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प्रदेश में हर साल 3900 से अधिक बच्चों की डायरिया से मौत : सरकार चलाएगी स्टॉप डायरिया अभियान

rajasthan government will run STOP Diarrhoea Campaignrajasthan government will run STOP Diarrhoea Campaign

जयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। बच्चों में डायरिया होना एक बड़ी और चिंताजनक स्थिति है, खासकर से 5 वर्ष तक के बच्चों के लिए डायरिया कई बार जानलेवा साबित हो जाता है। प्रति वर्ष बच्चों की डायरिया से होने वाली मौतों के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो प्रदेश में हर साल 3900 से अधिक बच्चों की मौत डायरिया से होती है, औसतन देखा जाए तो हर दिन 10 बच्चे डायरिया के कारण काल का ग्रास बन जाते हैं।(STOP Diarrhoea Campaign in rajasthan)

राजस्थान में प्रति वर्ष डायरिया से मरने वाले बच्चों के आंकड़ों ने राज्य सरकार को भी चिंता में डाल दिया है और इसी के चलते चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग 1 जुलाई से “स्टॉप डायरिया अभियान” शुरू करने वाला है।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव शुभ्रा सिंह ने बताया कि देश में 5 साल तक के करीब 5.8 प्रतिशत बच्चों की मौत का कारण डायरिया है। डायरिया नियंत्रण में राजस्थान की स्थिति भले ही राष्ट्रीय औसत एवं अन्य राज्यों से बेहतर है, लेकिन अभी भी प्रदेश में हर वर्ष 3900 से अधिक बच्चों की मृत्यु डायरिया से होना चिंताजनक है। हमारा लक्ष्य है कि डायरिया से होने वाली मौतें आने वाले समय में शून्य हों।

अतिरिक्त मुख्य सचिव शुभ्रा सिंह ने बताया कि भारत सरकार के निर्देशानुसार प्रदेश में डायरिया पर प्रभावी रोकथाम के लिए एक जुलाई से 31 अगस्त तक स्टॉप डायरिया अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने सभी संबंधित विभाग माइक्रो प्लानिंग एवं पूर्ण समन्वय के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर इस अभियान को सफल बनाने के निर्देश दिए।

स्टॉप डायरिया अभियान-2024 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव शुभ्रा सिंह ने बताया कि आगामी दो माह मौसमी एवं जलजनित बीमारियों की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हैं। डायरिया से अधिकांश मौतें आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों, कच्ची बस्ती, पिछडे़ क्षेत्रों, बाढ़ या सूखाग्रस्त आदि इलाकों में सामने आती हैं। ऐसे संवेदनशील वर्गों एवं क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां विशेष फोकस के साथ डायरिया रोकथाम गतिविधियों का संचालन किया जाए। राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन ओआरएस एवं जिंक टेबलेट की समुचित व्यवस्था रखे और ओआरएस तथा जिंक टेबलेट का आशा एवं एनएनएम के माध्यम से घर-घर तक इनका वितरण करवाया जाए।

उन्होंने कहा कि जलदाय विभाग मानसून के दौरान पाइपलाइनों में लीकेज के कारण दूषित जल की समस्या का यथासम्भव समाधान करें। ऐसे जल स्रोत जिनका पानी दूषित होने की आशंका रहती है, वहां से जल का उपयोग नहीं किए जाने के उपाय सुनिश्चित करें। साथ हीए पेयजल के नमूने लेकर नियमित रूप से जांच की जाए।

समीक्षा बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी] आरएमएससीएल की प्रबंध निदेशक नेहा गिरि, महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव मोहनलाल यादव, अतिरिक्त आयुक्त ईजीएस जुगल किशोर मीणा, सहायक निदेशक स्थानीय निकाय विभाग शीलावती मीणा, परियोजना निदेशक बाल स्वास्थ्य डॉ. प्रदीप चौधरी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

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