सर्च ऑपरेशन में जब्त किए गए डिजीटल दस्तावेजों की जांच जारी
जयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। राजस्थान के वाणिज्यिक कर विभाग की टीमों ने शुक्रवार को देर रात प्रदेश के दस जिलों के 33 वस्तु परिवहन कंपनियों (गुड्स ट्रांसपोर्ट कंपनियों) के यहां छापेमारी की। सर्च ऑपरेशन के तहत 85 करोड़ रूपए से अधिक जीएसटी चोरी का खुलासा हुआ है।
इस छापेमारी में विभाग की तीनों प्रवर्तन शाखाओं तथा आठ क्षेत्रीय जोन की टीमों ने एक साथ जयपुर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, जोधपुर, सिरोही, नागौर, चूरू, बीकानेर और अलवर 10 जिलों के 33 ट्रांसपोर्ट कंपनियों के कार्यालय और इनके मालिकों के आवासों पर छापेमारी की। विभाग की इस कार्रवाई से पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है।
जानकारी के अनुसार यह प्रवर्तन अभियान वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की बड़े पैमाने पर हो रही चोरी का खुलासा करने एवं उसकी जांच के उद्देश्य से शुरू किया गया, जिसमें वस्तु परिवहन क्षेत्र की इकाइयों द्वारा अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दुरुपयोग किया जा रहा था। दिनभर की कार्रवाई के दौरान प्राप्त अभिलेखों एवं डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर प्रारंभिक कर चोरी 85 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है तथा जांच आगे बढ़ने के साथ यह राशि बढ़ने की संभावना है।
सामने आया कर चोरी का तरीका
तलाशी कार्रवाई के दौरान वस्तु परिवहन क्षेत्र में व्यापक स्तर पर अपनाई जा रही अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। परिवहन कंपनियों द्वारा उन वस्तुओं पर भी 12 प्रतिशत जीएसटी दर्शाते हुए बिल जारी किए जा रहे थे, जिन पर वास्तविक कर दर शून्य है। इस प्रकार उत्पन्न किए गए अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट का उपयोग वास्तविक कर देनदारियों के भुगतान में नकद राशि के स्थान पर किया जा रहा था, जबकि कानून के अनुसार नकद भुगतान आवश्यक है। इसका प्रत्यक्ष परिणाम यह हुआ कि राज्य सरकार को मिलने वाला वैध जीएसटी राजस्व प्रभावित हुआ तथा कर चोरी को छिपाने के लिए फर्जी क्रेडिट श्रृंखला तैयार की गई।
पूरे परिवहन क्षेत्र की होगी जांच
विभाग द्वारा अब राज्यभर में संचालित अन्य वस्तु परिवहन ऑपरेटरों की भी चरणबद्ध जांच की जाएगी तथा कर चोरी के प्रत्येक मामले में आरजीएसटी सीजीएसटी अधिनियमों के प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। विभाग की उन्नत डेटा विश्लेषण क्षमता के माध्यम से अब राजस्थान में संचालित प्रत्येक ट्रक एवं मालवाहक वाहन विभाग की निगरानी में है। विभाग टोल प्लाजा रिकॉर्ड, ईंधन उपभोग डेटा, वाहन स्वामित्व अभिलेख तथा ई-वे बिल आंकड़ों का विश्लेषण कर रहा है। वाहन स्वामियों को भी सचेत किया जाता है कि बिना वैध ई-वे बिल के माल परिवहन से संबंधित किसी भी कर चोरी के लिए उन्हें उत्तरदायी माना जाएगा।
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