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मसाई मारा में डॉ. अरविंदर सिंह ने ‘जूनियर रेंजर’ प्रमाणन हासिल कर पेश की मिसाल

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उदयपुर, एआर लाइव न्यूज। शारीरिक दिव्यांगता को जीवन की सीमा नहीं बल्कि नई संभावनाओं का माध्यम बनाने वाले उदयपुर के अर्थ डायग्नोस्टिक्स के सीईओ और पेनेशिया डिसेबिलिटी राइट्स के अध्यक्ष डॉ. अरविंदर सिंह ने अफ्रीका के विश्वप्रसिद्ध मसाई मारा वन्यजीव क्षेत्र, केन्या में एक और प्रेरक उपलब्धि हासिल की है। चुनौतीपूर्ण जंगल सफारी और प्रकृति-अन्वेषण गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करते हुए उन्होंने ‘जूनियर रेंजर’ प्रमाणन प्राप्त किया। | Dr Arvinder Singh Masai Mara Junior Ranger | Dr Arvinder Singh News

चलने के लिए सहायक उपकरणों पर निर्भर होने के बावजूद डॉ. अरविंदर सिंह ने मसाई मारा के प्राकृतिक और चुनौतीपूर्ण वातावरण में वन एवं वन्यजीवों को निकट से समझने की गतिविधियों में भाग लिया। उन्होंने जंगल में वन्यजीवों के संकेतों और पदचिह्नों की पहचान, वन्यजीव ट्रैकिंग तथा प्रकृति-अवलोकन जैसी गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता की।

स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली को समझने के उद्देश्य से डॉ. सिंह ने पारंपरिक मनका-निर्माण गतिविधि में भी हिस्सा लिया। उनका यह अनुभव केवल एक साहसिक यात्रा नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों की क्षमता और सहभागिता को लेकर समाज के सामने एक महत्वपूर्ण संदेश भी है।

डॉ. अरविंदर सिंह ने कहा कि मसाई मारा का यह अनुभव केवल रोमांच के लिए नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य यह संदेश देना है कि यदि सुगम वातावरण, उचित सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति उपलब्ध हो तो दिव्यांगजन भी प्रकृति, पर्यटन और साहसिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले सकते हैं।

उन्होंने कहा कि समाज को दिव्यांगता को केवल अक्षमता के रूप में देखने के बजाय लोगों को अवसर और अनुकूल सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

उदयपुर के डॉ. अरविंदर सिंह लंबे समय से दिव्यांगजन अधिकारों, सुगम्यता और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कार्य कर रहे हैं। वे लगातार यह संदेश देते रहे हैं कि समावेशी व्यवस्था और बेहतर पहुंच सुविधाएं दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा में समान अवसर प्रदान कर सकती हैं।

डॉ. अरविंदर सिंह इससे पहले भी अपनी शारीरिक सीमाओं को चुनौती देते हुए कई उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं। उनके नाम तीन विश्व कीर्तिमान दर्ज हैं। लद्दाख क्षेत्र में साहसिक गतिविधियों से लेकर समुद्र में स्कूबा डाइविंग तक, उन्होंने अनेक चुनौतियों को स्वीकार कर विशेष पहचान बनाई है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी उनकी उपलब्धियां उल्लेखनीय हैं और वे भारतीय प्रबंधन संस्थान के स्वर्ण पदक विजेता रहे हैं।

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डॉ. सिंह का कहना है—

“दिव्यांगता जीवन की यात्रा को अलग बना सकती है, लेकिन मंजिलों को छोटा करना आवश्यक नहीं है।”

अफ्रीका के मसाई मारा में हासिल की गई यह नई उपलब्धि विशेष रूप से उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो शारीरिक सीमाओं के कारण अपने सपनों और संभावनाओं को सीमित मान लेते हैं। डॉ. अरविंदर सिंह का सफर यह संदेश देता है कि सही अवसर, सुगम वातावरण और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ हर चुनौती को नई उपलब्धि में बदला जा सकता है।

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