कौन है उदयपुर के ये लोग, जिनके खाते साइबर ठगों को बेचे जा रहे: उदयपुर पुलिस उन खाता धारकों को भी बनाएगी आरोपी जिन्होंने साइबर फ्रॉड के लिए खाते बेचे
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। झीलों का शहर उदयपुर साइबर ठगों या कहें साइबर दुनिया के अंडरवर्ल्ड “डार्क वेब” का गढ़ बनता जा रहा है। उदयपुर की लग्जरी लाइफ से प्रभावित कई युवा कम समय ये ज्यादा धन कमाने के लिए साइबर ठगों के म्यूल बैंक अकाउंट्स प्रोवाइडर बन गए हैं। उदयपुर में ऐसे कई गिरोह संचालित हैं, जो कमीशनखोरी के लिए अवैध ऑनलाइन बेटिंग एप्लीकेशन के जरिए साइबर ठगों को म्यूल बैंक अकाउंट्स बेच रहे हैं। उदयपुर पुलिस ने पिछले 2-3 महीनों में ही ऐसे 20 से अधिक गिरोहों का खुलासा कर बड़े स्तर पर गिरफ्तारियां की हैं। Udaipur police bust cyber criminals 20 gangs of mule bank account providers in last two month
पुलिस पड़ताल में सामने आया है कि इन गिरोहों को चला रहे युवा किसी न किसी तरह से ऑनलाइन बेटिंग एप्लीकेशन से जुड़ते हैं और फिर साइबर ठगों के संपर्क में आकर म्यूल बैंक अकाउंट्स प्रोवाइडर या कहें साइबर ठगों के हिस्सेदार बन जाते हैं। डिजीटल अरेस्ट से लेकर हर प्रकार के साइबर क्राइम और फ्रॉड का पैसा इन म्यूल बैंक अकाउंट्स के जरिए ही रोटेट होकर अपराधियों तक पहुंचता है। लेकिन हर बार एक सवाल अछूता रह जाता है कि ये म्यूल अकाउंट प्रोवाइडर्स जिन लोगों के बैंक खाते साइबर ठगों को बेच रहे हैं, वो कौन लोग हैं, किन क्षेत्रों के हैं और वे क्यों उनके खाते कुछ हजार रूपए के कमीशन के लिए किसी भी अनजान शख्स को बेच रहे हैं।
दो थाना क्षेत्रों में कार्रवाई कर 9 आरोपी किए गिरफ्तार
उदयपुर एसपी योगेश गोयल ने बताया कि दो दिनों में साइबर ठगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उदयपुर की हिरणमगरी, सवीना और सुखेर थाना पुलिस ने ऑनलाइन बेटिंग और गेमिंग ऐप के जरिए साइबर ठगों को म्यूल अकाउंट्स बेचने वाले दो गिरोहों का खुलासा किया है। पुलिस ने 9 आरोपियों को अरेस्ट किया है। सवीना पुलिस ने 6 लोगों को गिरफ्तार कर इनके कब्जे से साइबर फ्रॉड में उपयोग किए जा रहे 25 मोबाइल, एक लेपटॉप, विभिन्न खाताधारकों के अलग-अलग बैंको की 32 पासबुक, 16 चैक बुक व 73 एटीएम कार्ड बरामद किए हैं।
लोगों के साथ ऑनलाइन ठगी कर साइबर फ्रॉड की राशि इन बैंक अकाउंट्स में मंगवायी जा रही थी। गिरफ्तार हुए इन आरोपियों ने बैंक अकाउंट्स साइबर ठगों को बेचे थे। जब भी इन खातों में धनराशि आती, ये आरोपी इन खातों से रूपए निकालते और अपना कमीशन रखकर हवाला के जरिए साइबर ठगों तक यह राशि पहुंचा देते थे। इन गिरोहों का खुलासा एडि.एसपी उमेश ओझा, डीएसपी (शहर पूर्व) छगन पुरोहित, डीएसपी (शहर पश्चिम) राजेश यादव के नेतृत्व में थानाधिकारी भरत योगी, अजय सिंह राव, रविन्द्र चारण और डीएसटी प्रभारी विक्रम सिंह की टीम ने किया है।
खाता धारकों को भी आरोपी बनाएगी पुलिस
एडि.एसपी उमेश ओझा ने बताया कि पुलिस अब हर उस खाता धारक की पड़ताल करेगी, जिसकी पासबुक, चेकबुक और एटीएम इन आरोपियों के कब्जे से बरामद हुए हैं। कमीशन के लालच में अगर इन खाताधारकों की मिलीभगत पायी जाती है तो इन्हें भी आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया जाएगा।
ये 9 आरोपी गिरफ्तार : परिवार के दोनों भाई साइबर ठगी में लिप्त
- सवीना थाना पुलिस ने इन्द्रप्रस्थ कॉलोनी सेक्टर 14 निवासी दो भाई सुधीर और मनीष कालरा पुत्र मनोहरलाल, शक्तिनगर निवासी यजत साधवानी पुत्र विजय साधवानी, सेक्टर 9 निवासी कैदार बागडी पुत्र रतनलाल, सूरत गुजरात निवासी सागर सामरिया पुत्र रतनलाल, अलवर निवासी महेन्द्र सिंह को गिरफ्तार किया है।
- सुखेर थाना पुलिस ने सेक्टर 14 हाल प्रियदर्शनी नगर बेदला निवासी दो भाई नीनाद और रिदम वैष्णव पत्र ऋषिकेश वैष्णव सहित और इनके दोस्त रामपुरा हाल प्रियदर्शनी नगर बेदला निवासी राजन वैष्णव पुत्र धनराज को गिरफ्तार किया है।
क्या होते हैं म्यूल बैंक अकाउंट
जिन बैंक खातों का उपयोग साइबर क्राइम या ऑनलाइन फ्रॉड से जनित धनराशि को ट्रांसफर करने में होता है, उन बैंक खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। साइबर अपराधों के बड़े-बड़े गिरोह छोटे शहरों में कमीशन का लालच देकर एजेंट नियुक्त करते हैं, ये एजेंट ऐसे क्षेत्रों में जाते हैं, जहां इन्हें कम पढ़े-लिखे, अनपढ़, गरीब, जरूरतमंद लोग आसानी से मिल जाएं। एजेंट इन लोगों को 1000-2000 अधिकतम 5000 रूपए कमीशन का लालच देकर इनके बैंक खाते खुलवाते हैं और इनकी पासबुक, चेकबुक और एटीएम ले लेते हैं। कई बार इन खाता धारकों को पता भी नहीं होता है कि इनके बैंक अकाउंट्स का किन कार्यों में उपयोग हो रहा है।
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