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इन दिव्यांग जोड़ों की जिंदादिली देख आप भूल जाएंगे अपना तनाव और अवसाद: प्रशांत अग्रवाल

उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। नारायण सेवा संस्थान की ओर से 8-9 फरवरी को 43वां निशुल्क दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह होने जा रहा है। इस विवाह समारोह में 51 दिव्यांग एवं निर्धन जोड़े परिणय सूत्र में बंधेंगे। संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि वर्ष 2025 का पहला दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समोराह के सभी कार्यक्रम 8 व 9 फरवरी को बड़ी स्थित संस्थान परिसर में होंगे। सभी वर-वधु परिजनों के साथ उदयपुर पहुंच रहे हैं। narayan seva sansthan 43rd Divyang Mass Wedding Ceremony

संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने बताया इन इन दिव्यांग जोड़ों से मिलकर जीवन नए उत्साह से भर जाता है। पहाड़ सी लगने वाली कई चुनौतियों को पार कर ये सभी दिव्यांग जोड़े जिस जिंदादिली के साथ जीते हैं, वह समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत है। आज समाज में परिवारों के टूटने की जो समस्या सामने आ रही है, उसके समाधान के लिए इन दिव्यांग जोड़ों की जिंदगी एक बेहतरीन उदाहरण है, जो एक-दूसरे की कमियों को अपनाकर एक-दूसरे के पूरक बन रहे हैं। प्रशांत अग्रवाल बोले कि अगर कोई अवसाद में है या मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो एक बार 8 व 9 फरवरी को इस शादी समारोह में जरूर शामिल हो, वह इन दिव्यांग जोड़ों से मिलकर अपना तनाव भूल जाएगा और सकारात्मकता की ओर अग्रसर होगा।

एमपी के टीकमगढ़ के पठारी पेठपुरा गांव निवासी 35 वर्षीय धर्मदास के जन्म से ही दोनों हाथों से दिव्यांग हैं। उन्होंने अपनी दिव्यांगता को कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि इससे पैदा हुई जिद को जीत में बदला। धर्मदास आज आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं और माता-पिता, परिवार की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। धर्मदास प्रिंटिंग प्रेस में कंम्प्यूटर ऑपरेटर हैं, जिनकी टाईपिंग स्किल्स ऐसी हैं कि कोई सामान्य व्यक्ति भी मात खा जाए। खासबात है कि वे पैरों से टाईपिंग करते हैं। धर्मदास जीवनसंगिनी की तलाश कर रहे थे, जो उन्हें समझ सके।

नारायण सेवा संस्थान द्वारा दिव्यांग व्यक्तियों के लिए बनाए गए वाट्सअप ग्रुप पर धर्मदास की मुलाकात एमपी के धार जिले की 32 वर्षीय रेशमा परमार से हुई। पोलियो के कारण रेशमा के कमर से नीचे तक का भाग निष्क्रिय है। लेकिन रेशमा ने भी कभी हार नहीं मानी, अपने साहस के दम पर घर के सभी काम कुशलता से करती हैं और आत्मनिर्भरता के साथ जी रही हैं। वाट्सअप पर हुई मुलाकात प्रेम में बदली और अब 9 फरवरी को दोनों सात फेरे लेकर जीवनसाथी बन जाएंगे।

छत्तीसगढ़ के वायगांव के सोमनाथ धृतलहरे (28) ने वर्ष 2018 में सड़क हादसे में अपना एक हाथ खो दिया था। भविष्य अंधकारमय दिख रहा था कि सोशल मीडिया पर नारायण सेवा संस्थान के बारे में पता चला और उम्मीद की किरण मिल गयी। वे छत्तीसगढ़ से उदयपुर आए। नारायण सेवा संस्थान में कृत्रिम हाथ लगवाया और साल 2023 में संस्थान से निःशुल्क त्रैमासिक मोबाइल रिपेयरिंग प्रशिक्षण प्राप्त कर आत्मनिर्भर बने। अब गांव में मोबाईल रिपेयरिंग की खुद की दुकान चला परिवार को आर्थिक संबल दे रहे हैं।

सेंदरी जैजैपुर की राखी भी दोनों पांवों और दांयी आँख से जन्मजात दिव्यांग थीं, गांव के ही एक अन्य परिवार के जरिए राखी को संस्थान के बारे में पता चला। वर्ष 2014 में राखी का संस्थान आने पर दोनों पैरों का सफल ऑपरेशन हुआ और वे कैलिपर्स के सहारे चलने में सक्षम हुईं। संस्थान के जरिए ही एक साल पहले छत्तीसगढ़ में ही सोमनाथ और राखी की “दिव्यांग पैदल मार्च” में मुलाकात हुई। अब संस्थान में ही उनकी शादी हो रही है।

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