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अशांत घोषित क्षेत्रों में स्थायी निवासियों की सम्पत्तियों की रक्षा के लिए राज्य सरकार लाएगी विधेयक

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जयपुर,एआर लाइव न्यूज। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में बुधवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में अशांत घोषित क्षेत्रों में स्थायी निवासियों की सम्पतियों एवं किरायेदारों के अधिकारों के संरक्षण के लिए विधेयक लाने सहित कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि जनसंख्या असंतुलन की स्थिति बनने से सार्वजनिक व्यवस्था, सद्भाव एवं मेलजोल से रहने के सामुदायिक चरित्र पर प्रभाव पड़ता है। ऐसे क्षेत्रों में दंगे, भीड़ द्वारा हिंसा से अशांति की परिस्थिति उत्पन्न होने पर उस क्षेत्र के स्थायी निवासियों को अपनी स्थायी सम्पतियां कम दामों पर बेचने को मजबूर होना पड़ता है। cabinet meeting rajasthan government

ऐसे क्षेत्र विशेष को अशांत क्षेत्र घोषित किए जाने के बाद सक्षम प्राधिकारी की पूर्वानुमति के बिना वहां अचल संपत्ति के हस्तांतरण को अमान्य एवं शून्य माना जाएगा। सक्षम प्राधिकारी की पूर्वानुमति से ही अचल संपत्ति का हस्तांतरण इच्छुक व्यक्तियों द्वारा किया जा सकेगा। प्रावधानों का उल्लंघन करने पर कारित अपराध गैर जमानती और संज्ञेय होगा जिसमें 3 वर्ष से 5 वर्ष तक कारावास और अर्थदण्ड की सजा देय होगी। राज्य में सामुदायिक सद्भावना एवं सामाजिक संरचना कायम रखी जा सकेगी। इस विधेयक को विधानसभा के आगामी सत्र में रखा जाएगा।

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने बताया कि राजस्थान एयरोस्पेस एण्ड डिफेन्स पॉलिसी का अनुमोदन किया गया है। विनिर्माण परियोजनाओं के लिए न्यूनतम 50 से 300 करोड़ तक अचल पूंजी निवेश को लार्ज, 300 करोड़ से 1 हजार करोड़ को मेगा और 1 हजार करोड़ से अधिक को अल्ट्रा मेगा परियोजनाओं की श्रेणी में रखा जाएगा। सर्विस सेक्टर के लिए 25 करोड़ से 100 करोड़ तक अचल पूंजी निवेश वाली परियोजनाएं लार्ज, 100 करोड़ से 250 करोड़ तक मेगा और 250 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को अल्ट्रा मेगा की श्रेणी में रखा जाएगा।

पात्र एयरोस्पेस एवं डिफेन्स मैन्युफैक्चरिंग और सेवा उद्यमों को एसेट क्रिएशन इन्सेन्टिव के रूप में 7 वर्षों तक राज्य कर के 75 प्रतिशत पुनर्भरण के निवेश अनुदान, विनिर्माण उद्यमों के लिए 20 से 28 प्रतिशत और सर्विस सेक्टर के 14 से 20 प्रतिशत तक 10 वर्षों में वितरित पूंजीगत अनुदान अथवा 10 वर्षों तक वार्षिक किश्तों में देय 1.2 प्रतिशत से 2 प्रतिशत तक टर्नओवर लिंक्ड प्रोत्साहन में से किसी एक विकल्प का चयन करने की सुविधा दी जाएगी। टॉप-अप के रूप में 10 से 15 प्रतिशत एम्प्लॉयमेंट बूस्टर, पहली तीन मेगा अथवा अल्ट्रा मेगा इकाइयों के लिए 25 प्रतिशत सनराइज बूस्टर, 10 प्रतिशत एंकर बूस्टर, 20 प्रतिशत थ्रस्ट बूस्टर जैसे लाभ भी प्रदान किए जाएंगे।

