उदयपुर, एआर लाइव न्यूज। प्रोस्टेट कैंसर की आधुनिक जांच, उपचार और न्यूक्लियर मेडिसिन में हो रहे नवाचारों पर चर्चा के लिए उदयपुर स्थित अमेरिकन इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) में एक दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस ‘जीबीएच केयर कॉन’ का आयोजन किया गया। इस वैज्ञानिक सम्मेलन में देशभर से 72 कैंसर विशेषज्ञों ने भाग लेकर प्रोस्टेट कैंसर के सटीक निदान, रेडियोन्यूक्लाइड थेरेपी और नवीनतम चिकित्सा तकनीकों पर विचार साझा किए। | Udaipur Prostate Cancer Conference
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के डीन डॉ. विनय जोशी एवं जीबीएच समूह की डायरेक्टर डॉ. सुरभि पोरवाल ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कैंसर उपचार में तेजी से विकसित हो रही तकनीकों को चिकित्सकों तक पहुंचाने और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में ऐसे वैज्ञानिक सम्मेलन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
देश के प्रमुख विशेषज्ञों ने रखे शोध आधारित विचार
कॉन्फ्रेंस में एम्स भुवनेश्वर के डॉ. कन्हैयालाल, निम्स जयपुर के डॉ. टेकचंद, एम्स नई दिल्ली के डॉ. समीम तथा पीजीआई चंडीगढ़ के डॉ. राजेंद्र सहित देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। विशेषज्ञों ने न्यूक्लियर मेडिसिन की आधुनिक तकनीकों, प्रोस्टेट कैंसर के सटीक निदान और उन्नत उपचार पद्धतियों पर विस्तार से जानकारी दी।
पीएसएमए PET-CT से शुरुआती चरण में संभव होगी सटीक पहचान
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने बताया कि पीएसएमए PET-CT तकनीक के माध्यम से प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआती और सूक्ष्म अवस्थाओं का भी सटीक पता लगाया जा सकता है। इससे मरीजों को समय पर उपचार मिलने के साथ उपचार की सफलता की संभावना भी बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों ने बायोप्सी की भूमिका, आधुनिक रेडिएशन थेरेपी, रेडियोन्यूक्लाइड थेरेपी तथा गैलियम जनरेटर आधारित PET-CT तकनीक पर भी विस्तृत चर्चा की। उनका कहना था कि यह तकनीक प्रोस्टेट कैंसर की पहचान को और अधिक सटीक बनाकर मरीजों के उपचार को प्रभावी बनाएगी।
उपचार के बाद मॉनिटरिंग में भी कारगर तकनीक
कॉन्फ्रेंस के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि उपचार के बाद मरीजों की फॉलोअप मॉनिटरिंग में भी पीएसएमए PET-CT अत्यंत उपयोगी साबित हो रही है। इससे कैंसर की पुनरावृत्ति (रीकरेंस) का समय रहते पता लगाकर शीघ्र उपचार शुरू किया जा सकता है।
बढ़ते मामलों पर चिंता, जागरूकता बढ़ाने पर जोर
राष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों ने देश में तेजी से बढ़ रहे प्रोस्टेट कैंसर के मामलों, जोखिम कारकों, समय पर जांच की आवश्यकता और जनजागरूकता बढ़ाने की रणनीतियों पर भी विचार-विमर्श किया।
इस आयोजन को सफल बनाने में डॉ. मनन सरूपरिया, डॉ. परनीत सिंह, डॉ. कमलेश सिंह, डॉ. विवेक शर्मा, डॉ. प्रदीप शर्मा एवं डॉ. वरुण लड्डा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

