मासूम की जान पर बन आई : पीएमसीएच के चिकित्सकों ने एंडोस्कोपी से L&Key निकाल बचाया जीवन
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। एक दो वर्षीय मासूम ने खेलते-खेलते घर में टूल-बॉक्स में रखी L&Key (एलएंडकी) निगल ली। बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हुई तो परिजन उसे उदयपुर के भीलों का बेदला स्थित पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) लेकर पहुंचे। पीएमसीएच के चिकित्सकों की टीम ने बिना एक पल गंवाए बच्चे का एक्स-रे और सीटी स्कैन से पेट में फंसी L&Key की पॉजीशन देखी और उसे एंडोस्कोपी के जरिए सफलतापूर्वक बच्चे के पेट से बाहर निकाल दिया। udaipur news : Two-year-old kid swallows L&Key, PMCH Doctors remove it by endoscopy
पीएमसीएच के चेयरमेन राहुल अग्रवाल ने बताया कि आपातकालीन स्थितियों में सही समय पर लिया गया फैसला ही जीवन रक्षक होता है। हमारे डॉक्टर्स ने एक बार फिर अपनी विशेषज्ञता साबित की है।
L&Key के नुकीला होने से एंडोस्कोपी के दौरान सांस नली को फटने से बचाना बड़ी चुनौती थी
भीलवाड़ा जिले के गंगापुर निवासी 2 वर्षीय जयराज घर में खेल रहा था। जयराज के पिता पेशे से कार मैकेनिक हैं, जिसके चलते घर में औजारों का टूल बॉक्स रखा था। बच्चा कमरे में रखे टूल बॉक्स के सामान से खेलने लगा। बच्चे के माता-पिता रोजमर्रा के कार्यों में व्यस्त थे। बच्चे ने टूल-बॉक्स में रखे औजारों से खेलते-खेलते उसमें रखी एक एलएनकी निगल ली।
कुछ ही देर में बच्चे को सांस लेने में तकलीफ होने लगी और उसकी हालत बिगड़ने लगी। घबराए परिजन उसे तुरंत स्थानीय निजी अस्पताल ले गए, जहां से उसे प्राथमिक जांच के बाद भीलवाड़ा रैफर किया गया, भीलवाड़ा में चिकित्सकों ने बच्चे की गंभीर हालत देख उसे उदयपुर रैफर कर दिया।
परिजन बच्चे को तुरंत पीएमसीएच, भीलों का बेदला लेकर पहुंचे। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. मयंक आमेटा ने तत्काल एक्स-रे और सीटी स्कैन करवाया। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि लोहे की एलनकी बच्चे के पेट में फंसी हुई थी।
डॉ. मयंक आमेटा ने बताया कि एलनकी जैसे नुकीले और सख्त औजार को एंडोस्कोपी के माध्यम से निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा कार्य था। इसे निकालते समय श्वसन नली के फटने या आंतरिक चोट लगने का खतरा रहता है। लेकिन अस्पताल में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं और अनुभवी टीम ने बिना सर्जरी के L&Key को सफलतापूर्वक बच्चे के पेट से निकाल लिया।
इस जटिल प्रक्रिया में गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के डॉ. आशीष मेहता, डॉ. मयंक आमेटा, निश्चेतना विभाग की डॉ. गरिमा भण्डारी, एंडोस्कोपी टेक्नीशियन विजय व अजीम और नर्सिंग स्टाफ लवीशा, कृष्णा एवं नरेश की टीम शामिल रही।
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