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प्रदेश में पुलिस बल की भारी कमी: इंस्पेक्टर से कांस्टेबल तक 21% पद खाली, कैसे संभले सुरक्षा व्यवस्था?

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सब इंस्पेक्टर और एएसआई की रिक्तियां चिंताजनक: स्वीकृत पदों से 50 प्रतिशत मतलब आधे हैं एसआई एएसआई

लकी जैन, उदयपुर, एआर लाइव न्यूज। प्रदेश में गली-मोहल्लों से लेकर शहरों और गांवों तक कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस विभाग पर है। आमजन अपनी शिकायत और न्याय की उम्मीद लेकर सबसे पहले थाने का दरवाजा खटखटाता है। ऐसे में प्रदेश के पुलिस थानों और यहां कार्यरत कांस्टेबल से लेकर थानाधिकारी (इंस्पेक्टर) तक की भूमिका पुलिस व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है। लेकिन राजस्थान पुलिस इन दिनों गंभीर कार्मिक संकट से गुजर रही है। rajasthan police force posts vacant-inspector-to-constable on large scale | rajasthan police vacancy

पुलिस विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में इंस्पेक्टर से लेकर कांस्टेबल स्तर तक औसतन करीब 21 प्रतिशत पद रिक्त हैं। यानी स्वीकृत पदों के मुकाबले थानों में पुलिस बल की उपलब्धता लगभग पांचवें हिस्से तक कम है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और मामलों की जांच पर अतिरिक्त दबाव पड़ना स्वाभाविक है।

विभागीय जानकारी के मुताबिक प्रदेश में इंस्पेक्टर के 1,536, सब इंस्पेक्टर (एसआई) के 3,533, एएसआई के 11,408, हेड कांस्टेबल के 14,489 तथा कांस्टेबल के 63,958 पद स्वीकृत हैं। इनमें इंस्पेक्टर के 263, एसआई के 1,724, एएसआई के 5,884, हेड कांस्टेबल के 3,159 और कांस्टेबल के 8,765 पद वर्तमान में रिक्त चल रहे हैं।

सबसे चिंताजनक स्थिति एसआई और एएसआई पदों की है। एसआई के 51 प्रतिशत तथा एएसआई के 48 प्रतिशत पद खाली हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो जिन अधिकारियों के भरोसे थानों में अधिकांश मामलों की जांच और कानून-व्यवस्था का संचालन होता है, उनकी उपलब्धता लगभग आधी रह गई है।

पुलिस थानों में दर्ज होने वाले अधिकांश प्रकरणों की जांच एसआई और एएसआई स्तर के अधिकारियों के जिम्मे होती है। वहीं हेड कांस्टेबल भी थाने की कार्यप्रणाली में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इन पदों पर बड़ी संख्या में रिक्तियां होने से कार्यभार बढ़ रहा है। इसका असर मामलों के निस्तारण की गति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की क्षमता पर भी पड़ सकता है।

पुलिस विभाग में सीधी भर्ती मुख्य रूप से कांस्टेबल और सब इंस्पेक्टर पदों पर होती है। जबकि एएसआई, हेड कांस्टेबल और इंस्पेक्टर जैसे पद वरिष्ठता और विभागीय परीक्षाओं के आधार पर पदोन्नति से भरे जाते हैं। अधिकारियों का मानना है कि पदोन्नति प्रक्रिया में देरी और रिक्तियों के समय पर नहीं भरने से भी यह स्थिति बनी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े शहरों और अधिक जनसंख्या वाले जिलों में पुलिस बल की कमी सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है। बढ़ती आबादी, साइबर अपराध, महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों के बीच रिक्त पदों का बोझ मौजूदा पुलिसकर्मियों पर लगातार बढ़ता जा रहा है।

प्रदेश में पुलिस बल की इस कमी को देखते हुए रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती और पदोन्नति प्रक्रिया में तेजी लाना समय की मांग माना जा रहा है, ताकि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।

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