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लोकतंत्र की जड़े मजबूत, लेकिन मर्यादाओं में कुछ गिरावट आई हैं: राज्यपाल बागड़े

Assembly yesterday, today and tomorrow: Assembly Speakers WorkshopAssembly yesterday, today and tomorrow: Assembly Speakers Workshop

उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े ने कहा कि भारतीय संसदीय लोकतंत्र की जड़े मजबूत हैं। मर्यादाओं में निसंदेह कुछ गिरावट आई हैं, लेकिन हमारे संस्कार और संस्कृति इतनी समृद्ध हैं कि संसदीय लोकतंत्र की गरिमा और भविष्य दोनों सुरक्षित हैं।(Assembly yesterday today and tomorrow)

राज्यपाल बागड़े गुरूवार को वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा की ओर से उदयपुर में आयोजित विधानसभा कल, आज और कल विषयक मेवाड़ से संबद्ध विधानसभा अध्यक्ष समागम कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल बागड़े ने कहा कि पहले सदन में विषय पर अधिक चर्चा होती थी,अब विषयान्तर अधिक होने लगी है। विधेयक पर बहस में जनप्रतिनिधि रूचि से भाग नहीं लेते, जबकि उस पर तथ्यात्मक बहस होनी चाहिए। सदन में अलग-अलग विचारधारा के लोग होने के बावजूद एक दूसरे के प्रति सम्मान भाव होते थे, अब कटुता अधिक रहती है।(Assembly yesterday today and tomorrow)

कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि सदन में पूर्व में पक्ष-विपक्ष एक दूसरे का सम्मान करते थे, लेकिन इसमें कहीं न कहीं कमी आई है। विधायको में अध्ययन की प्रवृत्ति भी कम हो गई है। अब सिर्फ अपने-अपने पक्ष की सराहना तक सीमित हैं। उन्होंने कहा कि सदन में अनुशासन के लिए सख्ती जरूरी है,लेकिन इसका अभिप्राय यह नहीं कि आसन पर ही सवाल उठाए जाने लगें।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने कहा कि समय के साथ सभी चीजों में बदलाव हुआ है। सकारात्मक बदलावों का स्वागत है, लेकिन विधेयक पर स्वस्थ चर्चा में कमी आना ठीक नहीं है। विधानसभा की लाईब्रेरी का उपयोग कम हुआ है। इससे सदस्यगण किसी महत्वपूर्ण विषय पर बात तक नहीं कर पाते और कानून निर्माण भी रस्म अदायगी जैसा हो गया है। विधेयक पर अच्छी और स्वस्थ बहस के बाद ही कानून बनना चाहिए।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शांतिलाल चपलोत ने कहा कि पहले के दौर में विधायिका का माहौल देखने योग्य था, अब इसमें गिरावट आई है। विधायी कार्यों में भी कमी आई है। जनप्रतिनिधियों के आचारण में गिरावट आई है। जनप्रतिनिधि रिश्वत लेते पकड़े जा रहे हैं, यह दौर कहां ले जाएगा यह सोचने वाली बात है।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ.सीपी जोशी ने कहा कि संविधान लागू होने के बाद से विचारधाराएं भले अलग अलग रही, लेकिन सर्वहित सर्वापरि रहा। अब स्थितियां बदल गई हैं। अब विचाराधाराओं में दूरियां भी बढ़ती जा रही हैं। यह ठीक नहीं है। कार्यक्रम में वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के कुलगुरू डॉ. कैलाश सोडाणी व वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अध्ययन केंद्र की निदेशक रश्मि बोहरा सहित शिक्षा जगत से जुड़े कई प्रबुद्धजन मौजूद थे।

डिसक्लेमर: एआर लाइव न्यूज (AR Live News) से मिलते-जुलते नामों से रहें सावधान, उनका एआर लाइव न्यूज से कोई संबंध नहीं है। एआर लाइव न्यूज के संबंध में कोई भी बात करने के लिए पत्रकार लकी जैन (9887071584) और पत्रकार देवेन्द्र शर्मा (9672982063) ही अधिकृत हैं।

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