वाणिज्यिक कर विभाग की बड़ी कार्रवाई कर : सामाजिक कार्यक्रम से गिरफ्तार हुआ जीएसटी चोरी का मास्टरमाइंड
जयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। राज्य वाणिज्यिक कर विभाग की प्रवर्तन शाखा प्रथम की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 9.59 करोड़ रूपए की जीएसटी चोरी पकड़ी है। कर विभाग की टीम ने जयपुर स्थित विश्वकर्मा इण्डस्ट्रियल एरिया में आयरन एवं स्क्रेप का कागजी कारोबार करने वाली दो फर्मों बाबा मैटल्स तथा खण्डेलवाल एण्टरप्राईजेज पर एक साथ सर्च और सर्वे कार्रवाई की। टीम ने मास्टरमाइंड महेन्द्र खण्डेलवाल को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। rajasthan 9 crore GST fraud: GST team arrest mahendra khandelwal, rajasthan gst raid on baba matels and khandelwal enterprises in vki jaipur
इस कार्रवाई में आरोपी की गिरफ्तारी भी बड़ी फिल्मी स्टाईल में हुई। जीएसटी चोरी का खुलासा होने के बाद जब कर विभाग की टीम उसके मास्टरमाइंड महेन्द्र खंडेलवाल को गिरफ्तार करने पहुंची, तब तक वह अंडरग्राउंड हो चुका था। इस पर टीम ने रैकी की, टीम को महेन्द्र खंडेलवाल के एक सामाजिक कार्यक्रम में आने की सूचना मिली, तो कर विभाग के दो अधिकारी कैटरिंग वाले बनकर उस सामाजिक कार्यक्रम में पहुंचे और जैसे ही महेन्द्र खंडेलवाल वहां पहुंचा, उसे दबोच लिया।
जिनके साथ व्यापार दिखाया, वो फर्में भी फर्जी
मुख्य आयुक्त कुमार पाल गौतम ने बताया कि कार्रवाई से पूर्व विभाग ने जीएसटी पोर्टल पर दोनों फर्मों के खरीद फरोख्त संबंधी आंकड़ो का विश्लेषण किया तथा अपने गुप्त स्त्रोतों से इन फर्मों की व्यापारिक गतिविधियों की सूचना जुटाई गयी। इस दौरान पाया गया कि दोनों फर्मो का संचालन मास्टरमाइंड महेन्द्र खण्डेलवाल द्वारा किया जा रहा है।
विभागीय जांच में स्पष्ट हुआ कि महेन्द्र खण्डेलवाल द्वारा अपनी दोनों फर्मो में कूटरचित बोगस बिलों के आधार पर कुल 53 करोड़ 27 लाख रूपये की खरीद दिखाकर 9 करोड़ 59 लाख रूपये की राजस्व हानि की गई है। महेन्द्र खण्डेलवाल ने सुनियोजित तरीके से राज्य के बाहर स्थित आयरन एवं स्क्रेप के बोगस कारोबारियों से संपर्क किया और दिल्ली, आगरा स्थित बोगस फर्मों से बिलों की खरीद कर आगत कर (आईटीसी) का अनुचित लाभ लेकर राजस्व की हानि की।
फर्में, बिल, ई-वे बिल सब फर्जी निकला
मुख्य आयुक्त गौतम ने बताया कि जब विभाग ने इन फर्मो में माल की खरीद के लिए निर्मित ई-वे बिलों की गहनता से पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आये। ई-वे बिल में जिन वाहनों का नम्बर दर्ज किया गया था, उनका फर्मों के घोषित व्यवसाय स्थल, गोदाम आदि पर आगमन होना नही पाया गया। इनमें से कई वाहनों का संचालन तो राज्य के बाहर होना पाया गया।
इस प्रकार मास्टरमाइंड महेन्द्र खण्डेलवाल द्वारा आगत कर दुरूपयोग (आईटीसी मिसयूज) की सोची समझी रणनीति के तहत माल की वास्तविक आपूर्ति प्राप्त किये बिना ही कूटरचित ई-वे बिलों का निर्माण किया गया और केवल कागजी संव्यवहार के द्वारा बोगस बिलों से खरीद दिखाकर मिथ्या आगत कर का लाभ प्राप्त कर राजस्व की क्षति की गई। महेन्द्र खण्डेलवाल को आरजीएसटी/सीजीएसटी एक्ट 2017 के प्रावधानो के तहत गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।
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