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दुर्लभ रक्त रोग से पीड़ित महिला की बीमारी का गीतांजलि हॉस्पिटल में NGS तकनीक से हुआ खुलासा

Geetanjali hospital doctor identified rare Blood diseases with NGS techniqueGeetanjali hospital doctor identified rare Blood diseases with NGS technique

उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। गीतांजलि हॉस्पिटल में चिकित्सा क्षेत्र की एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है, जहां आधुनिक नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग (NGS) तकनीक की मदद से एक दुर्लभ और जटिल रक्त संबंधी बीमारी का सफलतापूर्वक निदान किया गया। इस उपलब्धि से मरीज को नई उम्मीद मिली है। | Geetanjali hospital | NGS technique | rare Blood diseases | next generation sequencing technique | GMCH Udaipur

अस्पताल के हेमेटोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. नितिन चौधरी ने 29 वर्षीय गर्भवती महिला के जटिल केस में यह सफलता हासिल की। महिला पिछले छह माह से लगातार कमजोरी, पीलिया (जॉन्डिस), तिल्ली (स्प्लीन) का बढ़ना, खून का टूटना, पेट में सूजन के साथ-साथ पित्ताशय की पथरी (गॉल ब्लैडर स्टोन) और किडनी में पथरी (रीनल स्टोन्स) जैसी समस्याओं से भी जूझ रही थी। जांच के दौरान मरीज के लीवर और प्लीहा का आकार बढ़ा हुआ पाया गया तथा हीमोग्लोबिन स्तर भी काफी कम था, जिसके चलते उसे कई बार रक्त चढ़ाना पड़ा। लंबे समय तक विभिन्न अस्पतालों में उपचार के बावजूद बीमारी का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हो पाया था। Geetanjali hospital doctor diagnose rare Blood diseases with NGS technique | NGS next generation sequencing techniques

एडवांस जीन जांच NGS के माध्यम से आखिरकार बीमारी की जड़ तक पहुंचा गया। जांच में मरीज को वंशानुगत स्फेरोसाइटोसिस (हेरेडिटरी स्फेरॉयटॉसिस) और गिल्बर्ट सिंड्रोम (गिल्बर्ट सिंड्रोम) का दुर्लभ संयोजन पाया गया। रिपोर्ट के अनुसार एएनके1 जीन में बदलाव और यूजीटी1ए1 जीन में पॉलिमॉर्फिज्म इस स्थिति के प्रमुख कारण हैं।

डॉ. नितिन चौधरी ने बताया कि यह केस बेहद दुर्लभ है। विश्व स्तर पर ऐसे गिने-चुने मामले ही सामने आए हैं, जबकि भारत में यह दूसरा और एशिया में भी बहुत कम मामलों में दर्ज किया गया है। खास बात यह है कि यह बीमारी सामान्यत आनुवंशिक होती है, लेकिन इस मरीज के माता-पिता में इसके लक्षण नहीं पाए गए, जिससे यह मामला और भी जटिल बन गया।

समय पर सही जांच और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से ऐसे जटिल रोगों का प्रभावी प्रबंधन संभव है। उन्होंने कहा कि यह केस न केवल चिकित्सा विज्ञान की प्रगति को दर्शाता है, बल्कि गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

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