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30वें भामाशाह सम्मान समारोह: हिन्दुस्तान जिंक की 6 इकाइयों को शिक्षा विभूषण सम्मान

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उदयपुर,एआर लाइव न्यूज। हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सामाजिक योगदान के लिए 30वें भामाशाह सम्मान समारोह में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। समारोह में कंपनी की छह इकाइयों—रामपुरा आगुचा माइन, चंदेरिया लेड जिंक स्मेल्टर, जावर माइंस, राजपुरा-दरीबा कॉम्प्लेक्स, जिंक स्मेल्टर देबारी और कायड माइन—को शिक्षा विभूषण सम्मान से नवाजा गया। | Hindustan Zinc Bhamashah Samman Ceremony

यह लगातार 11वां अवसर है जब राजस्थान सरकार ने हिन्दुस्तान जिंक को शिक्षा क्षेत्र में उसके प्रभावी सीएसआर कार्यों के लिए सम्मानित किया है। कंपनी ने वर्ष 2017 से अब तक शिक्षा से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं में 551 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है, जिससे हर वर्ष 2 लाख से अधिक ग्रामीण और आदिवासी बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं।

145 भामाशाह और 99 प्रेरकों का हुआ सम्मान

जयपुर स्थित बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के मुख्य आतिथ्य में सम्मान प्रदान किए गए। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, अतिरिक्त शिक्षा सचिव राजेश यादव, मिड-डे मील आयुक्त विश्व मोहन शर्मा, समसा की राज्य परियोजना निदेशक डॉ. रश्मि शर्मा, शिक्षा निदेशक सीताराम जाट तथा संयुक्त निदेशक महेन्द्र खींची सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

समारोह में राज्यभर से चयनित 145 भामाशाहों और 99 प्रेरकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

इन अधिकारियों ने प्राप्त किया सम्मान

हिन्दुस्तान जिंक की ओर से रामपुरा आगुचा माइन के आईबीयू सीईओ राममुरारी, चंदेरिया लेड जिंक स्मेल्टर की पर्यावरण प्रमुख मनीषा भाटी, हेड एचआर ममता शर्मा, देबारी जिंक स्मेल्टर के एसबीयू निदेशक विवेक यादव, हेड सीएसआर रूचिका चावला, दरीबा स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स के हेड सीएसआर अभय गौतम, जावर माइंस के वित्त प्रमुख अमित मालानी, कायड माइंस के हेड राजेश चौधरी तथा सीएसआर टीम ने पुरस्कार प्राप्त किया।

551 करोड़ रुपये से बदली शिक्षा की तस्वीर

पिछले नौ वर्षों में हिन्दुस्तान जिंक ने शिक्षा क्षेत्र में सीएसआर के तहत 551 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। इसमें 83 करोड़ रुपये स्कूलों के बुनियादी ढांचे—कक्षा-कक्ष, शौचालय, खेल मैदान, पेयजल एवं विद्युतीकरण—पर खर्च किए गए, जबकि 468 करोड़ रुपये दीर्घकालिक शिक्षा कार्यक्रमों पर निवेश किए गए।

इन कार्यक्रमों में नंद घर, शिक्षा संबल, जीवन तरंग, ऊंची उड़ान, ग्रामीण बालिकाओं की उच्च शिक्षा को बढ़ावा तथा कंपनी संचालित विद्यालयों को सहयोग जैसी प्रमुख पहलें शामिल हैं।

ग्रामीण शिक्षा में दिखा बड़ा बदलाव

हिन्दुस्तान जिंक के शिक्षा कार्यक्रमों से हर वर्ष दो लाख से अधिक बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। इन पहलों से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्कूल नामांकन बढ़ा है, विशेष रूप से किशोर बालिकाओं की शिक्षा में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।

कंपनी के अनुसार, राजस्थान में कक्षा 10वीं का उत्तीर्ण प्रतिशत वर्ष 2007 के 47 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2026 में 92.53 प्रतिशत पहुंच गया है। वहीं, शिक्षा संबल कार्यक्रम से जुड़े 37 विद्यालयों ने 100 प्रतिशत परीक्षा परिणाम हासिल किए हैं।

अगले पांच वर्षों में 36 करोड़ रुपये का निवेश

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से हिन्दुस्तान जिंक ने राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग के साथ एक एमओयू भी किया है। इसके तहत अगले पांच वर्षों में प्रदेश के शैक्षिक विकास के लिए 36 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

4 हजार गांवों के 26 लाख लोगों तक पहुंचा सीएसआर

शिक्षा के अलावा हिन्दुस्तान जिंक ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण, किसानों के विकास, स्वास्थ्य सेवाओं, जल संरक्षण, स्वच्छता, आधारभूत संरचना और स्थायी आजीविका जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक कार्य कर रहा है। कंपनी की इन पहलों से अब तक 4,000 से अधिक गांवों के 26 लाख से अधिक लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

मुख्य बिंदु (हाइलाइट्स)

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