मदार नहर की बदहाली ने खोली वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान की पोल : जिम्मेदार: यूडीए, नगर निगम और जलसंसाधन विभाग
देवेंद्र शर्मा,उदयपुर ( एआर लाइव न्यूज)।फतहसागर में मदार तालाब का पानी कब आएगा यह तो पता नहीं , लेकिन अच्छी बारिश होते ही मदार नहर से फतहसागर में सीवर (सीवेज-Sewage), गंदगी और कचरे के ढ़ेर सबसे पहले आएंगे। नहर किनारे बने कई लोगों के घरों का सीवर दिन रात सीधा नहर में गिर रहा उनको कोई रोकने वाला नहीं है। मनोहरपुरा पुलिया से रामगिरी-चिकलवास पिकअपवियर तक नहर की सफाई भी कागजों में हो गई है ऐसा साफ नजर आ रहा है। | udaipur fatehsagar sewage pollution
मदार नहर की अनदेखी के चलते फतहसागर की संभावित बर्बादी के जिम्मेदार सीधे तौर पर उदयपुर विकास प्राधिकरण, नगर निगम उदयपुर और जलसंसाधन विभाग उदयपुर के अधिकारी होंगे। यहीं नहीं वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान की भी पोल खुल जाएगी। जिम्मेदारों ने पिछले दिनों ही इस अभियान के तहत जल संरक्षण की शपथ भी ली थी।
फतेहसागर के लिए महत्वपूर्ण है मदार नहर
सब जानते है कि जब तक मदार नहर से फतहसागर में पानी की आवक नहीं होती, तब तक फतहसागर का लबालब होकर छलकना संभव ही नहीं है। उसी मदार नहर को शहरी क्षेत्र में ही जिम्मेदारों ने लावारिस छोड़ रखा है। वर्तमान में बड़गांव क्षेत्र में बांडीनाल (नाल का भीलवाड़ा पुलिया) से लेकर पातालेश्वर महादेव गुफा मंदिर तक मदार नहर के बहुत बुरे हाल है। नीमच खेड़ा में भी कुछ भाग में नहर में सीवर (सीवेज) गिर रहा है। | udaipur fatehsagar sewage pollution through Madar nahar
तीन विभागों पर सवाल: कौन लेगा जिम्मेदारी?
यूडीए की लापरवाही: घरों का सीवर सीधा नहर में डाल रहे लोग, कौन लेगा एक्शन
बड़गांव क्षेत्र में गायत्री नगर के पीछे बांडीनाल (नाल का भीलवाड़ा) पुलिया से लेकर आशापुरा मंदिर क्षेत्र तक मदार नहर के पश्चिमी किनारे बने अधिकांश घरों का सीवर (सीवेज) सीधा मदार नहर में गिरने से इस क्षेत्र में नहर गटर बनकर रह गई है। यूडीए ने इस गंदे पानी की निकासी की तरफ कभी ध्यान नहीं दिया। जबकि जागरूक नागरिक कई बार यूडीए के जिम्मेदार इंजीनियर्स का इस तरफ ध्यान दिला चुके है। यूडीए नहर में गंदा पानी डालने वालों के खिलाफ आज तक कोई एक्शन लेने की हिम्मत भी नहीं कर पाया।
जलसंसाधन विभाग: नहर की सफाई क्या कागजों में करवा दी ?
पिछले कुछ वर्षाें से चल रही व्यवस्था के तहत देवाली पुलिया से मनोहरपुरा पुलिया तक मदार नहर की सफाई नगर निगम के जिम्मे है, जबकि मनोहरपुरा पुलिया से चिकलवास पिकअप वियर तक नहर की सफाई का जिम्मा जलसंसाधन विभाग के पास है। इस क्षेत्र में मदार नहर की हालत देखकर जलसंसाधन विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही पर भी सवाल उठ रहा है।
नगर निगम: खुद की नाली का गंदा पानी नहर में जाने से नहीं रोक पा रहे
नीमचखेड़ा क्षेत्र में अरूणोदय हॉस्टल के पास एक ऑटो गैराज के सामने नगर निगम की नाली का पैंदा लीकेज होने से लंबे समय से सीवर मदार नहर में गिर रहा। यह गंदगी भी बारिश के पानी के साथ सीधे फतहसागर में पहुंचेगी। निगम से यह मामूली काम भी नहीं हो पा रहा। जबकि जागरूक नागरिक कई बार निगम के जिम्मेदार इंजीनियर्स का इस तरफ ध्यान दिला चुके है।देवाली पुलिया के पास भी नहर में कीचड़ भरा हुआ है यह भी सबसे पहले फतहसागर पहुंचेगा।
ऐसे में जल संरक्षण की शपथ लेने का क्या फायदा ?
पिछले दिनों ही विश्व पर्यावरण दिवस पर वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान चला। इसमें उदयपुर में भी जलसंरक्षण के बड़े-बड़े सपने दिखाए गए, जगह जगह जलसंरक्षण की शपथ दिलवाई गई। दूसरी तरफ जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के चलते उदयपुर शहर की आत्मा कहें जाने वाले फतहसागर को भरने वाली मदार नहर ही गटर बनी हुई है।
पर्यावरण और पर्यटन दोनों पर असर
फतेहसागर केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि उदयपुर की पहचान, पर्यटन और जल सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। यदि झील में प्रदूषित जल पहुंचता है तो:
- जल गुणवत्ता प्रभावित होगी।
- जलीय जीवों पर खतरा बढ़ेगा।
- पर्यटन छवि को नुकसान पहुंचेगा।
- झील संरक्षण पर करोड़ों रुपये खर्च करने के प्रयासों पर प्रश्न उठेंगे।
मुख्य सवाल
- मदार नहर में गिर रहे सीवर को कब रोका जाएगा?
- नहर की व्यापक सफाई कब होगी?
- जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही कौन तय करेगा?
- जल संरक्षण अभियानों के दावों को जमीन पर कब उतारा जाएगा?
मानसून से पहले यदि मदार नहर की सफाई और सीवर प्रवाह पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो फतेहसागर झील एक बार फिर गंदगी और प्रदूषण का बोझ उठाने को मजबूर हो सकती है।
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