ईरान से 1000 भारतीय वापस लौटे, इनमें 700 से अधिक मेडिकल छात्र : अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके
नई दिल्ली,एआर लाइव न्यूज। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुए आज 24वां दिन है। युद्ध के चलते पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर आज सोमवार को लोकसभा में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बिंदुओं पर बात की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा मैं सम्मानित सदन में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और इसकी वजह से भारत के सामने आई चुनौतियों पर बात रखने के लिए उपस्थित हुआ हूं। इस समय पश्चिमी एशिया की हालत चिंताजनक है। अब इस संकट को 3 सप्ताह से ज्यादा हो रहा है। इसका पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर, लोगों के जीवन पर, बहुत ही विपरीत असर हो रहा है, इसलिए पूरी दुनिया इस संकट के जल्द से जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह भी कर रही है। PM modi on West Asia conflict
मोदी ने कहा कि मैं देश के सभी राज्य सरकारों से भी इस सदन के माध्यम से आग्रह करूंगा, ऐसे समय में काला बाजारी करने वाले, जमाखोरी करने वाले एक्टिव हो जाते हैं। इसके लिए कड़ी मॉनिटरिंग जरूरी है। इस युद्ध के कारण दुनिया में जो कठिन हालात बने हैं, उनका प्रभाव लंबे समय तक बने रहने की आशंका है, इसलिए हमें तैयार रहना होगा, हमें एकजुट रहना होगा। PM modi speech in Lok Sabha on West Asia conflict | West Asia conflict | PM Narendra Modi | PM Modi in Loksabha | PM Modi news today
युद्ध ने भारत के सामने खड़ी की आर्थिक, नेशनल सिक्योरिटी और मानवीय चुनौतियां
पीएम मोदी ने लोकसभा में कहा कि भारत के सामने भी इस युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। यह चुनौतियां आर्थिक भी हैं, नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ी भी हैं और मानवीय भी हैं। जिस क्षेत्र में युद्ध हो रहा है वो दुनिया के दूसरे देशों के साथ हमारे व्यापार का भी एक महत्वपूर्ण रास्ता है। विशेष रूप से कच्चे तेल और गैस की हमारी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा यही क्षेत्र पूरा करता है। एक बड़ा सवाल यह है कि युद्ध का खेती पर क्या प्रभाव होगा, देश के किसानों ने हमारे अन्न के भंडार भर रखे हैं, इसलिए भारत के पास पर्याप्त खाद्यान्न है।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से लेकर अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान से करीब 1000 भारतीय सुरक्षित वापस लौटे हैं। इनमें 700 से अधिक मेडिकल की पढ़ाई करने वाले युवा हैं। खाड़ी देशों में, भारतीय स्कूलों में हजारों विद्यार्थी पढ़ते हैं, सीबीएसई ने ऐसे सभी भारतीय स्कूलों में होने वाले कक्षा दसवीं और बारहवीं की निर्धारित परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। इन बच्चों के पढ़ाई निर्बाध चलती रहे, इसके लिए सीबीएसई उचित कदम उठा रही है।
सरकार का प्रयास रहा कि पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई बहुत ज्यादा प्रभावित न हो
भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइजर जैसी अनेक जरूरी चीजें होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से आती हैं। युद्ध के बाद से ही होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों का आना जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है। बावजूद इसके, हमारी सरकार का यह प्रयास रहा है कि पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई बहुत ज्यादा प्रभावित न हो। देश अपनी जरूरत के के 60% एलपीजी आयात करता है, इसकी सप्लाई में अनिश्चिता के कारण सरकार ने एलपीजी के डोमेस्टिक उपयोग को प्राथमिकता दी हैए साथ ही एलपीजी के देश में ही उत्पादन को भी बढ़ाया जा रहा है। भारत सरकार अलग अलग देशों के सप्लायर्स के साथ भी लगातार संपर्क में है। प्रयास यह है कि जहां से संभव हो वहां से तेल और गैस की सप्लाई होती रहे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते हैं और वहां काम करते हैं। वहां समंदर में जो कमर्शियल शिप चलते हैं, उनमें भारतीय क्रू मेंबर की संख्या भी बहुत अधिक है। ऐसे अलग-अलग कारणों के चलते भारत की चिंताएं स्वाभाविक रूप से अधिक हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि भारत की संसद से, इस संकट को लेकर एकमत और एकजुट आवाज दुनिया में जाए।
देश के सभी पावर प्लांट्स के पर्याप्त कोल स्टॉक्स उपलब्ध
युद्ध का एक बहुत बड़ा चैलेंज ये भी है कि भारत में गर्मी का मौसम शुरू हो रहा है। आने वाले समय में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली के डिमांड बढ़ती जाएगी। फिलहाल देश के सभी पावर प्लांट्स के पर्याप्त कोल स्टॉक्स उपलब्ध हैं। भारत में लगातार दूसरे साल 100 करोड़ टन कोयला उत्पादन करने का रिकॉर्ड बनाया है। पावर जेनरेशन से लेकर पावर सप्लाई तक के हमारे सभी सिस्टम की निरंतर मॉनिटरिंग भी की जा रही है।
कमर्शियल जहाजों पर हमला और होर्मुज स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में रुकावट अस्वीकार्य
जहां तक डिप्लोमेसी की बात है, भारत की भूमिका स्पष्ट है शुरुआत से ही हमने इस संघर्ष को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मैंने स्वयं भी पश्चिम एशिया के सभी संबंधित नेताओं से बातचीत की है। मैंने सभी से तनाव को कम करने और इस संघर्ष को खत्म करने का आग्रह किया है। भारत ने नागरिकों, एनर्जी और ट्रांसपोर्ट से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का विरोध किया है। कमर्शियल जहाजों पर हमला और होर्मुज स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में रुकावट अस्वीकार्य है। भारत डिप्लोमेसी के जरिए युद्ध के माहौल में भी, भारतीय जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है।
बातचीत और कूटनीति ही इस समस्या का समाधान
भारत हमेशा से मानवता के हित में और शांति के पक्ष में अपनी आवाज उठाता रहा है। मैं फिर कहूंगा, कि बातचीत और कूटनीति ही इस समस्या का समाधान है। हमारे हर प्रयास तनाव को कम करने इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए है। इस युद्ध में किसी के भी जीवन पर संकट मानवता के हित में नहीं है, इसलिए भारत का प्रयास सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रोत्साहित करने का है।
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