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80 साल की मांगी बाई ने किया कमाल: 15 लाख रुपये विद्यालय विकास के लिए किए दान: कलेक्टर ने किया सम्मान

80-Year-Old Mangibai Ahir Donates Rs 15 Lakh for School Development, Honored by Chittorgarh Collector Dr. Manju80-Year-Old Mangibai Ahir Donates Rs 15 Lakh for School Development, Honored by Chittorgarh Collector Dr. Manju

चित्तौड़गढ़,एआर लाइव न्यूज। शिक्षा के क्षेत्र में आर्थिक सहयोग देकर सरकारी विद्यालयों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले भामाशाहों को चित्तौड़गढ़ जिला प्रशासन की ओर से सम्मानित किया गया। जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने समिति कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के भामाशाहों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। | chittorgarh 80-year-old Mangibai Ahir donates15 lakh for education

इस अवसर पर चित्तौड़गढ़, जिले की राशमी तहसील के देवीपुरा गांव की 80 वर्षीय मांगी बाई अहीर विशेष रूप से चर्चा में रहीं। मांगी बाई स्वयं निरक्षर हैं और उनकी कोई संतान नहीं है, लेकिन गांव के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले, इसके लिए उन्होंने 15 लाख रुपये विद्यालय विकास के लिए दान किए। chittorgarh 80-year-old Mangibai Ahir donates15 lakh for education

मांगी बाई ने शिक्षा को समाज की सबसे बड़ी सेवा मानते हुए विद्यालय के विकास में सहयोग किया। उनके सहयोग से स्कूल में पानी की टंकी, कक्षाकक्ष और सरस्वती मंदिर सहित विभिन्न विकास कार्य किए गए।

उनका कहना है कि गांव के बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर आगे बढ़ें, इससे बड़ी खुशी उनके लिए कोई नहीं है। पहले धार्मिक कार्यों में दान करने वाली मांगी बाई ने अब शिक्षा को ही सबसे बड़ी सेवा मान लिया है।

जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने मांगी बाई के इस समर्पण को समाज के लिए प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह का योगदान अन्य लोगों को भी सरकारी विद्यालयों के विकास के लिए आगे आने की प्रेरणा देता है।

जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने शिक्षा विभाग में भामाशाहों को प्रोत्साहित करने के लिए हर माह आठ भामाशाहों को सम्मानित करने की पहल शुरू की है। इसका उद्देश्य सरकारी विद्यालयों के विकास में समाज और भामाशाहों की भागीदारी को बढ़ावा देना है।

कलक्टर ने कहा कि शिक्षा के मंदिरों को समृद्ध करना ही सच्ची सेवा है। विद्यालयों को बेहतर बनाने के लिए सहयोग करने वाले भामाशाहों का योगदान अतुलनीय है। समाज से मिले सहयोग को समाज को वापस देने की भावना सराहनीय है।

कार्यक्रम में भादसोड़ा के मूल निवासी और अमेरिका में रह रहे NRI डॉ. मुस्तफा के शिक्षा क्षेत्र में योगदान की भी सराहना की गई। उन्होंने गांव के बच्चों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने के लिए करीब 18 लाख रुपये का सहयोग दिया।

उनके सहयोग से विद्यालय में कंप्यूटर लैब, शिक्षकों की व्यवस्था, इन्वर्टर और CCTV सहित कई सुविधाएं विकसित की गई हैं। डॉ. मुस्तफा ने क्षेत्र के विद्यालयों के विकास के लिए विद्या क्रांति फाउंडेशन भी बनाया है।

राउप्रावि मडावदा में ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी का उदाहरण भी सामने आया। स्कूल प्रबंधन समिति ने करीब 150 घरों वाले गांव के प्रत्येक परिवार को विद्यालय से जोड़ा और ग्रामीणों के सहयोग से लगभग 5 लाख रुपये जुटाकर स्कूल का विकास कराया गया। ग्रामीणों की मांग पर जिला कलक्टर ने स्कूल के लिए खेल मैदान की भूमि व्यवस्था, बालिका शौचालय और स्मार्ट बोर्ड के प्रस्ताव CSR के माध्यम से स्वीकृत कराने के निर्देश दिए।

विद्यालय विकास के लिए आर्थिक सहयोग देने वाले इन भामाशाहों को भी किया सम्मानित

कार्यक्रम में प्रशिक्षु आईएएस रविन्द्र मेघवाल, मुद्रा, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद दशोरा, डाइट प्रधानाचार्य राजेंद्र कुमार शर्मा, समसा के एडी नरेन्द्र सिंह चौहान, एसीपी दीनदयाल नारायणीवाल, पीओ शिवकुमार चावला, विनोद कुमार मुंदडा, चित्तौड़गढ़ ब्लॉक के संदर्भ व्यक्ति डॉ. विकास अग्रवाल, हेमेन्द्र सोनी सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

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