर द्वारा प्रिंट की हुई ले आए
उदयपुर,एआर लाइव न्यूज। उदयपुर शहर के भुवाणा में आसमान छूते जमीन भाव के चलते भूखंड धोखाधड़ी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। कुछ भूमाफिया ने तो यूडीए की 26900 स्क्वॉयर फीट जमीन के पंचायत के फर्जी पट्टे बनवाकर कोर्ट से स्टे तक ले लिया। यूडीए ने जब कोर्ट में आरोपियों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की पड़ताल की तो फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। | Udaipur UDA bhuwana land fraud FIR
उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) के भूमि अभिलेख निरीक्षक ने सुखेर थाने में रिपोर्ट देकर फर्जीवाड़ा करने वाले तीन आरोपियों झाड़ोल के ब्राह्मणों का खेरवाड़ा निवासी दुर्गा शंकर पुत्र रामचन्द्र ब्राह्मण, मोहन सिंह पुत्र लाल सिंह और भैरू सिंह पुत्र गोविंद सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवायी है। उक्त जमीन की बाजार कीमत करीब 13 करोड़ रूपए बतायी गयी है। जानकारी के अनुसार यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
यूडीए ने जिस जमीन का ऑक्शन कर दिया, उसके फर्जी पट्टे ले आए आरोपी
एफआईआर के अनुसार मामला राजस्व ग्राम भुवाणा, ग्राम पंचायत भुवाणा, में रत्नागिरी पहाड़ी के पास स्थित आराजी नंबर 3055 (26900 स्क्वॉयर फीट जमीन) से जुड़ा है। शिकायत में कहा गया है कि यह जमीन यूडीए के स्वामित्व और खाते में है। यूडीए की ओर से जमीन का अधिग्रहण कर मुआवजा देने के बाद कब्जा लिया गया और बाद में भूखंडों की योजना बनाकर सार्वजनिक नीलामी के जरिए बिक्री की गई। यूडीए ने स्पष्ट किया है कि यह आराजी कभी पंचायत की संपत्ति नहीं रही।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तीनों आरोपियों ने इसी जमीन के संबंधित पंचायत के कूट रचित और फर्जी पट्टे तैयार कर उदयपुर की अदालत में यूडीए के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा का वाद भी पेश किया। जब यूडीए ने इन पट्टों और और पंचायत की पत्रावली की जांच की तो पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ गया। पुलिस पड़ताल में सामने आएगा कि इन फर्जीवाड़े में इन तीन आरोपियों के अलावा उदयपुर के कोई बड़े भूमाफिया तो शामिल नहीं है।
फर्जीवाड़े का खुलासा करते मुख्य बिंदु, जो यूडीए की जांच में सामने आए
- कथित पट्टों में राजस्थान ग्राम पंचायत नियम 1963 का उल्लेख है, जबकि शिकायत के अनुसार 30 दिसंबर 1996 से राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 लागू हो चुके थे।
- कथित पट्टे पंचायत समिति बड़गांव की वर्ष 2002 की पट्टा बुक में दर्ज नहीं पाए गए।
- पंचायत और पंचायत समिति स्तर पर इन पट्टों की प्रतियां उपलब्ध नहीं होने की बात शिकायत में कही गई है।
- पंचायत सचिव ने यूडीए को लिखित रूप से बताया कि संबंधित भूखंडों की कोई पत्रावली पंचायत में मौजूद नहीं है और आराजी नंबर 3055 पंचायत की संपत्ति नहीं है।
- शिकायत के अनुसार प्रस्तुत पत्रावली में ऐसे दस्तावेज भी थे, जिन पर सवाल उठाए गए हैं कि वर्ष 2002 में पंचायत में कंप्यूटर नहीं होने के बावजूद नोटशीट कंप्यूटर से प्रिंट कैसे हुई।
- शिकायत में सरपंच और सचिव के हस्ताक्षरों को भी कथित तौर पर फर्जी बताया गया है।
- आरोप है कि तीनों व्यक्तियों ने भूखंड खरीदने के लिए पंचायत में आवेदन नहीं किया, न मौका रिपोर्ट बनी, न पंचायत कोरम से प्रस्ताव हुआ और न सार्वजनिक नीलामी की गई।
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