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फायरिंग के आरोपी गिरफ्तार: उदयपुर में क्या हैंडीक्राफ्ट माफिया फिर सिर उठा रहा है?

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उदयपुर,एआर लाइव न्यूज। उदयपुर शहर के सहेलीमार्ग पर मीरापार्क के पास हेरिटेज लोक मरूधर नृत्य केन्द्र भवन के बाहर मंगलवार को हिस्ट्रीशीटर को गोली मारने वाले आरोपियों को पुलिस ने धरदबोचा है। आरोपियों ने पूछताछ में हिस्ट्रीशीटर को गोली मारने का जो कारण बताया है, उसने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या 15-20 साल पहले पर्यटन नगरी उदयपुर में जिस हैंडीक्राफ्ट माफिया को पुलिस ने कुचल दिया था, वह फिर से फन उठा रहा है। | udaipur firing case
उदयपुर पर्यटन नगरी है और यहां हैंडीक्राफ्ट माफिया का फिर पनपना बड़ी चुनौती बन सकता है। क्योंकि वर्ष 2000 से 2010 के बीच हैंडीक्राफ्ट माफिया उदयपुर पुलिस के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द था। फायरिंग करने वाले आरोपी के खिलाफ भी 20 मुकदमें दर्ज हैं, जिस पर फायरिंग की गयी वह हिस्ट्रीशीटर है। इनमें विवाद पर्यटकों की अवैध गाइडिंग ( लपकागिरी ) में प्राइवेट टूरिस्ट पॉइंट, होटलों और हैंडीक्राफ्ट शोरूमों से मिलने वाले कमीशन को लेकर था।

एसपी डॉ. अमृता दुहन ने बताया कि हिस्ट्रीशीटर पर फायरिंग करने के आरोप में लाल मगरी, अंबामाता निवासी शादाब खान उर्फ अली गाइड (30 वर्ष) और अहमद हुसैन कॉलोनी, अंबामाता निवासी मोहम्मद अरशद उर्फ बाटी (28 वर्ष) को गिरफ्तार किया है। शादाब के खिलाफ मारपीट, आर्म्स एक्ट आदि के करीब 20 अपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। जबकि अरशद के खिलाफ भी जानलेवा हमला व मादक पदार्थों की तस्करी के 2 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन दोनों ने जिसे इरफान को गोली मारी थी, वह भी घंटाघर थाने का हिस्ट्रीशीटर है।

आरोपियों की गिरफ्तारी में डीएसपी राजेश यादव के नेतृत्व में डीएसटी प्रभारी भरत योगी, कोटड़ा एसएचओ प्रभुलाल सहित पूरी पुलिस टीम की मुख्य भूमिका रही है।

पुलिस के अनुसार आरोपी शादाब खान उर्फ अली गाइड और घायल हिस्ट्रीशीटर इरफान खान के बीच पर्यटकों से मिलने वाले कमीशन और कथित अवैध गाइडिंग (लपकागिरी) को लेकर विवाद चल रहा था। 31 अगस्त को भी इसी बात पर इनमें झगड़ा हुआ था। इसी रंजिश के चलते शादाब इरफान को मारने का मौका तलाश रहा था।

अवैध गाइडिंग करने वाले ये कन्वेंसिंग गिरोह के बदमाश (लपके) पर्यटकों को किसी न किसी तरह से कन्वेंस कर प्राइवेट टूरिस्ट पॉइंट, होटल और हैंडीक्राफ्ट शोरूम तक ले जाते हैं। प्राइवेट टूरिस्ट पॉइंट, होटल और हैंडीक्राफ्ट शोरूम पर्यटकों से होने वाली कमाई का एक हिस्सा इन बदमाशों को कमीशन के रूप में देते हैं। इस पूरे रैकेट में न सिर्फ पर्यटकों की सुरक्षा को खतरा होता है, बल्कि उदयपुर आने वाले कई पर्यटक इस रैकेट के चलते खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं।

इस स्थिति में उदयपुर में पर्यटन पुलिस की सक्रियता पर भी सवाल खड़े होते हैं, क्योंकि इनकी अवैध गाइडिंग पर अंकुश लगाना और पर्यटकों की सुरक्षा ही इनकी जिम्मेदारी है।

15-20 साल पहले उदयपुर में हैंडीक्राफ्ट माफिया के सपोर्ट में चलने वाली कनवेंसिंग गैंग पुलिस का सिर दर्द बन गयी थी। कनवेंसिंग गैंग पर्यटकों के ग्रुपों को किसी भी तरह से कनवेंस कर हैंडीक्राफ्ट शोरूम तक लाती थी और शोरूम वाले इन गैंग के गुर्गों को मोटा कमीशन देते थे।

धीरे-धीरे ये कनवेंसिंग गिरोहों की संख्या बढ़ी और कमीशनखोरी के चलते इन्हीं कनवेंसिंग गिरोहों के बीच रंजिश, फायरिंग, गोलीबारी होने लगी। तत्कालीन एसपी द्वारा हैंडीक्राफ्ट माफिया के खिलाफ की गयी सख्त कार्रवाइयों से बदमाशों की इसमें रूचि कम हुई, इधर वर्ष 2011 से उदयपुर में जमीनों के भाव बढ़ने से हैंडीक्राफ्ट माफिया के सपोर्ट में लगे बदमाश और गैंगस्टर जमीन विवादों में रूचि लेने लगे थे और उदयपुर में भू-माफिया खड़ा हो गया था।

पुलिस ने बताया कि कोटड़ा के जंगलों में जब पुलिस ने इन दोनों आरोपियों को घेरा तो बचने के लिए अंधेरे में ही हाईवे किनारे बनी खाई में कूद गए। पथरीली और उबड़-खाबड़ जमीन पर गिरने से दोनों आरोपियों के पैरों में गंभीर चोटें आईं और पैर टूट गए।

डिसक्लेमर: एआर लाइव न्यूज (AR Live News) से मिलते-जुलते नामों से रहें सावधान, उनका एआर लाइव न्यूज से कोई संबंध नहीं है। एआर लाइव न्यूज के संबंध में कोई भी बात करने के लिए पत्रकार लकी जैन (9887071584) और पत्रकार देवेन्द्र शर्मा (9672982063) ही अधिकृत हैं।

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