मूकबधिर वासिफ होटल में गेस्ट सर्विस एसोसिएट : हिंदुस्तान जिंक के कौशल प्रशिक्षण से बदली जिंदगी
उदयपुर,एआर लाइव न्यूज। उदयपुर के पास स्थित छोटे से गांव भामनिया खेत की रहने वाली दीपिका की सफलता की कहानी मेहनत, अवसर और बदलाव का उदाहरण है। सीमित संसाधनों और कम अवसरों के बीच दीपिका ने हिंदुस्तान जिंक के ‘जिंक कौशल’ कार्यक्रम के तहत फूड एंड बेवरेज सर्विसेज का प्रशिक्षण लिया। इस प्रशिक्षण ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और प्रशिक्षण के बाद उन्हें स्पेन की मारेला क्रूजेस (Marella Cruises) में नौकरी मिली। उनकी सफलता ग्रामीण राजस्थान के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है और यह दिखाती है कि सही प्रशिक्षण से वैश्विक करियर के अवसर हासिल किए जा सकते हैं। | hindustan-zinc-zinc-kaushal-rural-rajasthan-skill-development-jobs
उदयपुर के वासिफ, जो जन्म से मूक-बधिर हैं, ने ‘जिंक कौशल’ के हॉस्पिटैलिटी प्रशिक्षण के बाद पहले रामाडा होटल में काम किया और वर्तमान में ताज अरावली में गेस्ट सर्विस एसोसिएट के रूप में कार्यरत हैं। वे अब अन्य श्रवण बाधित युवाओं को भी रोजगार के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
राजस्थान और उत्तराखंड के 10,000 से अधिक युवाओं को उद्योग आधारित प्रशिक्षण दिया जा चुका है
दीपिका की कहानी अकेली नहीं है या संघर्ष से सफलता की यह काफी सिर्फ वासिफ की नहीं है। यह उन हजारों युवाओं की कहानी है जिनके जीवन में हिंदुस्तान जिंक के प्रमुख कौशल विकास और आजीविका कार्यक्रम ‘जिंक कौशल’ ने सकारात्मक बदलाव लाया है। वर्ष 2019 में शुरू हुए इस कार्यक्रम के माध्यम से अब तक राजस्थान और उत्तराखंड के 10000 से अधिक ग्रामीण और जनजातीय युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। 26 करोड़ के निवेश से संचालित इस पहल में महिलाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है और अब तक प्रशिक्षित युवाओं में 45 प्रतिशत महिलाएं हैं।
26 करोड़ के निवेश से हजारों परिवारों को मिला आजीविका का सहारा
हिंदुस्तान जिंक ने इस कौशल विकास पहल पर अब तक 26 करोड़ रुपये का निवेश किया है। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं बल्कि युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
83% प्लेसमेंट, प्रतिष्ठित कंपनियों में रोजगार
वित्त वर्ष 2025-26 में 2,600 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया। इनमें से 420 युवाओं को नाबार्ड, जेके सीमेंट, यस फाउंडेशन और बजाज फिनसर्व के सहयोग से प्रशिक्षित किया गया। कार्यक्रम की 83 प्रतिशत प्लेसमेंट दर रही तथा प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागियों के वेतन में औसतन 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
‘जिंक कौशल’ के प्रशिक्षु आज टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), फॉक्सकॉन, होंडा, मरेला क्रूजेस और जीएमआर ग्रुप जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में कार्यरत हैं।
दिव्यांग युवाओं के लिए 100% रोजगार का रिकॉर्ड
कार्यक्रम की विशेष उपलब्धियों में दिव्यांग युवाओं के लिए संचालित बैच शामिल रहा। मूक-बधिर प्रशिक्षुओं को 100 प्रतिशत रोजगार मिला। उन्हें ताज फतेह प्रकाश, रेडिसन ब्लू और द फर्न रेजीडेंसी जैसे होटल समूहों में नियुक्ति मिली।
राजस्थान के छह कौशल केंद्रों से संचालित कार्यक्रम
यह कार्यक्रम अंबुजा फाउंडेशन और टाटा स्ट्राइव के सहयोग से राजस्थान के देबारी, दरीबा, जावर, चित्तौड़गढ़, आगूचा और कायड़ स्थित कौशल केंद्रों के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। इससे पहले उत्तराखंड के पंतनगर में भी इसका संचालन किया गया था।
विश्व युवा कौशल दिवस पर संदेश
हिंदुस्तान जिंक का कहना है कि शिक्षा, कौशल विकास और समान अवसरों के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाना कंपनी की सामाजिक विकास रणनीति का प्रमुख हिस्सा है। दीपिका और वासिफ जैसे युवाओं की सफलता यह साबित करती है कि गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण ग्रामीण प्रतिभाओं को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर तक पहुंचाने की क्षमता रखता है।
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