मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने का आरोप
उदयपुर,एआर लाइव न्यूज। महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय (एमबी हॉस्पिटल), उदयपुर में मरीजों की जांच के लिए निजी एजेंसी शाम्भवी लैब प्राइवेट लिमिटेड को दिए गए टेंडर में बरती गयी अनियमितताएं और लैब द्वारा की जा रही गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। उदयपुर के पूर्व महापौर चन्द्रसिंह कोठारी की शिकायत पर हाथीपोल थाने में एफआईआर दर्ज हो गयी है और जांच एडि.एसपी रैंक के अधिकारी को सौंपी गयी है। | MB hospital udaipur shambhavi lab irregularities
पूर्व महापौर की शिकायत पर हुई प्राथमिक जांच में टेंडर प्रक्रिया, लैब की उपलब्धता, एनएबीएल प्रमाणपत्र और सैंपल की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई कथित अनियमितताएं सामने आई हैं। एफआईआर में शाम्भवी लैब की अनियमितताओं में एमबी हॉस्पिटल प्रशासन की मिलीभगत की आशंका जाहिर की गयी है।
जांच में क्या-क्या सामने आया?
- उदयपुर में शाम्भवी लैब की लेबोरेटरी के बजाए कलेक्शन सेंटर होने की शिकायत।
- कलेक्शन सेंटर पर आवश्यक जांच मशीनें नहीं मिलीं।
- उदयपुर पते से संबंधित एनएबीएल प्रमाणपत्र को लेकर सवाल।
- एक प्रस्तुत एनएबीएल प्रमाणपत्र अवधि पार बताया गया।
- सैंपल दूसरे राज्य स्थित लैब भेजे जाने की जानकारी।
- कलेक्शन सेंटर पर सैंपल सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड-चेन व्यवस्था नहीं मिलने का दावा।
- टेंडर प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी के आरोप।
2023 में जारी हुई थी ई-निविदा
एफआईआर के अनुसार अस्पताल प्रशासन ने 22 सितंबर 2023 को सेंट्रल लैब में नहीं होने वाली जांचों के लिए आउटसोर्स के माध्यम से ई-निविदा जारी की थी। निविदा प्रक्रिया के बाद शाम्भवी लैब को 16 दिसंबर 2023 को कार्यादेश जारी किया गया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि निविदा की शर्त संख्या 27 के अनुसार टेंडर में भाग लेने वाली फर्म का उदयपुर में लैब होना जरूरी था। इसके बावजूद टेंडर के समय फर्म की उदयपुर स्थित लैब से जुड़े दस्तावेजों को लेकर सवाल उठे हैं।
जांच कमेटियों को उदयपुर में नहीं मिली नियमित लैब
मामला सामने आने के बाद जिला कलेक्टर और महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय प्रशासन ने अलग-अलग जांच कमेटियों का गठन किया। शिकायत में दी गई जांच रिपोर्ट के अनुसार, उदयपुर में शाम्भवी लैब की नियमित प्रयोगशाला के बजाय एक दुकाननुमा स्थान पर केवल कलेक्शन सेंटर संचालित मिला।
रिपोर्ट में कथित तौर पर यह भी उल्लेख है कि वहां शाम्भवी लैब का स्पष्ट बोर्ड या ऐसा कोई पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिला, जिससे यह प्रमाणित हो सके कि पूर्व में उस स्थान पर पूरी लैब संचालित थी।
जांच मशीनें और सैंपल स्टोरेज पर भी सवाल
जांच रिपोर्ट के अनुसार कलेक्शन सेंटर पर जांच के लिए आवश्यक मशीनें नहीं मिलीं। वहीं, सैंपल को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कोल्ड-चेन मेंटेनेंस की व्यवस्था नहीं होने की बात भी सामने आई।
शिकायत में आरोप है कि सैंपल लखनऊ स्थित लैब भेजे जाते थे और वहां जांच के बाद रिपोर्ट अस्पताल की सेंट्रल लैब तक पहुंचाई जाती थी। ऐसे में सैंपल की सुरक्षा और रिपोर्ट की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
एनएबीएल प्रमाणपत्र को लेकर भी उठे सवाल
शिकायत में कहा गया है कि टेंडर के समय शाम्भवी लैब की ओर से चार एनएबीएल प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए गए थे। आरोप है कि इनमें उदयपुर स्थित शाम्भवी डायग्नोस्टिक लैब का प्रमाणपत्र शामिल नहीं था और प्रस्तुत किए गए प्रमाणपत्रों में से एक की अवधि भी समाप्त पाई गई।
इसी आधार पर शिकायतकर्ता पूर्व महापौर ने टेंडर प्रक्रिया में फर्म की पात्रता और अस्पताल प्रशासन की भूमिका की विस्तृत जांच की मांग की है।
फर्जी रिपोर्ट के आरोप की भी जांच की मांग
मामले में अस्पताल के चिकित्सक की ओर से कथित तौर पर शाम्भवी लैब द्वारा बिना जांच किए रिपोर्ट तैयार कर भेजे जाने की शिकायत का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस शिकायत को प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया।
शिकायतकर्ता चन्द्रसिंह कोठारी का कहना है कि टेंडर जारी करने से लेकर मरीजों के सैंपल की जांच और रिपोर्ट अस्पताल तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया की जांच जरूरी है।
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