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जलसंसाधन के अफसर सोते रहे, इतने समय में तो भर जाते वल्लभनगर और बड़गांव बांध

Dewas Project Akodara DamDewas Project Akodara Dam

देवेंद्र शर्मा,उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। 379 करोड़ के देवास प्रोजेक्ट-2 के तहत बनाया गया आकोदड़ा बांध ओवरफ्लो हो गया। इसका पानी मानसी वाकल बांध में जा रहा है। मानसी वाकल बांध सिर्फ 20 सेंटीमीटर ही खाली है। मानसी वाकल बांध के गेट भी कभी भी खोलने पड़ सकते है और गेट खोलते ही मेवाड़ के हक का पानी सीधा गुजरात जाएगा। अधिकारी अब भले ही आकोदड़ा बांध का पानी उदयपुर की झीलों में डायवर्ट कर भी दे तो बहुत देरी हो चुकी होगी। Dewas Project Akodara Madari Dam udaipur

यह स्थिति तब है जब वल्लभनगर बांध खाली पड़ा है। इसके आगे बड़गांव बांध और उसके बाद घोसूंडा बांध भी खाली है। दिन भर एसी चैंबर में बैठकर मंथन करने वाले जलसंसाधन विभाग के स्थानीय अधिकारी थोड़े भी संवेदनशील होकर समय रहते टनल से आकोदड़ा और मादड़ी बांध का पानी उदयपुर की झीलों में डायवर्ट कर देते तो आज यह स्थिति नहीं बनती। यहां के कमांड एरिया को किसानों को सिंचाई के लिए जरूरत अनुसार पानी मिलने के साथ ही क्षेत्र के भूजल स्तर में भी सुधार आता। Dewas Project Akodara Madari Dam udaipur

जलसंसाधन विभाग के अधिकारी उन्हीं के विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष की नियमित रिपोर्ट भी गंभीरता से देख लेते तो ध्यान में रहता कि वल्लभनगर बांध का जलस्तर 19.50 फीट के मुकाबले 13.3 फीट ही हुआ है। यानी वल्लभनगर बांध अभी भी क्षमता के मुकाबले 54.71 प्रतिशत ही भरा है। यह समय रहते भर जाता तो इसका पानी मावली क्षेत्र के बड़गांव बांध को भरता।

बड़गांव बांध का जलस्तर 7.62 मीटर के मुकाबले 4.69 मीटर ही हुआ है। यानी बड़गांव बांध को भी भरने के लिए अभी काफी पानी की जरूरत है। बड़गांव बांध समय पर भर जाता तो इसके पानी से चित्तौड़ क्षेत्र का घोसूंडा बांध भी अभी काफी भर सकता था। घोसूंडा बांध का जलस्तर 423 आरएलमीटर के मुकाबले 419.35 आरएलमीटर ही हुआ है। यानी इस बांध को भी अभी काफी पानी की जरूरत है।

मादड़ी बांध भी 34 फीट के मुकाबले 27.6 फीट भर चुका है। यह ओवरफ्लो हुआ तो इसका पानी भी मानसी वाकल जाएगा। इधर देवास प्रथम बांध (अलसीगढ़ बांध) 34 फीट के मुकाबले 29 फीट भर चुका है। ओवरफ्लो होने पर यह पानी भी सीधा गुजरात जाएगा। ऐसे में अधिकारी चाहते तो समय पर आकोदड़ा के साथ ही मादड़ी और देवास प्रथम(अलसीगढ़ बांध) का पानी भी इतने दिनों में उदयपुर की झीलों में डायवर्ट कर सबसे पहले यहां की जरूरतों को पूरा कर सकते थे।

मानसी वाकल बांध भी उदयपुर शहर की करीब 100 कॉलोनियों में पेयजल व्यवस्था के काम आता है, लेकिन सवाल यह है कि मानसी वाकल बांध को आकोद़ड़ा बांध से ही भरना था तो इस नदी में पानी रोकने के लिए आकोदड़ा बांध बनाने की क्या जरूरत पड़ी मानसी वाकल बांध तो नदी से आने वाले पानी से वैसे ही भरता रहता।

देवास प्रोजेक्ट-2 के अन्तर्गत 302 एमसीएफटी भराव क्षमता का बांध बनाकर 11.5 किलोमीटर लंबी टनल (सुरंग) का निर्माण किया गया। साथ ही 85 एमसीएफटी भराव क्षमता का मादडी बांध बनाकर 1.21 किलोमीटर की सुरंग को आकोदडा की मुख्य सुरंग से जोडा गया था। यह कवायद उदयपुर की झीलों को भरने के लिए की गई थी।

देवास प्रोजेक्ट बनाने का मकसद यही था कि मानसून सीजन में पीछोला और फतहसागर भरने के बाद उदयसागर और वल्लभनगर बांध को भी भरा जा सके। इसके बाद भी पानी की अतिरिक्त उपलब्धता होने पर वल्लभनगर बांध के बाद मावली क्षेत्र में स्थित बड़गांव बांध भी भरा जा सके।

डिसक्लेमर: एआर लाइव न्यूज (AR Live News) से मिलते-जुलते नामों से रहें सावधान, उनका एआर लाइव न्यूज से कोई संबंध नहीं है। एआर लाइव न्यूज के संबंध में कोई भी बात करने के लिए पत्रकार लकी जैन (9887071584) और पत्रकार देवेन्द्र शर्मा (9672982063) ही अधिकृत हैं।

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