प्रदेश के अन्य जिलों सहित उदयपुर में भी ऐसे कई जर्जर स्कूल में पढ़ रहे है बच्चे, धृतराष्ट्र बने हुए है जिम्मेदार
झालावाड़,(एआर लाइव न्यूज)। राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में संचालित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की अचानक छत गिर गई। इस हादसे में 7 मासूम बच्चों की मौत हो गई। आरंभिक जानकारी अनुसार 20 से अधिक बच्चे इस हादसे में घायल हुए है। इनमें कुछ गंभीर घायल भी है। इस घटना ने जिम्मेदारो की संवेदनशिलता पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। उदयपुर जिले में भी ऐसे कई जर्जर सरकारी स्कूल हैं, जिनमें मजबूर होकर बच्चे पढ़ाई कर रहे है और जिम्मेदार धृतराष्ट्र बने हुए हैं। jhalawar school roof collapse
झालावाड़ के मनोहर थाना क्षेत्र में पिपलोदी गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के बच्चे नियमित पढ़ाई के लिए स्कूल में कक्षा शुरू होने वाली थी, उससे पहले ही जर्जर स्कूल भवन की छत भरभरा कर गिर गई। अचानक हुए इस हादसे में चीख पुकार मच गई। सबसे पहले स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे और अपने स्तर पर बचाव राहत कार्य शुरू किया। उसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।
जर्जर स्कूल भवन की सुध क्यों नहीं ली
बड़ा सवाल तो यह है कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते इस जर्जर स्कूल भवन की सुध क्यों नहीं ली। सबसे पहले तो ऐसे गैर जिम्मेदार अधिकारियों को संस्पेंड करने के साथ ही उनकी तनख्वाह और पेंशन पर स्थायी रूप से रोक लगाने जैसा कदम उठाना चाहिए। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हादसे पर दुख व्यक्त किया है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने हादसे की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए है।
हादसे की उच्च स्तरीय जांच के आदेश
हादसे में अब तक 7 बच्चों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मलबे में दबे बच्चों को बाहर निकालकर नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 11 बच्चो को गंभीर हालत में जिला अस्पताल रेफर किया गया है, जबकि 2 बच्चों की हालत ज्यादा गंभीर बनी हुई है।
उदयपुर वालों जाग जाओ, यहां भी स्थिति ज्यादा ठीक नहीं है
उदयपुर जिले में भी शायद ही कोई ब्लॉक होगा, जिसमें बच्चे जर्जर स्कूल भवन में पढ़ाई नहीं कर रहे हो। उदयपुर शहर से पांच सात किलोमीटर दूर के गांवों में भी ऐसे स्कूल मिल जाएंगे, जहां बच्चे जर्जर भवन में पढाई करने को मजबूर है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को तो शायद आमजन के बच्चों का दर्द महसूस नहीं हो रहा होगा, लेकिन प्रशासनिक दृष्टि से उदयपुर संभाग की मुखिया संभागीय आयुक्त प्रज्ञा केवलरमानी और जिला कलेक्टर नमित मेहता से तो उम्मीद की ही जा सकती है कि वे बच्चों के जीवन को संकट डालने वाले स्कूलों की सुध लेने आगे आए।
प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में आए दिन छत से प्लास्टर उखड़कर क्लास रूम, बरामदे में गिरना आम बात हो चुकी है। झालावाड़ में आज हुए हादसे ने उन जिम्मेदारों की संवेदनशीलता की पोल खोलकर रख दी है जो कई सरकारी स्कूलों में जर्जर भवन की जानकारी होने के बावजूद मौन धारण कर सिर्फ सरकारी तनख्वाह उठाने में मस्त हो रहे है।
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