नगर निगम चुनाव 2026
देवेंद्र शर्मा,उदयपुर, एआर लाइव न्यूज।नगर निगम चुनाव 2026 का बिगुल बज चुका है। उदयपुर में इस बार चुनाव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल माना जा रहा है। दोनों प्रमुख दलों में अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी के बीच अब नगर निगम में बोर्ड बनाने को लेकर राजनीतिक दावे तेज हो गए हैं। | latest news udaipur nagar nigam election 2026 | udaipur nagar nigam election
भाजपा लगातार सातवीं बार नगर निगम में अपना बोर्ड बनाने का दावा कर रही है। वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लगातार भाजपा के बोर्ड से जनता परेशान हो चुकी है और इस बार कांग्रेस मजबूती के साथ नगर निगम में अपना बोर्ड बनाएगी। | Congress Failed to Choose Leader of Opposition in Five Years, Now Eyes Udaipur Municipal Corporation Board in 2026
हालांकि, कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसके पिछले नगर निगम बोर्ड का अनुभव है। पिछले बोर्ड में पर्याप्त संख्या में कांग्रेस पार्षद होने के बावजूद कांग्रेस पांच साल के कार्यकाल में नेता प्रतिपक्ष का चयन तक नहीं कर पाई थी। ऐसे में इस बार बोर्ड बनाने के कांग्रेस के दावे पर उसके पिछले प्रदर्शन और संगठनात्मक एकजुटता को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। | udaipur nagar nigam election
प्रदेश में सरकार थी, उसके बावजूद ऐसे हालात बने
2019 में उदयपुर नगर निगम के 70 वार्डों में चुनाव हुए थे। इनमें भाजपा के 44, कांग्रेस के 20 और 5 निर्दलीय प्रत्याशी पार्षद चुने गए थे। इसके बाद तत्कालीन गहलोत सरकार की ओर से नगर निगम उदयपुर में 12 सहवृत पार्षद भी मनोनीत किए गए। इससे निगम बोर्ड में कांग्रेस की संख्या और मजबूत हुई।
इसके बावजूद कांग्रेस अपने पार्षदों में से नेता प्रतिपक्ष का चयन नहीं कर पाई। प्रदेश कांग्रेस की ओर से पर्यवेक्षक उदयपुर पहुंचे और कांग्रेस पार्षदों से रायशुमारी भी की गई थी। इसके बाद पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट और नेता प्रतिपक्ष के चयन पर अंतिम निर्णय होना था, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ पाया।
नतीजा यह रहा कि नेता प्रतिपक्ष के चयन का इंतजार करते-करते नगर निगम बोर्ड का पांच साल का कार्यकाल ही पूरा हो गया।
गुटों में बंटे रहे कांग्रेस पार्षद
पिछले नगर निगम बोर्ड में नेता प्रतिपक्ष की दावेदारी को लेकर कांग्रेस पार्षदों के बीच मतभेद सामने आए थे। निर्वाचित पार्षद अलग-अलग गुटों में बंट गए और बाद में सहवृत पार्षदों के मनोनयन के बाद भी कांग्रेस के भीतर एकजुटता नहीं बन पाई।
स्थानीय नेताओं की पसंद-नापसंद और अलग-अलग गुटों के बीच खींचतान ने कांग्रेस के लिए नेता प्रतिपक्ष चुनने की राह मुश्किल कर दी थी। यही वजह है कि इस बार कांग्रेस के सामने सिर्फ भाजपा को चुनावी चुनौती देने की नहीं, बल्कि अपने संगठन और पार्षदों को एकजुट रखने की भी बड़ी चुनौती है।
क्या इस बार कांग्रेस बना पाएगी नगर निगम में बोर्ड?
नगर निगम चुनाव 2026 में कांग्रेस बोर्ड बनाने का दावा कर रही है, लेकिन उसके सामने कई सवाल हैं। क्या पार्टी टिकट वितरण में गुटबाजी से बच पाएगी? क्या सभी प्रमुख नेता एक मंच पर आकर चुनाव लड़ेंगे? क्या कांग्रेस अपने पार्षदों और संभावित प्रत्याशियों के बीच एकजुटता बनाए रख पाएगी?
कांग्रेस के लिए इस चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यही होगी कि वह पिछले बोर्ड की गलतियों से कितना सबक लेती है।
यदि कांग्रेस को उदयपुर नगर निगम में बोर्ड बनाना है तो उसे पसंद-नापसंद की राजनीति से ऊपर उठकर टिकट वितरण, चुनावी रणनीति और नेतृत्व में स्पष्टता दिखानी होगी। साथ ही पार्टी को मजबूत नेतृत्व के साथ चुनावी मैदान में उतरना होगा। वरना पिछली बार की तरह इस बार भी कांग्रेस के लिए सत्ता की बजाय नगर निगम में विपक्ष की कुर्सियां ही इंतजार करती नजर आ सकती हैं। | udaipur nagar nigam election Congress bjp Targets Board
2019 उदयपुर नगर निगम चुनाव में क्या रहा था परिणाम?
- कुल वार्ड: 70
- भाजपा पार्षद: 44
- कांग्रेस पार्षद: 20
- निर्दलीय पार्षद: 5
- बाद में मनोनीत सहवृत पार्षद: 12
- कांग्रेस पिछले बोर्ड में नेता प्रतिपक्ष का चयन नहीं कर पाई।
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