IIT धनबाद के साथ शुरू हुआ बड़ा प्रोजेक्ट : उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सलूंबर, ऋषभदेव भी शामिल
जयपुर,एआर लाइव न्यूज। राजस्थान के खनिज अपशिष्ट (Mine Dumps) अब देश के लिए क्रिटिकल मिनरल्स का नया स्रोत बन सकते हैं। राज्य में पिंक मार्बल और ग्रीन मार्बल के मलबों के वैज्ञानिक अध्ययन में निकेल (Nickel), कोबाल्ट (Cobalt), क्रोमियम (Chromium) और गैलियम (Gallium) जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की उल्लेखनीय मात्रा मिलने के सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। ये खनिज रक्षा, ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन, एयरोस्पेस और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। | Critical Minerals in Rajasthan Mine Dumps
राजस्थान सरकार की पहल पर राजस्थान स्टेट मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट (RSMET) और Indian Institute of Technology (ISM) Dhanbad के बीच खनिज डम्प्स के वैज्ञानिक मूल्यांकन के लिए समझौता किया गया है। इस परियोजना का उद्देश्य खनन अपशिष्ट से मूल्यवान और क्रिटिकल मिनरल्स की पहचान कर उनका व्यावसायिक उत्पादन संभव बनाना है। | IIT-ISM Dhanbad identify nickel, cobalt, chromium and gallium in mining waste
78 खनिज डम्प्स का वैज्ञानिक अध्ययन
खान विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत राजस्थान में 78 खनिज डम्प्स की पहचान की है। इन्हें 10-10 डम्प्स के क्लस्टर में विभाजित किया गया है। पहले चरण में उदयपुर और आसपास के क्षेत्र के 10 डम्प्स का अध्ययन किया गया, जिनमें 8 पिंक मार्बल और 2 ग्रीन मार्बल (सर्पेंटिनाइट) डम्प शामिल हैं। | Rajasthan Critical Minerals Project
अध्ययन में निकेल, कोबाल्ट, क्रोमियम और गैलियम की मात्रा पृथ्वी की सतह (क्रस्ट) में सामान्य रूप से मिलने वाली मात्रा से 25 से 40 गुना अधिक होने के संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगे के परीक्षणों में यह पुष्टि होती है तो राजस्थान देश के क्रिटिकल मिनरल मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
राज्य के कई जिलों में खनिज अपशिष्ट के बड़े भंडार चिन्हित किए गए हैं, जिनमें प्रमुख रूप से:
- Udaipur
- Banswara
- Dungarpur
- Pratapgarh
- Salumbar
- Rishabhdeo
- Ajmer
- Beawar
- Sawar
- Nagaur
- Sirohi
- Jodhpur
- Balesar
- Sojat City
- Jalore
शामिल हैं।
टंगस्टन, लिथियम और REE की भी होगी खोज
आईआईटी-आईएसएम धनबाद के सहयोग से शेष 68 डम्प्स और टेलिंग्स का भी वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में जियो-रेफरेंस्ड डेटाबेस तैयार किया जाएगा, साथ ही मैपिंग, सैंपलिंग, मिनरलॉजिकल विश्लेषण और संसाधन आकलन किया जाएगा।
अध्ययन का लक्ष्य टंगस्टन (Tungsten), लिथियम (Lithium), कोबाल्ट, निकेल और रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REEs) जैसे रणनीतिक खनिजों की उपलब्धता का पता लगाना है, जिनकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
विशेषज्ञों ने जताई व्यावसायिक संभावनाएं
हाल ही में अतिरिक्त मुख्य सचिव (खान एवं पेट्रोलियम) Aparna Arora से आईआईटी-आईएसएम धनबाद के विशेषज्ञों ने मुलाकात की। विशेषज्ञों ने राजस्थान के खनिज डम्प्स में क्रिटिकल मिनरल्स की प्रचुर उपलब्धता की संभावना जताते हुए कहा कि वैज्ञानिक निष्कर्षण तकनीकों के माध्यम से इन संसाधनों का व्यावसायिक उपयोग किया जा सकता है।
प्रमुख बातें
राजस्थान के खनिज मलबों में कौन-कौन से क्रिटिकल मिनरल्स मिले हैं?
निकेल, कोबाल्ट, क्रोमियम और गैलियम के महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं।
इन खनिजों का उपयोग किन क्षेत्रों में होता है?
रक्षा, इलेक्ट्रिक वाहन, ग्रीन एनर्जी, एयरोस्पेस, बैटरी निर्माण और हाई-टेक उद्योगों में।
RSMET और IIT धनबाद के समझौते का उद्देश्य क्या है?
खनिज अपशिष्ट (Mine Dumps) से मूल्यवान एवं क्रिटिकल मिनरल्स की पहचान और व्यावसायिक उत्पादन की संभावनाओं का विकास।
राजस्थान के कितने खनिज डम्प्स का अध्ययन किया जा रहा है?
कुल 78 डम्प्स चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से 10 का प्रारंभिक अध्ययन पूरा हो चुका है।
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