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राजस्थान में आरटीडीसी के 38 होटल, मिडवे और कैफेटेरिया बंद पड़े हैं

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उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। प्रदेश में देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन पर्यटकों की सुविधा के लिए विभिन्न पर्यटन स्थलों और पर्यटन से जुड़े शहरों में राजस्थान पर्यटन विकास निगम यानी आरटीडीसी की 38 होटल, मिडवे और कैफेटेरिया वर्षों से बंद पड़े हैं। आरटीडीसी सक्रिय होकर सतत प्रयास करे तो बंद पड़े होटल, मिडवे और कैफेटेरिया पर पर्यटकों की चहल पहल फिर से शुरू हो सकती है।(rtdc hotels mid-ways and cafeterias)

पर्यटन विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार प्रदेश में आरटीडीसी की कुल 40 होटल,18 मिडवे, 8 कैफेटेरिया तथा 3 यात्रिकाएं है। इनमें से 31 संचालित हो रही है जबकि 38 बंद अवस्था में हैं। विभाग के अनुसार निगम की बंद पड़ी इकाईयों को आउटसोर्स पर पुनःसंचालित करने का प्रयास किया जा रहा है। पर्यटन विभाग के अनुसार राजस्थान पर्यटन विकास निगम की संचालन अवधि में पर्याप्त राजस्व अर्जन के अभाव में निरंतर व्यावसायिक हानि होने से राजकीय हित में इन 38 इकाइयों को बंद करने का निर्णय लिया गया।(rtdc hotels mid-ways and cafeterias)

आरटीडीसी की प्रदेश में 38 इकाईयां बंद है, इनमें सबसे लंबा समय जनता आवास गृह चित्तौड़गढ़ का जो कि वर्ष 1984 से बंद है। इसके अलावा लंबे समय से बंद पड़ी इकाइयों में होटल पुर्जन निवास माउंट आबू सिरोही 1991 से बंद है। मिडवे सीकर 1995 से, मिडवे मेड़ता नागौर 1998,कैफेटेरिया महेंसर और मंडावा झुंझुनू 1989 से बंद है। करौली में यात्रिका कैलादेवी 1999 से बंद है।

बात मेवाड़ की करे तो यहां भी आरटीडीसी की इकाईयां वर्षों से बंद है। चित्तौड़ में जनता आवास गृह 1984 से बंद है। होटल गवरी ऋषभदेव 2017 से बंद है। होटल जयसमंद सलूंबर 2021 से बंद है। होटल रेस्ट हाउस हल्दीघाटी राजसमंद 2021 से बंद है। मिडवे देवगढ़ राजसमंद 2017 से बंद है। मिडवे गोगुंदा उदयपुर 2021 से बंद है। कैफेटरिया मेनाल चित्तौड़गढ़ 2006 से जबकि यात्रिका नाथद्धारा राजसमंद 2014 से बंद है।

आरटीडीसी के होटल, मिडवे या कैफेटेरिया बंद पड़े है वे अच्छी लोकेशन पर है। इनमें प्राइवेट से भी अच्छी सुविधा पर्यटकों को मिल सकती है। जरूरत आरटीडीसी के सक्रिय प्रयास की है। वर्तमान में आरटीडीसी की जो होटल, मिडवे या कैफेटेरिया संचालित हो रहे है वे अच्छी लोकेशन पर होने के साथ ही सुविधा युक्त और कम किराएं में उपलब्ध होने से इनकी पर्यटकों में काफी डिमांड रहती है। ऐसे में आरटीडीसी प्रयास करे तो बंद पड़ी इकाइयों में भी फिर से पर्यटकों की चहल पहल शुरू हो सकती है।

डिसक्लेमर: एआर लाइव न्यूज (AR Live News) से मिलते-जुलते नामों से रहें सावधान, उनका एआर लाइव न्यूज से कोई संबंध नहीं है। एआर लाइव न्यूज के संबंध में कोई भी बात करने के लिए पत्रकार लकी जैन (9887071584) और पत्रकार देवेन्द्र शर्मा (9672982063) ही अधिकृत हैं।

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