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EBUS शुरूआती लंग कैंसर और टीबी को डायग्नोस करने में कारगर: गीतांजली में कई मरीजों को मिला जीवन

geetanjali hospital using Endobronchial Ultrasound (EBUS) technique to diagnose lung cancer and tuberculosisgeetanjali hospital using Endobronchial Ultrasound (EBUS) technique to diagnose lung cancer and tuberculosis

हेल्थ न्यूज, उदयपुर(एआर लाइव न्यूज)। देश में कैंसर से होने वाली ज्यादातर मौतों का बड़ा कारण समय पर उसकी पहचान न हो पाना है। ज्यादातर मामलों में मरीज में जब तक लंग कैंसर या टीबी का पता चलता है, तब तक यह काफी फैल चुका होता है और फिर मरीज को बचाना मुश्किल हो जाता है। विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुत आंकड़े बताते हैं कि लंग कैंसर, टीबी और श्वसन व फैफड़ों संबंधी गंभीर बीमारियों का समय पर पता चल जाए तो उचित उपचार शुरू कर मरीज की जान बचाने की उम्मीद बढ़ जाती है। इसी का समाधान बनकर EBUS नाम की तकनीक उभरी है। जो शुरूआती लंग कैंसर और टीबी का बारीकी से जांच कर डायग्नोसिस कर लेती है। geetanjali hospital using Endobronchial Ultrasound EBUS technique to diagnose lung cancer and tuberculosis

उदयपुर स्थित गीतांजली हॉस्पिटल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अंकित अग्रवाल ने बताया कि चिकित्सकों के बेहतर उपचार के लिए हॉस्पिटल में EBUS से जांच सुविधा उपलब्ध है। इस तकनीक के माध्यम से लंग कैंसर, टीबी जैसी जटिल बीमारियों का बहुत ही शुरूआती दौर में पता चला जाता है, इससे सही समय पर सही उपचार शुरू होने से मरीज का जीवन बचाने में आसानी होती है।

एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड ब्रोंकोस्कोपी (EBUS) एक एडवांस्ड, मिनिमली इनवेसिव और अत्यधिक सटीक तकनीक है, जिसमें ब्रोंकोस्कोप के सिरे पर अल्ट्रासाउंड लगा होता है। इसकी मदद से डॉक्टर उन लिम्फ नोड्स और घावों (lesions) तक भी पहुंच सकते हैं, जो एयरवे (श्वास नली) के बाहर होते हैं, जहां सामान्य ब्रोंकोस्कोपी नहीं पहुंच पाती।

सामान्य ब्रोंकोस्कोपी केवल एयरवे के अंदर की जगह दिखाती है। कई बार कैंसर, टीबी या लिम्फ नोड्स की बीमारी एयरवे के बाहर होती है, इसलिए सामान्य ब्रोंकोस्कोपी में दिखती ही नहीं। EBUS की अल्ट्रासाउंड तकनीक ऐसे छिपे हुए घावों को भी स्पष्ट दिखा देती है, जिससे सटीक निदान संभव हो जाता है।

  1. कई मरीजों में सामान्य ब्रोंकोस्कोपी से लंग कैंसर का पता नहीं चला था, लेकिन ईबस ब्रोंकोस्कोपी से बीमारी सही स्टेज पर पकड़ में आई और तुरंत इलाज शुरू हो पाया। मरीज अब उपचार के साथ स्थिर और बेहतर हैं।
  2. दो मरीजों में फेफड़ों की टीबी छिपी हुई थी, साधारण जांचों में टीबी दिखाई नहीं दे रही थी, पर ईबस से लिम्फ नोड्स में छुपी टीबी का पता चला। अब दोनों मरीजों का सही समय पर टीबी का उपचार शुरू हो सका और दोनों के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार है।

यह उन्नत तकनीक अभी केवल कुछ चुनिंदा बड़े केंद्रों पर उपलब्ध है, जिनमें उदयपुर का गीतांजली मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में शामिल है। गीतांजली हॉस्पिटल में इसका सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है, जिसकी मदद से यहां मरीजों के कई जटिल बीमारियों का निदान किया जा चुका है।

डिसक्लेमर: एआर लाइव न्यूज (AR Live News) से मिलते-जुलते नामों से रहें सावधान, उनका एआर लाइव न्यूज से कोई संबंध नहीं है। एआर लाइव न्यूज के संबंध में कोई भी बात करने के लिए पत्रकार लकी जैन (9887071584) और पत्रकार देवेन्द्र शर्मा (9672982063) ही अधिकृत हैं।

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