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गीतांजली हॉस्पिटल की टीम ने कराया सुरक्षित प्रसव, जबकि अहमदाबाद के चिकित्सकों ने कर दिया था इनकार

Geetanjali Hospital doctors done challenging but safe delivery of woman in serious health situationGeetanjali Hospital doctors done challenging but safe delivery of woman in serious health situation

उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर में अत्याधुनिक सुविधाओं और तकनीकों से युक्त मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल्स होने के बावजूद आज भी उदयपुर और मेवाड़ के कई लोगों में इलाज के लिए अहमदाबाद जाने की आम धारणा है। इसी धारणा को गीतांजली हॉस्पिटल (Geetanjali Hospital) के डॉक्टर्स की टीम ने गलत साबित किया है। सिर में चोट लगने से महिला की गंभीर हालत देख जहां अहमदाबाद के निजी हॉस्पिटल ने परिजनों को गर्भवती महिला का गर्भपात कराने के लिए कह दिया था, वहीं गीतांजली हॉस्पिटल के डॉक्टर्स की टीम ने महिला का चुनौतीपूर्ण प्रसव करवाया, आज मां और बच्चा दोनों ही स्वस्थ हैं।

गीतांजली मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अंकित अग्रवाल ने बताया कि यह सबकुछ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना शर्मा, न्यूरो सर्जन डॉ. गोविंद मंगल, नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. सुशील गुप्ता, एनेस्थिसियोलोजिस्ट डॉ. अलका छाबड़ा और डॉ. पूजा व टीम के समन्वित प्रयासों से संभव हुआ है। चिकित्सकों की टीम ने जटिल परिस्थितियों में सुरक्षित मातृत्व का एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है।

दो माह पूर्व सिरोही निवासी 35 वर्षीय गर्भवती महिला सिर में चोट लगने से गंभीर हालत में हॉस्पिटल में भर्ती करवायी गयी थीं, तब वे 23 सप्ताह की गर्भवती थीं। गीतांजली हॉस्पिटल लाने से पहले परिजन महिला की गंभीर हालत देख सिरोही के स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिलवाकर उन्हें अहमदाबाद के निजी हॉस्पिटल लेकर गए थे। महिला की गंभीर अवस्था को देख अहमदाबाद के हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने परिजनों को बच्चे को टर्मिनेट करने की सलाह दी, लेकिन परिवार अजन्मे बच्चे को इस दुनिया में लाना चाहता था, इसी निश्चय के साथ परिजन महिला को अहमदाबाद से उदयपुर के गीतांजली हॉस्पिटल लेकर आाए।

गीतांजली हॉस्पिटल में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने परिवार को भरोसा दिलाया कि न्यूरो और प्रसूति व स्त्री रोग विभाग मिलकर मां और बच्चे दोनों को सुरक्षित रखने का हर संभव प्रयास करेंगे। रोगी को न्यूरो सर्जन डॉ. गोविंद मंगल के अंतर्गत भर्ती किया गया, वहीं स्त्री एवं प्रसूति विभाग की डॉ. अर्चना शर्मा व उनकी टीम ने गर्भावस्था को सुरक्षित अवधि तक पहुंचाने की चुनौती अपने हाथ में ली।

डॉ.अर्चना शर्मा ने बताया कि महिला के गर्भ को 23 सप्ताह ही हुए थे और 23 सप्ताह में डिलीवरी जीवन के लिए अत्यधिक जोखिमपूर्ण थी, इसलिए लगभग 2 महीने तक न्यूरो और स्त्री व प्रसूति रोग विभाग ने संयुक्त रूप से रोगी की सतत निगरानी और इलाज किया। डॉ. मंगल के नेतृत्व में टीम ने महिला का न्यूरो संबंधी उपचार किया और स्त्री एवं प्रसूति विभाग की टीम ने उपचार के दौरान महिला के गर्भ को सुरक्षित रखा। गर्भस्थ शिशु के फेफड़ों के विकास के लिए एंटीनेटल स्टेरॉयड (एएनएस) की दो भी खुराकें दी गईं। 30 सप्ताह की गर्भावस्था होने पर चिकित्सकों ने महिला की चिकित्सकीय स्थिति को देखते डिलीवरी कराने का निर्णय लिया। चिकित्सकों की टीम ने ऑपरेशन कर महिला का सुरक्षित प्रसव करवाया। प्री-टर्म होने के कारण नवजात की संपूर्ण देखभाल नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. सुशील गुप्ता और उनकी टीम ने की।

अत्यंत जटिल केस होने के बावजूद गीतांजली हॉस्पिटल की मल्टीडिसिप्लिनरी एप्रोच से न्यूरो सर्जरी, स्त्री व प्रसूति रोग विभाग और नियोनेटोलॉजी विभागों ने बेहतरीन समन्वय स्थापित कर महिला का उपचार किया और सुरक्षित प्रसव भी करवाया। आज मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।

डिसक्लेमर: एआर लाइव न्यूज (AR Live News) से मिलते-जुलते नामों से रहें सावधान, उनका एआर लाइव न्यूज से कोई संबंध नहीं है। एआर लाइव न्यूज के संबंध में कोई भी बात करने के लिए पत्रकार लकी जैन (9887071584) और पत्रकार देवेन्द्र शर्मा (9672982063) ही अधिकृत हैं।

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