उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी (MLSU) के एक रिटायर्ड अधिकारी को डिजीटल अरेस्ट कर 68 लाख रूपए ठगने का मामला सामने आया है। पीड़ित अधिकारी ने उदयपुर के साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवायी है। साइबर ठगों ने पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तारी का डर दिखाकर 12 दिनों में टुकड़ों-टुकड़ों में 68 लाख रूपए अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए। udaipur MLSU retired officer digital arrest defrauded of Rs 68 lakh
पुलिस ने बताया कि न्यू केशवनगर निवासी 68 वर्षीय भरत व्यास साइबर ठगों का शिकार हुए हैं। उन्होंने रिपोर्ट में बताया कि 28 दिसंबर को मोबाइल पर एक व्हाट्सएप कॉल आया। साइबर ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया और कहा उन पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस बन रहा है, उन्होंने किसी नरेश से 20 लाख रूपए का लेन-देन किया है। इसके बाद सीबीआई चीफ बताकर किसी अन्य व्यक्ति ने बात की और फिर एक और व्यक्ति ने बात की, जिसने खुद को मजिस्ट्रेट बताया। ये सभी लोगों ने जॉइंट कॉल पर उनके बात की। ठगों ने संपत्ति, बैंक बैलेंस, जेवर आदि की जानकारी ली और बैंक बैलेंस और जेवरों की कीमत बताकर 11.90 लाख रूपए कोर्ट के बैंक अकाउंट में जमा करने का कहकर झांसे में लिया और डर दिखाया कि इसके बाद ही जमानत हो सकेगी।
पीड़ित ने बताया कि गिरफ्तारी और सामाजिक बदनामी के डर से उन्होंने ठगों के झांसे में आकर सबसे पहले 5.50 लाख रूपए ट्रांसफर किए, इसके बाद ठगों ने डर दिखाकर उनसे 9 लाख, 20 लाख, 20 लाख, 2 लाख और 6.40 लाख रुपए और ट्रांसफर करवा लिए। आरोपियों के कॉल डिसकनेक्ट करने के बाद पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ।
सेवानिवृत अधिकारी साइबर ठगों के सॉफ्ट टारगेट
साइबर ठगों के लिए अकेले रह रहे सेवानिवृत अधिकारी या बुजुर्ग सॉफ्ट टारगेट होते हैं। 65-70 वर्ष की उम्र में कई बुजुर्ग रूटीन में इतना एक्टिव नहीं होते ही वे रोज साथी-सहयोगियों या दोस्तों से मिलें। टेक्नोलॉजी का ज्ञान और जागरूकता तुलनात्मक युवा या वयस्क लोगों से कम होती है। स्मार्टफोन यूजर बुजुर्ग अज्ञानता में किसी लिंक पर क्लिक कर साइबर ठगों को कब उनके मोबाइल और बैंक खातों का एक्सेस दे देते हैं, उन्हें पता ही नहीं चलता। साइबर ठग सारी जानकारी जुटाने के बाद व्हाट्सएप कॉल कर डिजीटल अरेस्ट करते हैं और बुजुर्ग को झांसे में ले लेते हैं।
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