- पकड़े गए एक आरोपी को पिता से विरासत में मिला यह गोरख धंधा: आरोपी पिता की 10 दिन पहले मौत, अब बेटा काटेगा जेल
- प्रतापनगर थाना पुलिस की बड़ी कार्रवाई : 500-500 रूपये के नकली नोट व नोट बनाने के उपकरण बरामद
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर की प्रतापनगर थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली नोट बनाने वाले गिरोह का खुलासा कर नकली नोटों का जखीरा पकड़ा है। नकली नोट एक घर में ही छापे जा रहे थे। पुलिस ने गिरोह के सरगना सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार कर 36.70 लाख रूपए के 500-500 के नकली नोट बरामद किए हैं। (udaipur police bust fake currency gang)
एसपी योगेश गोयल ने बताया कि गिरोह का सरगना कानोड़ (उदयपुर) निवासी राहुल लोहार (23) पुत्र राजमल, रोनक रातलिया (26) पुत्र भगवतीलाल, मंगलवाड़ (चित्तौड़गढ़) निवासी अजय भारती (18) पुत्र बाबु भारती, सुभाषनगर (भीलवाड़ा) निवासी बबलु उर्फ समीर जाट (26) पुत्र गणेश लाल चौधरी, रतलाम (एमपी) निवासी शहजाद शाह (30) पुत्र अकबर शाह फकीर, समीर मंसुरी (26) पुत्र सलीम मंसूरी और लखन उर्फ कालु (21) पुत्र छगन लाल को गिरफ्तार किया है। बबलु उर्फ समीर जाट का पिता गणेश भी गिरोह का मुख्य आरोपी था, लेकिन उसकी दस दिन पहले मौत हो गयी। गणेश ने ही पुत्र बबलु को इस गोरखधंधे का सदस्य बनाया था। गिरोह के खुलासे में थानाधिकारी भरत योगी के नेतृत्व में कांस्टेबल बनवारी लाल और कांस्टेबल शंकरलाल की मुख्य भूमिका रही है। udaipur police bust fake currency gang
नकली नोट छापने के ये उपकरण हुए बरामद
गोपनीय सूचना पर थानाधिकारी भरत योगी की टीम ने देबारी के पास स्थित वैशाली नगर में कानोड़ निवासी प्रकाश लखारा के मकान पर दबिश दी। दबिश के दौरान घर से राहुल, रोनक व अजय पकड़े गए। पुलिस ने मकान से नकली नोट छापने में उपयोग हो रहे डबल ट़्रे फोटोकॉपी व प्रिन्टिंग मशीन, कलर प्रिन्टर, की-बोर्ड व माउस, नोटो के बंडल बनाने का प्लास्टिक रॉल, प्रिन्टर की स्याही के पैकेट, लाईट कनेक्शन स्विच बोर्ड, डाटा केबल, नोट के बंडल बनाने के लिये रबर से भरे प्लास्टिक के डिब्बे, नोट काटने की कटर मशीन, बैंक नोट पेपर हुलिये के कागजो के कार्टुन सहित गिरोह के आरोपियों के कब्जे से 500-500 रूपये के कुल 36,70000 रूपए के नकली नोट बरामद किए हैं।
राहुल से पूछताछ कर मध्यप्रदेश के रतलाम से गिरोह के तीन आरोपी शहजाद, समीर व लखन और भीलवाड़ा से बबलु को धरदबोचा। रतलाम से पकड़े गए आरोपी 10.20 लाख रूपये के नकली नोट मार्केट में चलाने के लिए राहुल से लेकर गए थे।
घरवालों को बताया कि मर्चेंट नेवी में करता था काम
मुख्य आरोपी राहुल लोहार ने पुलिस पूछताछ में कबूला कि वह कम समय में धनवान बनना चाहता था। उसने घरवालों को घरवालों को बता रखा था कि वह मर्चेंट नेवी में काम करता है। राहुल ने आर्थिक अपराध करने वाले लोगो से मिलना शुरू किया,तब उसकी पहचान भीलवाड़ा के गणेश लाल चौधरी से हुई। गणेश लोगो के साथ धोखाधडी करने में शातिर था। गणेश लाल से मिलकर राहुल ने नकली नोट छापने का प्लान किया।
राहुल ने गणेश लाल के मार्फत ही नकली नोट बनाने के उपकरण मंगवाए। उसने मित्र रोनक जैन को गिरोह में मिलाया। रोनक जैन ने वैशाली नगर में परिचित कानोड़ निवासी प्रकाश से घर किराए पर लिया। इसके बाद ये तीनों नकली नोट छापने लगे। योजना के तहत नकली नोट गणेश लाल के मार्फत ही बाजार में चलाए जाने थे। गणेश के जरिए ही राहुल ने गिरोह में गणेश के बेटे बबलू सहित अजय, शहजाद, समीर व लखन को भी शामिल किया। प्रायोगिक तौर पर नकली नोट मार्केट में चलाकर फिर बड़ी मात्रा में नोट मार्केट में चलाए जाने की योजना थी। लेकिन दस दिन पहले ही गणेश की बीमारी से मौत हो गयी। नकली नोट मार्केट में चलाने के लिए राहुल कुछ करता, इससे पहले ही गिरोह पकड़ा गया।
कानोड के नामी डॉक्टर के अपहरण की योजना असफल हुई
आरोपी राहुल लोहार ने पुछताछ पर कबूल किया है कि ज्यादा से ज्यादा धन कमाने के लिये वह कानोड के नामी डॉक्टर के अपहरण कर फिरोती मांगने की भी फिराक में था। दोस्तो के साथ किडनेपिंग की योजना भी बनाई थी, लेकिन वो योजना सफल नही हो सकी।
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