रीको से भूमि लेने वाले मेगा, अल्ट्रा मेगा विनिर्माण उद्यमों को 10 वर्षों तक फ्लेक्जिबल लैण्ड पेमेंट और 5 वर्षों के लिए 25 प्रतिशत ऑफिस स्पेस हेतु लीज रेन्टल सब्सिडी का लाभ भी देय होगा। नीति में बैंकिंग, व्हीलिंग और ट्रांसमिशन चार्जेज में छूट, फ्लेक्सिबल लैंड पेमेंट मॉडल, ऑफिस-स्पेस लीज रेंटल सब्सिडी जैसे प्रावधान तथा कैप्टिव पावर प्लांट में किए गए निवेश का 51 प्रतिशत पात्र स्थायी पूंजीगत निवेश में शामिल करने जैसे विशेष इन्सेंटिव्स का भी प्रावधान किया गया है। एयरोस्पेस एण्ड डिफेन्स उद्योगों को दीर्घकालिक राहत देने के लिए 7 वर्षों तक विद्युत शुल्क से शत प्रतिशत छूट, 7 वर्षों तक मंडी शुल्क अथवा बाजार शुल्क का शत प्रतिशत पुनर्भरण, स्टाम्प शुल्क, रूपांतरण शुल्क में 75 प्रतिशत छूट तथा 25 प्रतिशत पुनर्भरण की व्यवस्था भी की गई है।

कैबिनेट द्वारा अनुमोदित प्रदेश की पहली राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी राज्य को सेमीकंडक्टर विनिर्माण, डिजाइन, पैकेजिंग तथा संबद्ध इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में देश का प्रमुख गंतव्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह नीति निवेशकों को आकर्षित कर सेमीकंडक्टर क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देगी और उच्च तकनीक आधारित रोजगार के नए अवसर सृजित करेगी।

सात वर्षों तक विद्युत शुल्क से शत प्रतिशत छूट, स्टाम्प शुल्क भू-रूपांतरण शुल्क में 75 प्रतिशत छूट तथा 25 प्रतिशत पुनर्भरण शामिल है। भारत सरकार द्वारा इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन योजना के अंतर्गत स्वीकृत पूंजी सब्सिडी के 60 प्रतिशत के समतुल्य पूंजी अनुदान राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहन स्वरूप दिए जाएंगे। बैंकों अथवा वित्तीय संस्थानों से लिए गए टर्म लोन पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान भी उपलब्ध होगा।

पर्यावरणीय परियोजनाओं की लागत का 50 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति, कैप्टिव पावर प्लांट हेतु सात वर्षों तक विद्युत शुल्क से शत प्रतिशत छूट तथा राजस्थान ग्रीन रेटिंग सिस्टम के अंतर्गत प्रमाणित इकाइयों को सहमति शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा सकेगी। रोजगार सृजन प्रोत्साहन, स्किल एवं ट्रेनिंग इन्सेंटिव, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी क्रिएशन इन्सेंटिव और क्वालिटी सर्टिफिकेशन इन्सेंटिव जैसे अन्य लाभ भी नीति में देय होंगे।

राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 में किसी भी प्रकार से बाल विवाह में भाग लेने, उसकी संविदा करने अथवा स्वयं बाल विवाह करने वाले सरकारी कर्मचारी पर अनुशासनिक कार्यवाही की जाती है। अब बाल विवाह निरोधक अधिनियम, 2006 के अनुरूप बालक की परिभाषा 21 वर्ष से कम आयु के पुरुष तथा 18 वर्ष से कम आयु की महिला के रूप में निर्धारित की गई है। राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।

डिसक्लेमर: एआर लाइव न्यूज (AR Live News) से मिलते-जुलते नामों से रहें सावधान, उनका एआर लाइव न्यूज से कोई संबंध नहीं है। एआर लाइव न्यूज के संबंध में कोई भी बात करने के लिए पत्रकार लकी जैन (9887071584) और पत्रकार देवेन्द्र शर्मा (9672982063) ही अधिकृत हैं।

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