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NEET-PG आरएमसी बोर्ड के आदेश ने OBC और SC/ST छात्रों के कॅरियर पर खड़ा किया संकट

rajasthan NEET-PG medical counceling Board order for OBC and SC ST medical students of other state -2rajasthan NEET-PG medical counceling Board order for OBC and SC ST medical students of other state -2

उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। देश में ओबीसी और एससी/एसटी के मेडिकल छात्रों के लिए स्नातकोत्तर (पीजी) में एडमीशन को सुगम बनाने के लिए नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिशनेशन (NBE) ने कट ऑफ को रिवाइज्ड कर जीरो परसेंटाइल (माइनस 40) कर दिया है, वहीं राजस्थान नीट-पीजी मेडिकल काउंसलिंग बोर्ड का 18 फरवरी 2026 को जारी एक आदेश दूसरे राज्यों के ओबीसी और एससी एसटी छात्रों के कॅरियर पर कुठाराघात कर रहा है। क्यों कि राजस्थान नीट-पीजी मेडिकल काउंसलिंग बोर्ड ने आदेश जारी किया है कि 103 अंकों से कम अंक लाने वाले दूसरे राज्यों के ओबीसी और एससी एसटी कैंडीडेट स्ट्रे वैकेंसी राउंड में हिस्सा नहीं ले सकते हैं। जब छात्र स्ट्रे वैकेंसी राउंड में हिस्सा ही नहीं ले सकेंगे तो वे राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में पीजी कोर्स में एडमीशन नहीं ले सकेंगे। जबकि अभी भी राजस्थान के कई निजी मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीट्स खाली हैं।

इस अजीबोगरीब आदेश की वैधता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। क्यों राजस्थान नीट-पीजी मेडिकल काउंसलिंग बोर्ड ने बैठक कर यह निर्णय 18 फरवरी को लिया है, लेकिन बोर्ड सदस्यों के इस पर हस्ताक्षर 20 फरवरी के हैं। आदेश की प्रति देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि बोर्ड चेयरमैन ने अपने स्तर पर निर्णय लेकर आदेश जारी कर दिया और बोर्ड सदस्यों के हस्ताक्षर 20 फरवरी को लिए गए। किसी भी बोर्ड द्वारा निर्णय लेने के दौरान दूसरे सदस्यों का होना जरूरी होता है। खासबात यह भी है कि हस्ताक्षर में किसी भी सदस्य का पूरा नाम नहीं लिखा है।

ओबीसी और एससी/एसटी मेडिकल छात्रों का कहना है कि हम भारत के नागरिक हैं। राजस्थान भारत से अलग नहीं हैं। दूसरे राज्यों के मेडिकल काउंसलिंग बोर्ड ने ऐसा कोई नियम लागू नहीं किया है। जब राजस्थान के छात्र दूसरे राज्यों के मेडिकल कॉलेजों के पीजी कोर्स में एडमीशन ले रहे हैं, तो हमें राजस्थान में एडमीशन से क्यों रोका जा रहा है। एक ही देश में दो नियम लागू हो रहे हैं, डबल इंजन वाली राजस्थान सरकार दूसरे राज्यों के ओबीसी और एससी/एसटी वर्ग के अधिकारों पर कुठाराघात कर रही है। इस आदेश के कारण पीजी कोर्स में एडमीशन से वंचित होने वाले कई कैंडीडेंट्स के कॅरियर पर संकट खड़ा हो गया है। यह ओबीसी और एससी/एसटी वर्ग के अधिकारों के साथ खिलवाड़ है।

बोर्ड मेंबर्स ने ओबीसी/एससी/एसटी कैटेगरी में निर्णय लिया है कि स्ट्रे वैकेंसी राउंड के लिए दूसरे राज्यों के कैंडिडेट्स जिनका क्वालिफाइंग स्कोर 103 तक है, उन्हें स्ट्रे वैकेंसी राउंड में हिस्सा लेने दिया जा जाएगा और जिनका क्वालिफाइंग स्कोर 103 से कम है, वे स्ट्रे वैकेंसी राउंड में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। राजस्थान के रहने वाले लेकिन दूसरे राज्यों से एमबीबीएस पास करने वाले कैंडिडेट्स को नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन द्वारा उनकी कैटेगरी के लिए जारी क्वालिफाइंग स्कोर के हिसाब से हिस्सा लेने दिया जाएगा।

राजस्थान नीट पीजी मेडिकल काउंसलिंग बोर्ड के चेयरमैन एसएम शर्मा ने बताया कि हम राजस्थान के लिए निर्णय ले सकते हैं, दूसरे राज्यों में क्या नियम है, इससे हमारा सरोकार नहीं। हमने जो भी निर्णय लिया है वह अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) से राय लेकर लिया है। तो अब जो भी होगा वो कोर्ट मे होगा।

फेडरेशन ऑफ प्राइवेट मेडिकल कॉलेज ऑफ राजस्थान के प्रतिनिधि राजस्थान मेडिकल काउंसलिंग बोर्ड के इस निर्णय से असहमत हैं और इसके खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि बोर्ड के एक फैसले से स्ट्रे वैकेंसी राउंड में दूसरे राज्यों के ओबीसी और एससी/एसटी के हजारों कैंडीडेट का हिस्सा नहीं ले पाना उनके कॅरियर और भविष्य के साथ खिलवाड़ है। दूसरे राज्य का कैंडीडेट, है तो भारत का नागरिक ही, फिर उसके साथ दोहरा व्यवहार सही नहीं है। इसके अलावा प्रतिनिधियों का यह भी कहना है कि बोर्ड का यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी उल्लंघन करता है।

डिसक्लेमर: एआर लाइव न्यूज (AR Live News) से मिलते-जुलते नामों से रहें सावधान, उनका एआर लाइव न्यूज से कोई संबंध नहीं है। एआर लाइव न्यूज के संबंध में कोई भी बात करने के लिए पत्रकार लकी जैन (9887071584) और पत्रकार देवेन्द्र शर्मा (9672982063) ही अधिकृत हैं।

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