सितंबर-अक्टूबर को क्यों खूंखार हो जाते हैं पैंथर : गत वर्ष 18 अक्टूबर को गोगुंदा वन रेंज में मारा गया था आदमखोर पैंथर, एक महीने में किया था उसने 8 लोगों का शिकार
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर जिले के गोगुंदा फॉरेस्ट रेंज में पैंथर एक बार फिर खुंखार और हमलावर हो रहे हैं। इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। दो दिनों में पैंथर हमले में चार लोगों के गंभीर घायल होने के बाद, रविवार तड़के चलवा गांव में एक पैंथर नर शावक, पैंथर के आपसी संघर्ष में मारा गया है, तो वहीं दूसरा पैंथर चलवा गांव में ही रहट के समीप वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में कैद हो गया।
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले दो दिनों में पैंथर चार लोगों पर हमला कर उन्हें गंभीर घायल कर चुका है। चलवा गांव व आस-पास के क्षेत्र में ग्रामीणों ने एक नर, एक मादा और दो शावकों सहित चार पैंथर का मूवमेंट देखा है। पैंथर के आपसी संघर्ष में नर शावक के मारे जाने से अब ग्रामीणों में ज्यादा दहशत है, आशंका है कि कई मादा पैंथर लोगों के प्रति ज्यादा हिंसक और खुंखार न हो जाए।
अब फिर अक्टूबर में शुरू हुए हमले, पिंजरे से पैंथर की आवाज सुनकर ग्रामीण इकट्ठे हुए
पैंथर मूवमेंट के चलते चलवा गांव में वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में रविवार तड़के एक पैंथर फंस गया। पैंथर की घुर्राहट सुनकर उसे देखने सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौके पर इकट्ठे हो गए। भीड़ देखकर पैंथर खुद को नुकसान पहुंचाए, इससे पहले वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गयी। मौके पर पहुंचे वन विभाग के फॉरेस्टर पुष्पेंद्र सिंह भाटी, नरेंद्र पुरी गोस्वामी, तेज सिंह झाला, धर्मेंद्र मीणा, रोहित पंचाल, भूरीलाल व कमल की टीम ने ग्रामीणों को पैंथर के पिंजरे से दूर किया और पैंथर को रेस्क्यू कर उदयपुर स्थित सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क लेकर आए हैं।
इसी दौरान चलवा गांव में ही चलवा चौक घाटी के पास एक नर शावक मरा हुआ मिला है। ग्रामीणों ने बताया कि बीती रात दो पैंथर के संघर्ष की आवाज सुनी गयी थी। संभवत पैंथर के आपसी संघर्ष में एक नर शावक मारा गया है। मौके पर ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठी हो गयी। वन अधिकारी जयवर्धन सिंह राठौड़ के नेतृत्व में वनकर्मियों ने पैंथर के शव को पशु चिकित्सालय पहुंचाया, जहां पोस्टमार्टम के बाद मृत पैंथर का मौकेला नर्सरी में अंतिम संस्कार हुआ है।
गत वर्ष इसी एक महीने में आदमखोर पैंथर ने 8 लोगों का शिकार किया था
गत वर्ष गोगुंदा फॉरेस्ट रेंज में इसी अक्टूबर महीने में एक पैंथर आदमखोर हो गया था। गोगुंदा थाना क्षेत्र में गत वर्ष 18 सितंबर 2024 को आदमखोर पैंथर ने पहला मानव शिकार किया था, इसके बाद उसने एक के बाद एक हमले कर 15 से 20 दिनों के अंतराल में 8 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। इस आदमखोर पैंथर को पकड़ना चुनौती हो गया था। तब सेना, पुलिस, वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों ने साथ मिलकर संयुक्त ऑपरेशन चलाकर 18 अक्टूबर 2024 को इस आदमखोर पैंथर को शूट कर मारा था।
ग्रामीणों में दहशत
गत वर्ष अक्टूबर महीने में ही एक पैंथर आदमखोर हुआ था, इस वर्ष भी पिछले दो दिन में पैंथर ने चार लोगों पर हमला कर गंभीर घायल कर दिया है। ऐसे में ग्रामीणों ने दहशत का माहौल है। इधर स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने पैंथर मूवमेंट के संभावित स्थानों पर चार पिंजरे लगा दिए हैं। वन अधिकारियों ने कहा यहां वनकर्मियों की टीम मौजूद है।
क्यों बारिश के बाद सितंबर और अक्टूबर माह में हिंसक हो जाते हैं पैंथर
वन्यजीव विशेषज्ञ सेवानिवृत वनअधिकारी डॉ. सतीश शर्मा ने बताया कि अक्टूबर माह में पैंथर हमले बढ़ने के दो कारण हो सकते हैं। पहला बड़ा कारण बारिश के बाद मक्का की फसल की कटायी शुरू होती है, साथ ही अन्य फसलों की बुआई के लिए भी खेत से घास, खरपतवार काटी जाती है तो खेतों में या घास में छुपकर रहने वाले पैंथर का एक्सपोजर बढ़ जाता है और उसका कोरिडोर डिस्टर्ब होता है। फसल की कटाई में ग्रामीण बैठा होता है तो उसे छोटा जानवर होने का कंफ्यूजन होता है और वह हमला कर देता है।
दूसरा बड़ा कारण है अक्टूबर सर्दियों की शुरूआत के साथ ही मादा पैंथर शावकों को जन्म देना शुरू कर देती है। इधर फसल कटायी होने से ग्रामीणों की आवाजाही बढती है। तो मादा पैंथर कई बार इस डर से भी हमला कर देती है कि कहीं जंगल की तरफ जा रहा वह व्यक्ति उसके शावकों को न मार दे।
डिसक्लेमर: एआर लाइव न्यूज (AR Live News) से मिलते-जुलते नामों से रहें सावधान, उनका एआर लाइव न्यूज से कोई संबंध नहीं है। एआर लाइव न्यूज के संबंध में कोई भी बात करने के लिए पत्रकार लकी जैन (9887071584) और पत्रकार देवेन्द्र शर्मा (9672982063) ही अधिकृत हैं।
रोचक वीडियोज के लिए एआर लाइव न्यूज के https://www.youtube.com/@arlivenews3488/featured यू-ट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें

