उदयपुर,एआर लाइव न्यूज। देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। इस अवसर पर आर्थिक आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तीकरण की दिशा में हिंदुस्तान जिंक की पहल एक नई तस्वीर सामने रखती है। कंपनी की ‘सखी’ पहल से 25 हजार से अधिक ग्रामीण महिलाएं बचत, ऋण, कौशल विकास, उद्यमिता और आजीविका के अवसरों से जुड़ चुकी हैं। वहीं कंपनी के आधुनिक माइंस और स्मेल्टर्स में महिलाएं तकनीक, ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटलीकरण जैसे क्षेत्रों में नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। | Hindustan Zinc women empowerment
सखी पहल से ग्रामीण महिलाओं को मिला आर्थिक आत्मनिर्भरता का रास्ता
राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में हिंदुस्तान जिंक की ‘सखी’ पहल महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर केंद्रित है। इन समूहों के जरिए महिलाओं को नियमित बचत, ऋण सुविधा, उद्यमिता प्रशिक्षण और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
सखी उत्पादन समिति से जुड़ी फरजाना इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। घरेलू श्रम कार्य से आगे बढ़ते हुए उन्होंने परिधानों और एफएमसीजी उत्पाद निर्माण में अपनी पहचान बनाई। आज वह करीब 3.47 लाख रुपये की वार्षिक आय अर्जित कर रही हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान उनकी इकाई ने कपड़े के मास्क तैयार किए, जिससे उनकी आय भी बनी रही और समाज की जरूरत भी पूरी हुई।
डेयरी से 90 हजार रुपये से अधिक मासिक आय
हिंदुस्तान जिंक की ‘समाधान’ पहल के जरिए कृषि और पशुपालन आधारित आजीविका को भी मजबूत किया जा रहा है। मटून गांव की प्रेम बाई व्यास ने इस पहल के माध्यम से अपने डेयरी व्यवसाय को विस्तार दिया।
पहले वह प्रतिदिन करीब 10 लीटर दूध बेचती थीं और भुगतान के लिए बिचौलियों पर निर्भर रहती थीं। आज उनका दूध उत्पादन करीब 85 लीटर प्रतिदिन पहुंच गया है और मासिक आय 90 हजार रुपये से अधिक है। भुगतान सीधे बैंक खाते में प्राप्त होने के साथ वह स्वयं 20 पशुओं की डेयरी का संचालन कर रही हैं।
हिंदुस्तान जिंक के कार्यबल में 26.3 प्रतिशत महिलाएं
ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ कंपनी के कार्यस्थलों पर भी महिला भागीदारी में उल्लेखनीय बदलाव आया है। हिंदुस्तान जिंक के कुल कार्यबल में 26.3 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो देश के मेटल एवं माइनिंग सेक्टर में सबसे अधिक महिला प्रतिनिधित्व में शामिल है।
कंपनी के अनुसार उसके 62 प्रतिशत कर्मचारी 35 वर्ष से कम आयु के हैं, जिससे उसका कार्यबल युवा और समावेशी बना है।
आज कंपनी में महिलाएं भूमिगत खदानों में काम करने के साथ भारी मशीनरी का संचालन, उत्पादन प्रक्रियाओं का प्रबंधन और माइन रेस्क्यू जैसी जिम्मेदारियां निभा रही हैं। इसके अलावा एआई, मशीन लर्निंग, ऑटोमेशन और डिजिटलीकरण जैसे उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है।
तेजस्विनी पहल से स्मेल्टर संचालन में महिला नेतृत्व
हिंदुस्तान जिंक की ‘तेजस्विनी’ पहल के तहत चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स के लीचिंग एवं प्यूरिफिकेशन सेक्शन में महिलाओं की टीम विभिन्न शिफ्टों में संचालन की जिम्मेदारी संभाल रही है। इससे मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में महिलाओं की तकनीकी भागीदारी और नेतृत्व को नई मजबूती मिली है।
वहीं देबारी जिंक स्मेल्टर में कार्यरत आईआईटी दिल्ली से स्नातक स्वप्निल थोरी डिजिटलाइजेशन विभाग का नेतृत्व कर रही हैं। वह एआई और मशीन लर्निंग आधारित समाधानों के जरिए स्मेल्टर्स और पावर प्लांट्स में तकनीकी बदलाव को आगे बढ़ा रही हैं। उनके नवाचारों से प्रक्रिया दक्षता, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस और संसाधनों के बेहतर उपयोग में योगदान मिला है और उन्हें उनकी टीम के साथ कई सम्मान भी प्राप्त हुए हैं। | Hindustan Zinc women empowerment
आर्थिक स्वतंत्रता को विकसित भारत से जोड़ने का प्रयास
हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अमरेंदु प्रकाश ने कहा कि स्वतंत्रता ने देश को अपना भविष्य गढ़ने की आजादी दी है, जबकि आर्थिक स्वतंत्रता व्यक्ति को अपने जीवन को बेहतर बनाने की ताकत देती है। कंपनी का उद्देश्य केवल आर्थिक मूल्य सृजित करना नहीं, बल्कि ऐसे अवसर उपलब्ध कराना भी है, जिनसे लोग आगे बढ़ सकें।
उन्होंने कहा कि चाहे ग्रामीण क्षेत्र की महिला अपना व्यवसाय शुरू करे या तकनीकी क्षेत्र में कदम रखने वाली युवा महिला आधुनिक उद्योगों में नेतृत्व करे, हिंदुस्तान जिंक महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
वेदांता समूह की कंपनी हिंदुस्तान जिंक शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य, सामुदायिक विकास और महिला सशक्तीकरण के माध्यम से समावेशी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए कंपनी का जोर इस बात पर है कि विकास का लाभ उसके परिचालन क्षेत्रों से आगे बढ़कर समाज और स्थानीय समुदायों तक पहुंचे।

