प्रतापनगर चौराहे से महिला ने न लिफ्ट ली, न अपहरण हुआ और न ही गैंग रेप हुआ
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर शहर के प्रतापनगर चौराहे से लिफ्ट देने के बहाने महिला के अपहरण और चलती कार में गैंग रेप का मामला झूठा निकला है। पुलिस भी सच जानकार हैरान है कि एक महिला ऐसा आरोप की कहानी कैसे गढ़ सकती है। ताजुब्ब की बात यह है कि जो महिला यह कह रही थी कि वह प्रतापनगर चौराहे पर खड़े होकर घर जाने के लिए वाहन का इंतजार कर रही थी, वह महिला वहां उस समय थी ही नहीं। न तो महिला ने किसी कार में लिफ्ट ली थी, न ही कार से उसका अपहरण हुआ था और न ही गैंग रेप। udaipur Gang rape in car case turns false Udaipur police shocked to know the truth
मामले की जांच कर रहे पुलिस उपाधीक्षक छगन पुरोहित ने बताया कि महिला के अपहरण और गैंग रेप की पूरी कहानी और आरोप की पुष्टि नहीं हुई। आरोप झूठे निकले हैं। यह मामला घरेलू मारपीट का था। महिला देबारी क्षेत्र की रहने वाली है। 11 फरवरी की रात महिला के साथ घर में मारपीट हुई थी, जिससे उसके शरीर पर काफी चोटें थीं। घरेलू मारपीट से आहत महिला घायलावस्था में ही घर से निकल गयी थी और हाईवे पर जा रही थी, इस दौरान होटल के गार्ड ने घायलावस्था में महिला को देखा तो उसने उसकी मदद के इरादे से उससे बातचीत की और पुलिस को सूचना देकर हॉस्पिटल पहुंचाया। जांच अधिकारी ने कहा कि महिला अब कह रही है कि वह उस दिन नशे में थी और काफी परेशान थी। घरेलू मारपीट से निजात पाने के लिए उसने ये कहानी बता दी।
सीसीटीवी फुटेज से खुली पोल
11 फरवरी की रात पुलिस ने हॉस्पिटल में जब महिला से बातचीत की तो महिला ने रात करीब 9.30 बजे प्रतापनगर चौराहे पर खड़े होने, कार से लिफ्ट लेने जिसमें चार युवक बैठे थे, कार युवकों द्वारा उसका अपहरण करने और गैंगरेप की बात बतायी थी। पुलिस ने कार को चिह्नित करने के लिए प्रतापनगर चौराहे से लेकर देबारी और उससे आगे के सभी सीसीटीवी कैमरे के फुटेज खंगाले तो न तो प्रतापनगर चौराहे पर महिला की मौजूदगी दिखायी दी और न ही कार से लिफ्ट की पुष्टि हुई।
पुलिस ने महिला के गांव में लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले तो रात 11.30 बजे तक महिला के गांव में होने की पुष्टि हो गयी। इससे यह तो तय हो गया कि महिला रात 9.30 बजे प्रतापनगर चौराहे पर नहीं थी। इसके बाद पुलिस ने जब महिला से दोबारा पूछताछ की तो महिला ने सच उगल दिया।
एक झूठ ने न सिर्फ पुलिस का समय जाया किया, बल्कि उदयपुर का नाम भी खराब किया
महिला द्वारा बोला गया यह झूठ सिर्फ एक सामान्य झूठ नहीं है, ऐसी वारदात शहर का नाम खराब करती हैं, फिर उदयपुर पर्यटन शहर है, यहां ऐसी वारदातों का असर शहर को बदनाम करता है। वहीं 11 फरवरी से 15 फरवरी तक मामले की जांच में पुलिस विभाग का न सिर्फ समय जाया हुआ, बल्कि संसाधन भी खराब हुए। पुलिस को ऐसे मामलों के प्रति सख्त रवैया अपनाना चाहिए।
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