Site iconSite icon AR Live News

फतहपुरा चौराहे के एआई ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम पर उठे सवाल

udaipur fatehpura-circle-AI-traffic-management-system Questions Raised Over AI Traffic system Pilot Projectudaipur fatehpura-circle-AI-traffic-management-system Questions Raised Over AI Traffic system Pilot Project

उदयपुर,एआर लाइव न्यूज।। उदयपुर के फतहपुरा चौराहे पर नवंबर 2025 में शुरू किए गए पायलट प्रोजेक्ट एआई (Artificial Intelligence) आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। इससे न तो वाहन चालकों को कोई खास राहत मिली और न ही सिग्नल पर चौराहे की यातायात व्यवस्था में कोई बड़ा और बेहतर बदलाव नजर आया। udaipur AI-traffic-management-system

ऐसे में इसकी उपयोगिता, लाखों रूपए की लागत और प्रभाव को लेकर आमजन द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों का कहना है कि एआई सिस्टम लागू होने के बाद भी ट्रैफिक संचालन में कोई बड़ा परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दिया। उनका तर्क है कि अधिकांश समय यातायात व्यवस्था पहले जैसी ही संचालित होती दिखी। ऐसे में संभावना है कि भविष्य में सरकार द्वारा इस पर लाखों रूपए प्रति चौराहे के अनुसार खर्च करना जनता के धन के फिजूलखर्च करने जैसा ही साबित होगा।

जबकि प्रोजेक्ट संचालित करने वाली कंपनी का दावा है कि सिस्टम ने यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाया है। हाल ही में आए आंधी-तूफान में चौराहे पर लगी एलईडी स्क्रीन क्षतिग्रस्त हो गई, जिसके बाद फिलहाल ट्रैफिक संचालन सामान्य सिग्नल प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है।

समय-आधारित सामान्य प्रणाली: अधिकांश शहरों के अधिकांश चौराहों पर लगे ट्रैफिक सिग्नल एक निश्चित समय (जैसे 30 या 60 सेकंड) के अनुसार प्रोग्राम किए जाते हैं। इसके कंप्यूटर में सेट होता है कि कब और कितनी देर के लिए कौन सी सिग्नल पर रेड और ग्रीन लाइट जलेगी।

एआई आधारित या सेंसर-आधारित (स्मार्ट) ट्रैफिक लाइट सिस्टम : कैमरों और सेंसर की मदद से चौराहे पर वाहनों की संख्या, ट्रैफिक घनत्व और वाहन प्रकार का विश्लेषण करता है। रियल टाइम में स्वतः ट्रैफ़िक के अनुसार सिग्नल का समय बढ़ता या घटता है। ताकि अधिक भीड़ वाली दिशा में वाहनों को अपेक्षाकृत जल्दी निकाला जा सके। आमतौर पर बड़े शहरों या महानगरों जैसे दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद के व्यस्ततम चौराहों पर इसका उपयोग किया जा रहा है। जहां हर समय आमजन को जाम की समस्या से जूझना पड़ता है।

एआई या सेंसर प्रणाली कैमरे, एआई सॉफ्टवेयर, इंडक्शन लूप (सड़क के नीचे लगे तार) या रडार का उपयोग करती हैं। वीडियो डिटेक्शन कैमरा चौराहों पर खंभों पर कैमरे लगे होते हैं, जो लाइव ट्रैफ़िक की भीड़ को देखकर सिग्नल का समय तय करते हैं। यदि किसी दिशा में ट्रैफिक अधिक होता है, तो सेंसर के संकेत से उस दिशा में हरी बत्ती का समय स्वतः बढ़ जाता है।

उदयपुर जिला प्रशासन ने पुलिस की देखरेख में स्थानीय आईटी स्टार्टअप कंपनी के प्रस्तुतीकरण के बाद फतहपुरा चौराहे को पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना था। कंपनी ने यहां कैमरे, सेंसर और एलईडी आधारित सिस्टम स्थापित किया। नवंबर 2025 से चौराहे पर यह सिस्टम शुरू हुआ था।

कुछ स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों का कहना है कि एआई सिस्टम लागू होने के बाद भी ट्रैफिक संचालन में कोई बड़ा परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दिया। उनका तर्क है कि अधिकांश समय यातायात व्यवस्था पहले की तरह ही संचालित होती रही।

कंपनी ने पायलट प्रोजेक्ट में लाखों रुपये खर्च होने का दावा किया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि लाभ सीमित है तो क्या भविष्य में अन्य चौराहों पर भी इसी मॉडल को लागू करना आर्थिक रूप से उचित होगा।

लोगों का कहना है कि वीआईपी मूवमेंट, त्योहारों और विशेष आयोजनों के दौरान ट्रैफिक पुलिस को अब भी मैनुअल हस्तक्षेप करना पड़ता है। ऐसे में एआई सिस्टम से वास्तविक स्तर पर कितनी मानव निर्भरता कम हुई, इसका मूल्यांकन आवश्यक है।

प्रोजेक्ट संचालित करने वाली कंपनी के निदेशक बसंत गोस्वामी और ओजस शुक्ला का कहना है कि छह माह की रिपोर्ट जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को सौंप दी गई है। पिछले दिनों आए आंधी-तूफान में एलईडी लाइट गिरने से टूट गयी थी। हमारे अनुसार तो हमारे प्रोडक्ट से बेहतर यातायात प्रबंधन हुआ है। अब अगर सरकार हमारे प्रोजेक्ट को आगे बढाती है या हमें यह प्रोजेक्ट मिलता है तो चौराहे पर पोल खड़े कर प्रोपर तरीके से एलईडी लाइट्स और कैमरे इंस्टॉल किए जाएंगे।

ओजस शुक्ला ने बताया कि हर चौराहे पर सिस्टम वहां के ट्रैफिक दबाव के अनुसार लगाया जाता है, जिससे हर सिस्टम की प्रोग्रामिंग अलग होती है। तो हर जगह कॉस्टिंग अलग आती है, जो लाखों रूपए में है।

कंपनी के प्रमुख दावे:

सूत्रों के अनुसार, पायलट प्रोजेक्ट की रिपोर्ट का मूल्यांकन संबंधित विभागों द्वारा किया जा रहा है। भविष्य में इस मॉडल को राजस्थान के अन्य शहरों के अन्य चौराहों में लागू करने से पहले तकनीकी प्रदर्शन, लागत और सार्वजनिक लाभ का विश्लेषण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फिलहाल फतहपुरा चौराहे का यह पायलट प्रोजेक्ट स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट के क्षेत्र में एक प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी सफलता या सीमाओं पर अंतिम निर्णय संबंधित विभागों की समीक्षा के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

डिसक्लेमर: एआर लाइव न्यूज (AR Live News) से मिलते-जुलते नामों से रहें सावधान, उनका एआर लाइव न्यूज से कोई संबंध नहीं है। एआर लाइव न्यूज के संबंध में कोई भी बात करने के लिए पत्रकार लकी जैन (9887071584) और पत्रकार देवेन्द्र शर्मा (9672982063) ही अधिकृत हैं।

Exit mobile version