उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर के इंदिरा आईवीएफ और इंदिरा एंटरटेनमेंट के संस्थापक डॉ. अजय मुर्डिया के साथ हुई करोड़ों की धोखाधड़ी मामले में उदयपुर सेंट्रल जेल में बंद बॉलीवुड फिल्म डायरेक्टर विक्रम भट्ट, उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट और को-प्रोड्यूसर मेहबूब अंसारी की जमानत याचिका राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर ने खारिज कर दी है। 7 दिसंबर 2025 को हुई गिरफ्तारी और 7 दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद से 16 दिसंबर से विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी उदयपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं, वहीं मेहबूब अंसारी 18 नंवबर से जेल में हैं। ajay murdia v/s vikram bhatt: jodhpur high court rejects vikram bhatt and Shwetambari bail application
जोधपुर हाईकोर्ट में तीनों की जमानत याचिका खारिज करते समय कहा कि प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार प्रकरण में विक्रम भट्ट, श्वेतांबरी ने कई फर्मों के नाम से अलग-अलग बिल बनवाकर परिवादी (अजय मुर्डिया) से पैसा ट्रांसफर करवाया और उस पैसे का उपयोग मूल उद्देश्य में नहीं कर, काफी पैसा अन्य खातों से घुमाते हुए स्वयं व अपने परिजनों के खातों में ट्रांसफर किया। इसमें मेहबूब अंसारी की भी पूरी मिलीभगत रही है। ऐसे में तीनों को अभी जमानत देना न्यायोचित न होकर तीनों की जमानत याचिका खारिज की जाती है।
भट्ट के वकील की दलीलें जमानत में काम नहीं आयीं
विक्रम भट्ट के वकील ने 4 महत्वपूर्ण दलीलें जोधपुर हाईकोर्ट के समक्ष रखीं, लेकिन ये दलीलें भट्ट दंपत्ति व मेहबूब अंसारी को जमानत दिलवाने में काम नहीं आयी।
- दलीलें1. यह पूरा घोटाला परिवादी के अकाउंटेंट की ओर से किया गया है और इस संबंध में मुंबई के वर्सोवा थाने में गत वर्ष एफआईआर भी दर्ज करवायी गयी थी। पूर्व में दर्ज प्रकरण से बचने के लिए परिवादीगणों ने मिलकर विक्रम भट्ट, श्वेतांबरी सहित अन्य के खिलाफ यह एफआईआर उदयपुर में दर्ज करवायी है।
- 2. विक्रम भट्ट के वकील ने तर्क दिए कि फर्म के खातों से स्वयं परिवादी, उसके बेटों और बहू ने 4 करोड रूपए प्राप्त किए, जबकि वे फिल्म निर्माण में न तो कोई काम कर रहे थे और न ही किसी प्रकार का सहयोग कर रहे थे।
- 3. भट्ट के वकील ने कहा एग्रीमेंट के अनुसार दो फिल्मों की रिलीज पर जो पैसा रिटर्न प्राप्त होता, वही अगली दो फिल्मों के निर्माण में लगाया जाता, लेकिन पहली फिल्म फ्लॉप होने से पैसा रिटर्न प्राप्त नहीं हुआ और अगली फिल्मों का निर्माण कार्य रूक गया।
- 4. भट्ट के वकील ने तर्क दिया कि विक्रम भट्ट के बिलों को फर्जी और कूटरचित होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इन तथ्यों की एफएसएल रिपोर्ट नहीं है।
डिसक्लेमर: एआर लाइव न्यूज (AR Live News) से मिलते-जुलते नामों से रहें सावधान, उनका एआर लाइव न्यूज से कोई संबंध नहीं है। एआर लाइव न्यूज के संबंध में कोई भी बात करने के लिए पत्रकार लकी जैन (9887071584) और पत्रकार देवेन्द्र शर्मा (9672982063) ही अधिकृत हैं।
रोचक वीडियोज के लिए एआर लाइव न्यूज के https://www.youtube.com/@arlivenews3488/featured यू-ट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें

