- इंस्पेक्शन की फेवरेबल रिपोर्ट स्कैमः रिश्वत के बदले हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज में घोस्ट फैकल्टी डॉक्टर्स और फेक पेशेंट को सही बताकर बनायी जाती थी फेबरेबल इंस्पेक्शन रिपोर्ट
- स्कैम के मुख्य किरदार “घोस्ट फैकल्टी” की जांच में कई डॉक्टर्स लपेटे में आ सकते हैं
लकी जैन, उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की मेडिकल कॉलेजों पर हुई अब तक की सबसे बड़ी रेड में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। अरबों-खरबों की कमाई के इस धंधे में किस तरह से मेडिकल कॉलेज प्रतिनिधि, स्वास्थ्य मंत्रालय, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत चल रही थी का खुलासा हुआ है। कुछ तथ्य तो ऐसे उजागर हुए हैं, जिसमें सीबीआई ने माना है कि मंत्रालय और नेशनल मेडिकल कमीशन के गोपनीय दस्तावेज वहीं के अधिकारी-कर्मचारी उनके मोबाइल में फोटो लेकर लीक कर रहे थे। वहीं मेडिकल कॉलेजों में चल रही घोस्ट फैकल्टी के मुद्दे ने तो नेशनल थ्रेट का अंदेशा तक खड़ा कर दिया है। NMC inspection favorable report scam : CBI raid on medical colleges, FIR Lodged against health ministry, NMC Officials with 36 persons.
सीबीआई की इस कार्रवाई के बाद देश के सभी मेडिकल कॉलेजों में हड़कंप मचा हुआ है। सीबीआई ने 6 राज्यों के 8 मेडिकल कॉलेज के मालिक और पदाधिकारियों, केन्द्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के 9 अधिकारियों-कर्मचारियों, नेशनल मेडिकल कमीशन से जुड़े निरीक्षण कमेटी के सदस्य 4 डॉक्टर्स और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के पदाधिकारी, कुछ दलाल और बिचौलियों सहित 36 लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया है। बिचौलियों से जुड़े दूसरे मेडिकल कॉलेज भी सीबीआई जांच के दायरे में आ सकते हैं।
क्या घोस्ट फैकल्टी के रजिस्ट्रेशन होंगे कैंसिल.?
इस स्कैम के मुख्य किरदार घोस्ट फैकल्टी की जांच में कई डॉक्टर्स लपेटे में आ सकते हैं। जिनके दम पर देश-प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेज न सिर्फ एनएमसी से मेडिकल कॉलेज चलाने का अप्रूवल ले रहे थे, बल्कि मेडिकल कॉलेज में यूजी-पीजी कोर्स की सीट तक बढ़वाई जा रही थीं। प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की एक सीट करीब एक से डेढ़ करोड़ और पीजी कोर्स की एक सीट डेढ़ से दो करोड़ रूपए की होती है। देश के प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की करीब 53 हजार से अधिक सीट हैं, तो यह स्कैम कितना बड़ा हो सकता है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। सीबीआई की जांच में घोस्ट फैकल्टी का खुलासा होता है तो क्या एनएमसी इन डॉक्टर्स के रजिस्ट्रेशन कैंसिल करेगी.?
क्या होती है घोस्ट फैकल्टी : कैसे हो सकता है नेशनल थ्रेट.?
हर मेडिकल कॉलेज को इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा अप्रूवल के लिए मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती होने वाले पेशेंट की संख्या और यहां काम करने वाले डॉक्टर्स एंड फैकल्टी की संख्या भी मानकों के अनुरूप होनी चाहिए, नहीं तो एनएमसी से अप्रूवल नहीं मिलता। फैकल्टी डॉक्टर्स की संख्या मैनेज करने के लिए घोस्ट फैकल्टी अपॉइंट की जाती है। मतलब डॉक्टर किसी दूसरे स्टेट में बैठकर अपना प्राइवेट क्लीनिक चला रहा होगा, लेकिन उसका रजिस्ट्रेशन नंबर किसी दूसरे राज्य या जिले के मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी-डॉक्टर के तौर पर अपॉइंट होगा। इससे संबंधित डॉक्टर को दोहरी आय होती है और मेडिकल कॉलेज का बड़ा खर्चा बच जाता है।
- एनएमसी ने घोस्ट फैकल्टी पर रोक लगाने के लिए फिंगर-प्रिंट बायोमैट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य की। लेकिन मेडिकल कॉलेजों ने दलालों की मदद से इसका तोड़ निकाल लिया। डॉक्टर्स के आर्टिफिशियल अंगूठे और उंगलियां बनने लगी, जिनमें उनके फिंगर प्रिंट भी होते थे। तीन-चार वर्षो में यह फर्जीवाड़ा चरम पर हुआ।
- फिंगर प्रिंट बायोमैट्रिक अटेंडेंस का फर्जीवाड़ा बहुत ज्यादा हो गया तो एनएमसी ने इस वर्ष 1 मई 2025 से एनएमसी ने फैकल्टी डॉक्टर्स की रेटिना स्कैनिंग के जरिए अटेंडेंस अनिवार्य कर दी है। अब अगर मेडिकल कॉलेज संचालकों ने रेटिना स्कैनिंग का भी तोड़ निकाल लिया है, तो यह एक बड़ी नेशनल थ्रेट हो सकता है। क्यों कि देश में एयरपोर्ट पर इमीग्रेशन से लेकर विदेशों में रेटिना स्कैनिंग के जरिए ही संदिग्धों सहित सभी की पहचान होती है।।
मंत्रालय कर्मचारियों ने गोपनीय दस्तावेज किए लीक और काल्पनिक पेशेंट
सीबीआई ने एफआईआर में उल्लेख किया है कि स्वास्थ्य मंत्रालय के संबंधित सेक्शन के अधिकारी-कर्मचारी गोपनीय दस्तावेजों की फोटो उनके मोबाइल में लेकर बिचौलिए, दलालों और डायरेक्ट मेडिकल कॉलेजों के प्रतिनिधियों को पहुंचाकर सूचनाएं लीक कर रहे थे। सीबीआई ने बताया कि इन दस्तावेजों के जरिए कॉलेजों को उनके यहां आने वाले निरीक्षण की तारीख, निरीक्षण रिपोर्ट, रिन्यूअल से संबंधित जानकारी सहित अन्य सूचना पहले से ही बता दी जाती थी।
सूत्रों के अनुसार एनएमसी की इंस्पेक्टशन टीम के आने की तारीख पता चलने पर मेडिकल कॉलेजों में दिहाड़ी पर फेक पेशेंट तक भर्ती कराए जाते हैं। निरीक्षण के दौरान कॉलेज आए एनएमसी के नियुक्त डॉक्टर की टीम इन काल्पनिक पेशेंट और घोस्ट डॉक्टर्स को सही बताकर कॉलेज के अनुकूल रिपोर्ट एनएमसी को देती है, जिसके आधार पर इन मेडिकल कॉलेजों को यूजी-पीजी के बैच चलाने की अप्रूवल और परमीशन मिलती है।
इनको किया नामजद
सीबीआई ने एफआईआर में एनएमसी के निरीक्षण कमेटी के सदस्य डॉ. चैत्रा, डॉ. पी.रजिनी रेड्डी, डॉ. अशोक शेल्के, डॉ. मंजप्पा, नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के जॉइंट डायरेक्टर जीतूलाल मीणा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की पूनम मीणा, धरमवीर, पियूष मल्यान, अनूप जैसवाल, राहुल श्रीवास्तव, चंदन कुमार, दीपक, मनीषा सहित बिचौलिए और दलाल गुरूग्राम के डॉ. वीरेन्द्र कुमार, कानपुर यूपी के उदित नारायण, नई दिल्ली के जोशी मैथ्यू, वाराणसी यूपी के इंद्रबलि मिश्रा उर्फ गुरूजी, आंध्र प्रदेश के डॉ. बी हरिप्रसाद, हैदराबाद के डॉ. अंकम रामबाबू, नई दिल्ली के आर रणदीप नायर, बेंगलूरू से सतीश, मुंबई के सोशल स्टडीज चांसलर डीपी सिंह, विशाखापट्टनम के डॉ. कृष्णकिशोर को नामजद किया है।
देश के 8 मेडिकल कॉलेजों में मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन सुरेश सिंह भदौरिया, छत्तीसगढ़ रायपुर के मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन रवि शंकर, डायरेक्टर अतुल कुमार, स्टाफ अतिन कुंडू, अकाउंटेंट लक्ष्मीनारायण चंद्राकर, संजय शुक्ला, राजस्थान से मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रतिनिधि मयूर, विशाखापट्टनम के मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर वेंकट, तेलंगाना के वारंगल स्थित मेडिकल कॉलेज के जोसेफ कोमारेड्डी, उत्तर प्रदेश मेरठ के मेडिकल कॉलेज की शिवानी अग्रवाल, गांधीनगर गुजरात के मेडिकल कॉलेज के स्वामी भक्तवत्सल दास जी सहित अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। CBI raid on medical colleges
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