किसी की जिंदगी का दूर होगा अंधेरा तो किडनी खराब होने से जिंदगी के लिए मौत से जूझ रहे मरीज को मिलेगा नया जीवन
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। चित्तौड़गढ़ के एक परिवार ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए केडेवेरिक अंगदान (Deceased Organ Donation) के माध्यम से जिंदगी के लिए मौत से जूझ रहे मरीजों को नया जीवन दिया है। गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल उदयपुर में चित्तौड़गढ़ निवासी 62 वर्षीय कन्हैयालाल आनंद को ब्रेन डेड घोषित किए जाने के पश्चात उनकी अंतिम इच्छानुसार उनके परिवार द्वारा अंगदान का निर्णय लिया गया। यह अंगदान स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) के निर्धारित नियमों एवं प्रक्रिया के तहत संपन्न हुआ। ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से दोनों किडनियों को उदयपुर से हवाई मार्ग द्वारा एसएमएस हॉस्पिटल, जयपुर भेजा गया। | udaipur news | geetanjali medical college and hospital | organ donation | udaipur latest news | udaipur news latest | Lesson of Humanity | GMCH Udaipur | organ donation green corridor
रोगी को 19 मार्च 2026 को हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था, जहां उपचार के दौरान 23 मार्च 2026 को चिकित्सकों की टीम द्वारा उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया। इसके पश्चात परिवारजनों ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए अंगदान के लिए सहमति प्रदान की। हॉस्पिटल की ऑर्गन ट्रांसप्लांट टीम में डॉ. गोविन्द मंगल, डॉ. निलेश भटनागर, डॉ. विनोद मेहता, डॉ. ऋषि मेहता, डॉ. करुणा शर्मा (नोडल ऑफिसर ऑर्गन ट्रांसप्लांट), डीएमएस हर्षा सोनी और ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर राजेश मेहता के मार्गदर्शन में अंगदान की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण की गई। udaipur news organ donation in geetanjali medical college and hospital Teacher Taught last Lesson of Humanity by Organ Donation
कन्हैयालाल एक शिक्षक थे और मरणोपरांत अंगदान उनकी अंतिम इच्छा थी
अंगदान के उपरांत ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से दोनों किडनियों को उदयपुर से हवाई मार्ग द्वारा एसएमएस हॉस्पिटल, जयपुर भेजा गया, जबकि नेत्र (आंखें) Eye Bank Society Udaipur को दान किए गए। इस पूरी प्रक्रिया में उदयपुर एवं जयपुर जिला पुलिस प्रशासन का विशेष योगदान रहा।
इसके पश्चात शाम पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ परिजनों को सौंप दिया गया। इस दौरान हॉस्पिटल के प्रशासनिक अधिकारी, चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। जीएमसीएच के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉ. हरप्रीत सिंह ने समय पर सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण कराने में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
परिवारजनों के अनुसार कन्हैयालाल आनंद एक समर्पित शिक्षक होने के साथ-साथ समाज सेवा में भी सक्रिय थे। वे जरूरतमंदों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहते थे तथा विशेष रूप से गरीब बच्चों की शिक्षा में सहयोग करते थे। उनका मानना था कि समाज के लिए कुछ कर जाना ही सच्ची सेवा है। वे अक्सर कहा करते थे कि उनके निधन के बाद उनके अंग दान कर दिए जाएं, ताकि उनका जीवन किसी और के काम आ सके।
मृतक के पुत्र राहुल आनंद ने बताया कि पूरा परिवार उनकी इस अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए एकजुट हुआ। जीएमसीएच के सीईओ ऋषि कपूर ने हॉस्पिटल परिवार की ओर से अंगदाता एवं उनके परिजनों को नमन करते हुए इस पुनीत कार्य के लिए आभार व्यक्त किया।
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