उदयपुर,एआर लाइव न्यूज। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान ने प्रधान खनिजों के 141 मिनरल ब्लॉकों की ई-नीलामी पूरी कर देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। राज्य सरकार का दावा है कि इससे खनन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ी है, निवेश और रोजगार के नए अवसर बने हैं तथा सरकारी राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। | Rajasthan Mining e-Auction 2026 | Rajasthan Mining News
राजस्थान क्यों बना देश का अग्रणी माइनिंग राज्य?
खान एवं भूविज्ञान विभाग के अनुसार, अब तक ई-नीलामी के माध्यम से कुल 141 प्रधान खनिज ब्लॉकों का आवंटन किया जा चुका है। इनमें—
- 105 माइनिंग लीज
- 30 कंपोजिट लाइसेंस
- 1 एक्सप्लोरेशन लाइसेंस
की नीलामी राज्य सरकार द्वारा की गई है। इसके अतिरिक्त 7 क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉकों की नीलामी भारत सरकार ने की है। | Rajasthan Mining e-Auction 2026 | latest news Rajasthan Mining
किन-किन खनिजों की हुई सबसे अधिक नीलामी?
राजस्थान में अब तक ई-नीलामी के तहत प्रमुख खनिजों के ब्लॉक इस प्रकार आवंटित किए गए हैं—
- 101 लाइमस्टोन ब्लॉक
- 13 आयरन ओर ब्लॉक
- 8 बेस मेटल ब्लॉक
- 4 सिलिशियस अर्थ ब्लॉक
- 4 रेयर अर्थ एलिमेंट ब्लॉक
- 3 मैंगनीज ब्लॉक
- 2 गोल्ड ब्लॉक
- 2 पोटाश एवं हैलाइट ब्लॉक
- 1-1 गार्नेट, एमरल्ड, फ्लोराइट और रॉक फॉस्फेट ब्लॉक
विभाग का फोकस अब इन सभी नीलाम ब्लॉकों को शीघ्र उत्पादन में लाने पर है।
ढाई वर्षों में रिकॉर्ड प्रदर्शन
राज्य सरकार के अनुसार, पिछले ढाई वर्षों में 102 प्रधान खनिज ब्लॉकों की ई-नीलामी की गई है। जबकि नई नीलामी व्यवस्था लागू होने से लेकर 14 दिसंबर 2023 तक केवल 39 ब्लॉकों की ही नीलामी हुई थी।
वर्षवार उपलब्धियां—
- 2024-25: 34 ब्लॉकों की ई-नीलामी
- 2025-26: 39 ब्लॉकों की ई-नीलामी
- 2026-27 (अब तक): शुरुआती साढ़े तीन महीनों में 14 ब्लॉकों की ई-नीलामी
सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में 55 नए प्रधान खनिज ब्लॉकों की नीलामी का लक्ष्य निर्धारित किया है।
ई-नीलामी से बढ़ी पारदर्शिता, निवेश और रोजगार
राज्य सरकार का कहना है कि ई-ऑक्शन प्रक्रिया के कारण खनन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ी है और अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है। इसके साथ ही निजी निवेश आकर्षित हुआ है, नए रोजगार सृजित हुए हैं और राज्य के राजस्व में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
पोस्ट ऑक्शन फेसिलिटेशन सेल से मिल रही तेज़ मंजूरियां
खान एवं भूविज्ञान विभाग ने नीलामी के बाद परियोजनाओं को तेजी से शुरू कराने के लिए पोस्ट ऑक्शन फेसिलिटेशन सेल का गठन किया है। यह सेल पर्यावरण स्वीकृति सहित विभिन्न आवश्यक अनुमतियों के लिए समन्वय कर रही है, जिससे नीलाम ब्लॉकों का शीघ्र संचालन संभव हो सके।
राजस्थान मॉडल बना अलग पहचान
राज्य सरकार के अनुसार, जहां अधिकांश राज्यों में खनिज ब्लॉकों की तैयारी और नीलामी प्रक्रिया ट्रांजेक्शन एडवाइजर्स के माध्यम से कराई जाती है, वहीं राजस्थान में ब्लॉक की पहचान, तैयारी, खनिज खोज और ई-नीलामी तक पूरी प्रक्रिया खान एवं भूविज्ञान विभाग स्वयं संचालित करता है। इससे सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होने के साथ राजस्व की भी बचत होती है।
प्रमुख बातें (Key Highlights)
- राजस्थान ने 141 प्रधान खनिज ब्लॉकों की ई-नीलामी कर देश में पहला स्थान प्राप्त किया।
- पिछले ढाई वर्षों में 102 नए खनिज ब्लॉकों की नीलामी हुई।
- 101 लाइमस्टोन सहित कई महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों का सफल आवंटन।
- ई-ऑक्शन से निवेश, रोजगार और सरकारी राजस्व में वृद्धि।
- अवैध खनन पर नियंत्रण और पारदर्शी खनन व्यवस्था को बढ़ावा।
- चालू वित्तीय वर्ष में 55 नए खनिज ब्लॉकों की नीलामी का लक्ष्य।
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