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उदयपुर-झाड़ोल हाइवे : करोड़ों रूपए खर्च होने के बावजूद पुराने घाट सेक्शन से जा रहे वाहन

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देवेंद्र शर्मा, उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर के कुडांल से झाड़ोल होते हुए ईडर (गुजरात) तक निर्माणाधीन नेशनल हाईवे 58-ई बारिश के दिनों में पहाड़ से चट्टाने व मलबा गिरने से महीनों से अवरूद्ध पड़ा है। स्थिति यह है कि नए हाईवे निर्माण के लिए करोड़ों रूपए खर्च होने के बावजूद अभी भी वाहन चालकों को वैकल्पिक रास्ते के रूप में पुराने घाट सेक्शन से ही गुजरना पड़ रहा है। इस समस्या का स्थायी समाधान कब होगा, इसको लेकर अभी भी स्थिति साफ नहीं हो पायी है।

सार्वजनिक निर्माण विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार यह परियोजना भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित थी। परियोजना अंतर्गत सड़क को 2 पेकेज में 91 किमी सड़क का चौड़ाइकरण तथा सुदृढीकरण का कार्य किया गया था। परियोजना कार्य के पेकेज संख्या 2 (झाड़ोल से अंबावेली) का कार्य पूरा हो चुका है और एनएचएआई द्वारा टोल वसूली की जा रही है।(Udaipur-Jhadol-Idar Gujarat Highway)

पेकेज संख्या 1 के भाग कुंडाल से झाड़ोल के किमी 12/170 से 13/680 (1.51 किमी) तथा किमी 25/400 से 28/400 (3.0 किमी) भाग चक्रवात तूफान ताऊते के दौरान चट्टानें खिसकने से सड़क मार्ग अवरूद्ध हो गया था। जो आज तक अवरूद्ध है। परियोजना कार्य का यह भाग 28 फरवरी 2022 और 21 जून 2022 से अवरूद्ध है और वर्तमान में यातायात का संचालन पुराने एलाइनमेंट से किया जा रहा है।

विभागीय जानकारी अनुसार चट्टानों से अवरुद्ध हाइवे के इस हिस्से के स्थायी समाधान के लिए विशेषज्ञ सलाहकार के माध्यम से डीपीआर बनाने केंद्रीय मंत्रालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 की वार्षिक कार्य योजना में 75 लाख की स्वीकृति तथा प्रावधान रखा गया है। उक्त स्वीकृति के अंतर्गत  चौथी बार में नियमानुसार निविदा प्राप्त हुई है। बिड विश्‍लेषण के बाद लागत आधारित तकमीना क्षेत्रीय अधिकारी को अनुमोदन के लिए 22 अप्रैल 2024 को भेजा गया है। जनवरी 2025 तक उक्त स्वीकृत कार्य पूर्ण करवाया जाना संभावित है।

अधिकारी और ठेकेदार इस हाइवे के अवरूद्ध रहने के पिछे भले ही चक्रवात तूफान ताऊते को प्रमुख कारण बताते हो, लेकिन इस हकीकत से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि समय और पैसा बचाने के चक्कर में कई जगह पहाड़ों को 90 डिग्री के एंगल में काटकर हाइवे रोड बना दी गई। इस कारण कुछ देर की बारिश होते ही पहाड़ का मलबा और चट्टाने भर भरा कर हाईवे पर आ गिरते है।

हाइवे बनाने का काम चलने के दौरान भी कई बार बारिश में चट्टाने और मलबा हाइवे पर गिर चुका है और कई बार रास्ता घंटो अवरूद्ध रहने से लोग परेशान भी हुए। इन पहाड़ों को 90 डिग्री एंगल में काटने की बजाय जरूरत अनुसार तिरछा काटकर हाइवे बनाया जाता तो आए दिन हाइवे पर पहाड़ का मलबा और चट्टाने गिरने की समस्या नहीं आती है।

झाड़ोल क्षेत्र के पहाड़ इतने मजबूत नहीं कि 90 डिग्री के एंगल यानी सीधे काटकर दो पहाड़ों के बीच से हाइवे निकाल दो। उसके बावजूद इस हाइवे के निर्माण के दौरान अधिकारियों और हाइवे निर्माण करने वाली ठेकेदार कंपनी ने इस बात को कहीं न कहीं नजर अंदाज किया। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि इसी अनदेखी के चलते करोड़ों रूपए खर्च होने के बावजूद आमजन को उदयपुर-झाड़ोल हाइवे पर अभी तक पूर्ण रूप से सुगम यात्रा की सुविधा नहीं मिल पा रही है।

डिसक्लेमर: एआर लाइव न्यूज (AR Live News) से मिलते-जुलते नामों से रहें सावधान, उनका एआर लाइव न्यूज से कोई संबंध नहीं है। एआर लाइव न्यूज के संबंध में कोई भी बात करने के लिए पत्रकार लकी जैन (9887071584) और पत्रकार देवेन्द्र शर्मा (9672982063) ही अधिकृत हैं।

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