हिरणमगरी सेक्टर तीन में तिलक नगर वासियों का फूटा आक्रोश
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर की विभिन्न कॉलोनियों, पार्कों व सार्वजनिक स्थलों पर आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक से आमजन दुखी हो गया है। स्थिति यह है कि उदयपुर की कई कॉलोनियों में कुत्तों के आतंक से लोग अपने बच्चों को अकेला घर से बाहर खेलने या स्कूल भेजने से भी डरने लगे है। हिरणमगरी सेक्टर तीन, तिलक नगर के निवासी भी आवारा कुत्तों से इतने दुखी हो चुके है कि नगर निगम और जिला प्रशासन पर तंज कसते हुए कहा है कि कॉलोनी से आवारा कुत्तों को नहीं हटा सकते तो इंसानों को ही शिफ्ट कर दो। street dog terror
आवारा कुत्तों से परेशान तिलक नगर सेक्टर 3 क्षेत्र के निवासी आज कॉलोनी में एकत्र हुए और चिंता जताई कि क्षेत्र में आवारा कुत्तों का आतंक दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है, लेकिन जिला प्रशासन और नगर निगम इन पर अकुंश लगाने कोई प्रभावी कदम नहीं उठा रहा है। तिलक नगर निवासी अंकिता छाजेड़ ने बताया कि क्षेत्रवासी व उनके बच्चे जैसे ही दो पहिया वाहन लेकर या पैदल घर से बाहर निकलते हैं, कुत्ते पीछे दौड़ने लगते है। प्राची मारू ने बताया कि हाल ही में मॉर्निग वॉक पर निकली तो अचानक कुत्ते पीछे पड़ गए। चिल्लाने पर आसपास मौजूद लोगों ने कुत्तों को दूर भगाया। street dog terror
हर दिन किसी न किसी को कुत्तों के आतंक का सामना करना पड़ रहा
स्थानीय लोगों ने हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि अक्सर कोर्ट के आदेशों का हवाला देकर कुत्तों को हटाने में असमर्थता जताई जाती है। यदि नियमों के अनुसार कुत्तों को कॉलोनी में ही रखना है, तो इंसानों के लिए कोई सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जाए। आबादी के बीच कॉलोनी से कुत्तों को नहीं हटा सकते तो इंसानों को ही शिफ्ट कर दो। शानी जैन और खुशबु जैन ने कहा कि कॉलोनी में हर दिन किसी न किसी को कुत्तों के आतंक से भागकर सुरक्षित स्थान की शरण लेने मजबूर होना पड़ रहा है।
कुत्तों के कारण बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग कोई भी सुरक्षित नहीं
निशा चपलोत ने बताया कि वे बच्चों को स्कूल से लेकर लौट रही थीं, तभी आवारा कुत्ते अचानक पीछे दौड़े। मुश्किल से जान बचाई। अब तो बच्चों को कॉलोनी में खेलने के लिए घर से बाहर भेजने से भी डर लगने लगा है। कॉलोनी के कई बुजुर्गों का सुबह शाम घर के बाहर टहलना भी लगभग बंद हो गया है। बैठक में मौजूद कई महिलाओं ने आक्रोश के साथ कहा कि जिन्हें कुत्तों की चिंता है, वे आवारा कुत्तों को अपने घर ले जाकर पालें। कॉलोनी इंसानों के रहने की जगह है। कुत्तों के कारण बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग कोई भी सुरक्षित नहीं हैं। क्षेत्रवासी हीना नाहर, रवि इडिवाल, संदीप नाहर, प्रसून जैन, प्रदीप चपलोत, विकी कोठारी व विकास छाजेड़ ने भी कॉलोनी में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक पर चिंता और आक्रोश जताते हुए कुत्तों को पकड़ने की नगर निगम से मांग की।
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