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दोहरी खुशी: जैसलमेर में AI तकनीक से जन्मा गोडावन का चूजा, कच्छ में एक दशक बाद अंडे से निकाला चूजा

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एआर लाइव न्यूज। गोडावन के संरक्षण को लेकर दोहरी खुशखबरी है। जहां एक दशक बाद गुजरात के कच्छ में एक गोडावन का जन्म हुआ है, तो वहीं राजस्थान के जैसलमेर में रामदेवरा स्थित गोडावण ब्रीडिंग सेंटर में एआई तकनीक की मदद इस वर्ष का पहला चूजा जन्मा है, इस चूजे के जन्म के साथ ही जैसलमेर में गोडावन की संख्या अब 73 हो गयी है। एआई तकनीक की मदद से जन्म चूजे को लेकर गोडावन के संरक्षण से जुड़े लोगों को एक नयी उम्मीद जागी है। | wildlife news | Godawan in Jaisalmer | Godawan in kutch | save Godawan | Great Indian bustard | GIB in in kutch | GIB in Jaisalmer

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को गंभीर रूप से लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) गोडावन के संरक्षण में किए गए प्रयासों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि राजस्थान और गुजरात के वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान के संयुक्त प्रयास से कच्छ में एक दशक बाद गोडावन (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) के चूजे का जन्म हुआ है।

डीएनपी के डीएफओ बृजमोहन गुप्ता ने बताया कि रामदेवरा गोडावण ब्रीडिंग सेंटर, जो वर्ष 2022 में स्थापित हुआ था, वहां पहली बार किसी चूजे का जन्म होना एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह चूजा मादा गोडावण जेरी और नर पर्व के जरिए एआई प्रक्रिया से विकसित अंडे से निकला है। इससे पहले सम-सूदासरी क्षेत्र के ब्रीडिंग सेंटर में भी इस माह कई चूजे जन्म ले चुके हैं। सम-सूदासरी और रामदेवरा दोनों ब्रीडिंग सेंटर मिलाकर जैसलमेर जिले में गोडावणों की कुल संख्या बढ़कर 73 तक पहुंच गई है। wildlife news : Gujarat kutch sees a GIB chick after a decade and Godawan chick hatched using AI technology in Jaisalmer and

केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव ने बताया कि गुजरात के कच्छ में एक दशक बाद गोडावन (जीआईबी) के एक चूजे का जन्म हुआ है। यह उपलब्धि जंपस्टार्ट अप्रोच नामक एक नवीन संरक्षण उपाय के माध्यम से संभव हुई है। कच्छ के घास के मैदानों में केवल तीन मादा जीआईबी ही बची हैं, ऐसे में जंगल में उपजाऊ अंडे मिलना संभव नहीं था। इस पर एक वर्ष पहले कच्छ में राजस्थान के समन्वय के साथ गुजरात के कच्छ में गोडावन संरक्षण योजना शुरू की गयी।

अगस्त 2025 में टैग की गई मादा जीआईबी ने कच्छ में एक बांझ अंडा दिया, जहां स्थानीय आबादी के सभी नर बहुत पहले ही मर चुके थे।
इस पर राजस्थान के सम संरक्षण प्रजनन केन्द्र से एक बंदी-प्रजनित जीआईबी अंडे को एक पोर्टेबल इनक्यूबेटर में 19 घंटे से अधिक की सड़क यात्रा बिना रूके कर सफलतापूर्वक 22 मार्च को घोंसले में वापस रख दिया गया।
मादा ने उपजाऊ अंडे को सेने की प्रक्रिया पूरी कर ली और 26 मार्च को चूजे को सफलतापूर्वक जन्म दिया। क्षेत्रीय निगरानी दल ने चूजे को उसके प्राकृतिक आवास में उसकी पालक मां द्वारा पाला-पोसा जाते हुए देखा। उन्होंने इसे गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

केन्द्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि राजस्थान के जैसलमेर में स्थित संरक्षण प्रजनन केंद्रों में गोडावन की संख्या 73 हो गई है। जिसमें वर्तमान प्रजनन मौसम के दौरान पांच नए चूजे शामिल हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि दीर्घकालिक संरक्षण योजना के तहत भारत निकट भविष्य में पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

डिसक्लेमर: एआर लाइव न्यूज (AR Live News) से मिलते-जुलते नामों से रहें सावधान, उनका एआर लाइव न्यूज से कोई संबंध नहीं है। एआर लाइव न्यूज के संबंध में कोई भी बात करने के लिए पत्रकार लकी जैन (9887071584) और पत्रकार देवेन्द्र शर्मा (9672982063) ही अधिकृत हैं।

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