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उदयसागर में लाखों टन अवैध भराव डाला, जिम्मेदार अफसरों पर उठे सवाल

Udaipur Udai Sagar Lake illegal fillingUdaipur Udai Sagar Lake illegal filling
देवेंद्र शर्मा। उदयपुर | एआर लाइव न्यूज | उदयपुर की ऐतिहासिक झीलों को लेकर हाईकोर्ट की सख्ती और लगातार दिए जा रहे निर्देशों के बावजूद उदयसागर झील में बड़े पैमाने पर लाखों टन अवैध रूप से भराव डालने का मामला सामने आया है। पनवाड़ी क्षेत्र में दिन-रात भराव डाले जाने के आरोपों ने झील संरक्षण व्यवस्था और जिम्मेदार विभागों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। | Udaipur Udai Sagar Lake illegal filling

करीब 1100 एमसीएफटी भराव क्षमता वाली उदयसागर झील में यदि बड़े पैमाने पर भराव डाला जा रहा है, तो इससे झील के जलग्रहण क्षेत्र, प्राकृतिक स्वरूप और जलधारण क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। सवाल यह भी है कि इतनी बड़ी गतिविधि लंबे समय तक चलने के बावजूद स्थानीय प्रशासन, राजस्व विभाग और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी?

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उदयपुर की झीलों के संरक्षण को लेकर हाईकोर्ट कई बार प्रशासन को सख्त निर्देश दे चुका है। झीलों में सीवर का पानी जाने, अवैध निर्माण और झील पेटे में अतिक्रमण जैसे मामलों को लेकर लगातार चिंता जताई जाती रही है।

इसके बावजूद उदयसागर में भराव डालने का मामला सामने आना प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े करता है।यह केवल झील के प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं, बल्कि झील संरक्षण से जुड़े नियमों और न्यायालय के निर्देशों की सीधे तौर पर अवहेलना है। | Udaipur Udai Sagar Lake illegal filling

उदयसागर झील में भराव डालने वाले कौन हैं और किसकी अनुमति से यह गतिविधि चल रही है? उसके बावजूद जिम्मेदार अफसर आंख मूंदकर बैठे है। यदि झील पेटे में अवैध रूप से भराव डाला गया है तो प्रशासन को संबंधित लोगों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करवानी चाहिए। कार्रवाई नहीं होने से जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

भराव वापस हटाने की जिम्मेदारी किसकी?

अगला बड़ा सवाल यह है कि इस अवैध भराव को हटाने का खर्च कौन उठाएगा?, प्रशासन चाहे तो नियमों के तहत जिम्मेदार पक्ष से ही अवैध भराव हटवाने की कार्रवाई कर सकता है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग उदयसागर झील के मूल स्वरूप को बहाल करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

उदयसागर में लाखों टन भराव एक दिन में नहीं डाला गया होगा। यदि यह गतिविधि कई दिनों से जारी थी तो स्थानीय राजस्व अमले की निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इस मामले में पटवारी, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार और जल संसाधन विभाग के संबंधित अधिकारियों की भूमिका और निगरानी व्यवस्था की जांच जरूरी है। यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि अधिकारियों को इस गतिविधि की जानकारी कब मिली और जानकारी मिलने के बाद क्या कार्रवाई की गई।

उदयपुर की झीलों में भराव डालकर उनके प्राकृतिक क्षेत्र को कम करने को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। मस्तानबाबा रोड की तरफ फतहसागर झील सीमा में इसी तरह हजारों टन भराव डालने की साजिश उजागर हो चुकी है।
ऐसे मामलों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो भविष्य में झीलों को खत्म करने वाली इस प्रकार की अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

जिला प्रशासन समय-समय पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरकारी कार्मिकों को सम्मानित करता है। इसी तरह संवेदनशील पर्यावरणीय मामलों में लापरवाही पाए जाने पर जवाबदेही तय करना भी प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा होना चाहिए।

उदयपुर की पहचान उसकी झीलों से है। उदयसागर, फतहसागर और अन्य झीलों का संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि शहर की पहचान और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।अब देखने वाली बात यह है कि प्रशासन उदयसागर में कथित अवैध भराव की जांच करता है या नहीं, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होती है या नहीं और झील पेटे से भराव हटाकर झील के मूल स्वरूप को बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

डिसक्लेमर: एआर लाइव न्यूज (AR Live News) से मिलते-जुलते नामों से रहें सावधान, उनका एआर लाइव न्यूज से कोई संबंध नहीं है। एआर लाइव न्यूज के संबंध में कोई भी बात करने के लिए पत्रकार लकी जैन (9887071584) और पत्रकार देवेन्द्र शर्मा (9672982063) ही अधिकृत हैं।

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